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I-PAC पर ED की बड़ी कार्रवाई: दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद में छापेमारी
नेशनल न्यूज
कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच तेज, राजनीतिक हलकों में हलचल
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद स्थित ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई कथित कोयला चोरी और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले के तहत की जा रही है। जांच एजेंसी कंपनी के वित्तीय लेन-देन और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।
ED की टीम ने कंपनी के को-फाउंडर और डायरेक्टर से जुड़े ठिकानों को भी कार्रवाई के दायरे में लिया है। यह पूरा मामला करीब 2,742 करोड़ रुपए के कथित घोटाले से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसकी शुरुआती जांच केंद्रीय एजेंसी ने वर्ष 2020 में दर्ज एक मामले के आधार पर शुरू की थी।
क्या है मामला और क्यों हुई कार्रवाई
जांच एजेंसियों का कहना है कि कोयला चोरी से अर्जित धन को विभिन्न माध्यमों से वैध बनाने की कोशिश की गई। इसी संदर्भ में I-PAC और उसके अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है।
यह फर्म देश की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के लिए चुनावी रणनीति और कैंपेन मैनेजमेंट का काम करती रही है। फिलहाल यह पूर्वी भारत की एक प्रमुख क्षेत्रीय पार्टी के साथ जुड़ी बताई जाती है, जिससे इस कार्रवाई के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
इससे पहले जनवरी में भी ED ने कोलकाता स्थित दफ्तर और एक डायरेक्टर के आवास पर छापेमारी की थी। उस दौरान कई दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए थे। जांच एजेंसी ने संबंधित अधिकारियों को पूछताछ के लिए समन भी भेजे थे, जिन्हें अदालत में चुनौती दी गई थी।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और बढ़ती संवेदनशीलता
इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल इसे केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग के रूप में देख रहे हैं, जबकि एजेंसियां इसे कानून के तहत की जा रही नियमित प्रक्रिया बता रही हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी रणनीति तैयार करने वाली कंपनियों पर इस तरह की कार्रवाई भविष्य में राजनीतिक अभियानों की कार्यशैली पर असर डाल सकती है। इससे डेटा मैनेजमेंट और फंडिंग को लेकर पारदर्शिता की मांग और तेज हो सकती है।
जांच एजेंसी आने वाले दिनों में जब्त दस्तावेजों और डिजिटल डेटा का विश्लेषण करेगी। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों से विस्तृत पूछताछ भी की जा सकती है।
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I-PAC पर ED की बड़ी कार्रवाई: दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद में छापेमारी
नेशनल न्यूज
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद स्थित ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई कथित कोयला चोरी और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले के तहत की जा रही है। जांच एजेंसी कंपनी के वित्तीय लेन-देन और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।
ED की टीम ने कंपनी के को-फाउंडर और डायरेक्टर से जुड़े ठिकानों को भी कार्रवाई के दायरे में लिया है। यह पूरा मामला करीब 2,742 करोड़ रुपए के कथित घोटाले से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसकी शुरुआती जांच केंद्रीय एजेंसी ने वर्ष 2020 में दर्ज एक मामले के आधार पर शुरू की थी।
क्या है मामला और क्यों हुई कार्रवाई
जांच एजेंसियों का कहना है कि कोयला चोरी से अर्जित धन को विभिन्न माध्यमों से वैध बनाने की कोशिश की गई। इसी संदर्भ में I-PAC और उसके अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है।
यह फर्म देश की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के लिए चुनावी रणनीति और कैंपेन मैनेजमेंट का काम करती रही है। फिलहाल यह पूर्वी भारत की एक प्रमुख क्षेत्रीय पार्टी के साथ जुड़ी बताई जाती है, जिससे इस कार्रवाई के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
इससे पहले जनवरी में भी ED ने कोलकाता स्थित दफ्तर और एक डायरेक्टर के आवास पर छापेमारी की थी। उस दौरान कई दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए थे। जांच एजेंसी ने संबंधित अधिकारियों को पूछताछ के लिए समन भी भेजे थे, जिन्हें अदालत में चुनौती दी गई थी।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और बढ़ती संवेदनशीलता
इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल इसे केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग के रूप में देख रहे हैं, जबकि एजेंसियां इसे कानून के तहत की जा रही नियमित प्रक्रिया बता रही हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी रणनीति तैयार करने वाली कंपनियों पर इस तरह की कार्रवाई भविष्य में राजनीतिक अभियानों की कार्यशैली पर असर डाल सकती है। इससे डेटा मैनेजमेंट और फंडिंग को लेकर पारदर्शिता की मांग और तेज हो सकती है।
जांच एजेंसी आने वाले दिनों में जब्त दस्तावेजों और डिजिटल डेटा का विश्लेषण करेगी। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों से विस्तृत पूछताछ भी की जा सकती है।
