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राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO बने एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा
Digital Desk
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला CEO नियुक्त किया गया है। निर्मला यादव समेत तीन नए ट्रस्टी भी बनाए गए हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वेस्टर्न एयर कमांड की कमान संभाल चुके सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक CEO नियुक्त किया गया है। ट्रस्ट में तीन नए सदस्य भी शामिल किए गए हैं, जिनमें डॉ. निर्मला यादव पहली महिला ट्रस्टी बनी हैं।
अयोध्या स्थित राम मंदिर के संचालन और प्रशासन को अधिक व्यवस्थित करने की दिशा में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। ट्रस्ट ने सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अपना पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। इसके साथ ही महेश भगचंदका, मदन मोहन पांडे और डॉ. निर्मला यादव को नए ट्रस्टी के रूप में शामिल किया गया है। निर्मला यादव ट्रस्ट की पहली महिला सदस्य बनी हैं।
मिश्रा भारतीय वायुसेना के पश्चिमी वायु कमान के पूर्व एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रहे हैं और मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसी महत्वपूर्ण कमान का नेतृत्व कर रहे थे। वह 30 अप्रैल 2026 को वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए थे।
5,585 आवेदनों में हुआ चयन
राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए चयन प्रक्रिया कई चरणों में पूरी हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, इस पद के लिए देशभर से 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे।
एक उच्चस्तरीय चयन समिति ने आवेदनों की छंटनी के बाद उम्मीदवारों को अलग-अलग चरणों में परखा। अंतिम चरण में 16 उम्मीदवारों को अयोध्या बुलाकर आमने-सामने बातचीत की गई। समिति ने अंततः तीन नाम ट्रस्ट के सामने रखे, जिनमें एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा, मेजर जनरल संजय प्रताप सिंह विश्वासराव और श्रुति भारद्वाज शामिल थे। ट्रस्ट ने मिश्रा को पहला CEO नियुक्त करने का फैसला किया।
यह नियुक्ति ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव मानी जा रही है।
करीब 40 साल की सैन्य सेवा
जितेंद्र मिश्रा को भारतीय वायुसेना में लंबा परिचालन और नेतृत्व अनुभव है। वह 6 दिसंबर 1986 को लड़ाकू पायलट के रूप में वायुसेना में शामिल हुए थे।
करीब चार दशकों के सैन्य करियर में उन्होंने 3,000 से अधिक घंटे उड़ान भरी और लड़ाकू विमान, परिवहन विमान तथा हेलीकॉप्टर समेत कई प्रकार के एयरक्राफ्ट उड़ाए। वह फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट भी रहे।
मिश्रा ने कई महत्वपूर्ण परिचालन और प्रशासनिक पदों पर काम किया। वह दो अग्रिम वायुसेना ठिकानों के एयर ऑफिसर कमांडिंग भी रहे और बाद में वायुसेना मुख्यालय में ऑपरेशनल प्लानिंग समेत कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं।
कारगिल युद्ध में अहम भूमिका
मिश्रा के सैन्य करियर में 1999 का कारगिल युद्ध भी महत्वपूर्ण अध्याय रहा है। उस दौरान वह मिराज-2000 लड़ाकू विमानों के लिए लेजर-गाइडेड बमों के परिचालन इस्तेमाल से जुड़ी टीम का हिस्सा रहे।
ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान मिराज-2000 विमानों ने पाकिस्तानी ठिकानों के खिलाफ सटीक हमलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। कारगिल के बाद मिश्रा ने परिचालन, प्रशिक्षण और परीक्षण से जुड़ी विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं।
उनका यह अनुभव बड़े अभियानों की योजना, समन्वय और संसाधनों के प्रबंधन से जुड़ा रहा है, जिसे अब ट्रस्ट के प्रशासन में उपयोगी माना जा रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर की कमान
जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को खास महत्व इसलिए भी मिल रहा है क्योंकि वह ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख थे।
जनवरी 2025 में उन्होंने वेस्टर्न एयर कमांड की कमान संभाली थी। मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की सैन्य कार्रवाई के दौरान यह कमान महत्वपूर्ण परिचालन जिम्मेदारियों में शामिल थी। मिश्रा ने उस दौरान ऑपरेशनल योजना और अभियान के क्रियान्वयन से जुड़े वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व की भूमिका निभाई।
ऑपरेशन सिंदूर में उनकी भूमिका के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से भी सम्मानित किया गया।
तीन नए ट्रस्टी शामिल
CEO की नियुक्ति के साथ ट्रस्ट ने अपने सदस्य मंडल में तीन नए ट्रस्टियों को शामिल किया है। इनमें महेश भगचंदका, मदन मोहन पांडे और डॉ. निर्मला यादव शामिल हैं।
निर्मला यादव की नियुक्ति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि वह ट्रस्ट की पहली महिला ट्रस्टी बनी हैं। मदन मोहन पांडे अयोध्या के वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता रहे हैं, जबकि महेश भगचंदका दिल्ली के कारोबारी और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े हैं।
ट्रस्ट में हुए ये बदलाव उसके प्रशासनिक और संस्थागत ढांचे को व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
CEO संभालेंगे रोजमर्रा का काम
पहली बार पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति से ट्रस्ट के कामकाज में जिम्मेदारियों का अधिक स्पष्ट विभाजन होने की उम्मीद है।
नए CEO के पास प्रशासनिक, वित्तीय और वैधानिक मामलों को संभालने की जिम्मेदारी होगी। उनसे संगठनात्मक प्रक्रियाओं को मजबूत करने, नियमों का पालन सुनिश्चित करने और मंदिर से जुड़े रोजमर्रा के प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित करने की अपेक्षा है।
इस व्यवस्था के तहत ट्रस्ट नीति निर्माण, रणनीतिक फैसलों और निगरानी पर ज्यादा ध्यान दे सकता है, जबकि CEO दैनिक प्रशासन और उसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालेंगे।
दान विवाद के बीच बड़ा बदलाव
ट्रस्ट में यह प्रशासनिक पुनर्गठन ऐसे समय हुआ है जब मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर जांच चल रही है। मामले में विशेष जांच दल (SIT) की जांच और सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही भी ट्रस्ट के एजेंडे में रही है।
ट्रस्ट ने नकद चढ़ावे की गिनती में मानवीय हस्तक्षेप कम करने के विकल्पों पर भी चर्चा की है। दो बैंकों और एक IIT से मिले प्रस्तावों का मूल्यांकन किए जाने की जानकारी सामने आई है।
ट्रस्ट की बैठक में वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। ऐसे माहौल में पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति से जिम्मेदारियों और जवाबदेही की स्पष्ट व्यवस्था बनाने की उम्मीद है।
राम मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा, दान, कर्मचारियों के समन्वय, सुविधाओं और बड़े धार्मिक आयोजनों के संचालन की चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में सैन्य प्रशासन और बड़े स्तर पर परिचालन प्रबंधन का अनुभव रखने वाले मिश्रा की नई भूमिका पर विशेष नजर रहेगी।
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