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AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा उपनेता पद से हटाया, अशोक मित्तल को सौंपी जिम्मेदारी
नेशनल न्यूज
पार्टी का बड़ा फैसला; सदन में प्रतिनिधित्व सीमित करने का निर्देश, कारणों पर चुप्पी बरकरार
आम आदमी पार्टी (AAP) ने गुरुवार को राज्यसभा में बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए सांसद राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटा दिया। उनकी जगह पार्टी ने पंजाब से ही राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी है। इस संबंध में पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को आधिकारिक पत्र भेजकर जानकारी दी है।
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि अब सदन में पार्टी की ओर से बोलने के लिए राघव चड्ढा को समय न दिया जाए। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब उनके पार्टी से दूरी बनाए रखने की चर्चा पहले से चल रही थी।
राघव चड्ढा वर्ष 2022 से पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं और उनका कार्यकाल 2028 तक है। हालांकि, हाल के महीनों में वे पार्टी के आधिकारिक रुख से अलग नजर आए। प्रमुख राजनीतिक घटनाओं पर उनकी चुप्पी ने भी सवाल खड़े किए, जिससे उनके पद में बदलाव की अटकलें तेज हो गई थीं।
पार्टी ने कारण नहीं बताए, लेकिन संकेत साफ
AAP ने इस फैसले के पीछे कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर संवाद की कमी और सक्रिय भूमिका में कमी इसकी वजह हो सकती है।
पिछले कुछ समय में राघव चड्ढा ने पार्टी के प्रमुख मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से कम प्रतिक्रिया दी। इसके बावजूद उन्होंने संसद में कई जनहित से जुड़े मुद्दे उठाए, जिनमें गिग वर्कर्स के अधिकार, मोबाइल रीचार्ज अवधि, बैंक पेनल्टी, खाद्य मिलावट और एयरपोर्ट पर सस्ते भोजन की मांग जैसे विषय शामिल रहे।
नए उपनेता का प्रोफाइल
अशोक मित्तल भी पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं और शिक्षा व उद्योग जगत से जुड़े रहे हैं। राजनीति में आने से पहले वे एक सफल व्यवसायी के रूप में पहचाने जाते थे। पार्टी नेतृत्व ने उन्हें राज्यसभा में उपनेता की जिम्मेदारी देकर संगठन में नई भूमिका दी है।
संसद में सक्रिय रहे थे चड्ढा
संसद के पिछले दो सत्रों में राघव चड्ढा ने कई अहम मुद्दे उठाए थे। इनमें डिलीवरी सेक्टर में काम करने वाले श्रमिकों की स्थिति, डिजिटल कंटेंट से जुड़े कानूनों में बदलाव, स्वास्थ्य सेवाओं की समान पहुंच और कर प्रणाली से जुड़े प्रस्ताव शामिल थे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला पार्टी के भीतर अनुशासन और नेतृत्व संरचना को मजबूत करने के संकेत देता है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि राघव चड्ढा की भूमिका पार्टी और संसद में किस तरह बदलती है।
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AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा उपनेता पद से हटाया, अशोक मित्तल को सौंपी जिम्मेदारी
नेशनल न्यूज
आम आदमी पार्टी (AAP) ने गुरुवार को राज्यसभा में बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए सांसद राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटा दिया। उनकी जगह पार्टी ने पंजाब से ही राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी है। इस संबंध में पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को आधिकारिक पत्र भेजकर जानकारी दी है।
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि अब सदन में पार्टी की ओर से बोलने के लिए राघव चड्ढा को समय न दिया जाए। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब उनके पार्टी से दूरी बनाए रखने की चर्चा पहले से चल रही थी।
राघव चड्ढा वर्ष 2022 से पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं और उनका कार्यकाल 2028 तक है। हालांकि, हाल के महीनों में वे पार्टी के आधिकारिक रुख से अलग नजर आए। प्रमुख राजनीतिक घटनाओं पर उनकी चुप्पी ने भी सवाल खड़े किए, जिससे उनके पद में बदलाव की अटकलें तेज हो गई थीं।
पार्टी ने कारण नहीं बताए, लेकिन संकेत साफ
AAP ने इस फैसले के पीछे कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर संवाद की कमी और सक्रिय भूमिका में कमी इसकी वजह हो सकती है।
पिछले कुछ समय में राघव चड्ढा ने पार्टी के प्रमुख मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से कम प्रतिक्रिया दी। इसके बावजूद उन्होंने संसद में कई जनहित से जुड़े मुद्दे उठाए, जिनमें गिग वर्कर्स के अधिकार, मोबाइल रीचार्ज अवधि, बैंक पेनल्टी, खाद्य मिलावट और एयरपोर्ट पर सस्ते भोजन की मांग जैसे विषय शामिल रहे।
नए उपनेता का प्रोफाइल
अशोक मित्तल भी पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं और शिक्षा व उद्योग जगत से जुड़े रहे हैं। राजनीति में आने से पहले वे एक सफल व्यवसायी के रूप में पहचाने जाते थे। पार्टी नेतृत्व ने उन्हें राज्यसभा में उपनेता की जिम्मेदारी देकर संगठन में नई भूमिका दी है।
संसद में सक्रिय रहे थे चड्ढा
संसद के पिछले दो सत्रों में राघव चड्ढा ने कई अहम मुद्दे उठाए थे। इनमें डिलीवरी सेक्टर में काम करने वाले श्रमिकों की स्थिति, डिजिटल कंटेंट से जुड़े कानूनों में बदलाव, स्वास्थ्य सेवाओं की समान पहुंच और कर प्रणाली से जुड़े प्रस्ताव शामिल थे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला पार्टी के भीतर अनुशासन और नेतृत्व संरचना को मजबूत करने के संकेत देता है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि राघव चड्ढा की भूमिका पार्टी और संसद में किस तरह बदलती है।
