कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 3 साल की सजा, एमपी-एमएलए कोर्ट से जमानत मिली, एफडी हेराफेरी केस में दोषी

दतिया (म.प्र.)

By Rohit.P
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कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को एफडी हेराफेरी मामले में तीन साल की सजा मिली, एमपी-एमएलए कोर्ट के फैसले से विधायकी पर संकट गहराया।

कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 27 साल पुराने एफडी हेराफेरी मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट ने दोषी करार दिया है। अदालत ने उन्हें तीन साल की सजा सुनाई और जमानत भी प्रदान की। यह मामला दतिया जिले के सहकारी ग्रामीण विकास बैंक से जुड़ा है। फैसले के बाद उनकी विधायकी पर संकट गहरा गया है।

अदालत ने उन्हें धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश की धाराओं में दोषी माना है। सह-आरोपी बैंक लिपिक रघुवीर प्रजापति को भी समान रूप से दोषी ठहराया गया है। कोर्ट ने अलग-अलग धाराओं में 3-3 साल और 2 साल की सजा सुनाई है। कानूनी प्रावधानों के अनुसार, दो साल या उससे अधिक की सजा पर विधायकी स्वतः समाप्त हो सकती है। हालांकि, कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को हाईकोर्ट में अपील का अवसर मिलेगा। इस फैसले के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

एफडी हेराफेरी मामला

यह पूरा मामला वर्ष 1998 से 2001 के बीच का बताया जा रहा है। आरोप है कि श्याम सुंदर संस्थान की ओर से दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक में 10 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट कराई गई थी। उसी दौरान राजेंद्र भारती बैंक के संचालक मंडल से जुड़े हुए थे।

आरोपों के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड में कूटरचना कर एफडी की अवधि को 3 साल से बढ़ाकर 15 साल कर दिया गया। इसके बाद सालाना 13.5 प्रतिशत की दर से ब्याज निकालकर लगभग 1.35 लाख रुपये की राशि कई वर्षों तक प्राप्त की गई। जांच में इसे वित्तीय अनियमितता और धोखाधड़ी माना गया।

जांच और कानूनी प्रक्रिया

सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2011 में तत्कालीन बैंक अध्यक्ष ने इस मामले को उजागर किया था। इसके बाद सहकारिता विभाग ने जांच कराई, जिसमें ऑडिट आपत्तियां सामने आईं।

2015 में तत्कालीन कलेक्टर की पहल पर आपराधिक मामला दर्ज हुआ और IPC की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया। मामला बाद में एमपी-एमएलए कोर्ट में स्थानांतरित किया गया। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने अब अपना फैसला सुनाया है।

अदालत का निर्णय और प्रभाव

अदालत ने धोखाधड़ी (धारा 420), जालसाजी (धारा 467, 468, 471) और आपराधिक साजिश (धारा 120B) में दोष सिद्ध किया है। राजेंद्र भारती को तीन साल की सजा सुनाई गई है, हालांकि उन्हें जमानत भी मिल गई है ताकि वे उच्च न्यायालय में अपील कर सकें।

अधिकारियों के अनुसार, यदि सजा पर स्टे नहीं मिलता है, तो उनकी विधायकी स्वतः समाप्त हो सकती है। इससे संबंधित क्षेत्र में उपचुनाव की संभावना भी बन सकती है।

आगे क्या होगा

कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती अब इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में हैं। उनके परिवार के अनुसार, वे कानूनी विकल्पों का उपयोग करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण रहेगा।

यदि उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिलती है, तो उनकी विधानसभा सीट रिक्त घोषित की जा सकती है और चुनाव आयोग उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।

कुल मिलाकर यह मामला न केवल कानूनी दृष्टि से बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद अहम हो गया है, जहां कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की विधायकी पर अब बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

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02 Apr 2026 By Rohit.P

कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 3 साल की सजा, एमपी-एमएलए कोर्ट से जमानत मिली, एफडी हेराफेरी केस में दोषी

दतिया (म.प्र.)

कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 27 साल पुराने एफडी हेराफेरी मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट ने दोषी करार दिया है। अदालत ने उन्हें तीन साल की सजा सुनाई और जमानत भी प्रदान की। यह मामला दतिया जिले के सहकारी ग्रामीण विकास बैंक से जुड़ा है। फैसले के बाद उनकी विधायकी पर संकट गहरा गया है।

अदालत ने उन्हें धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश की धाराओं में दोषी माना है। सह-आरोपी बैंक लिपिक रघुवीर प्रजापति को भी समान रूप से दोषी ठहराया गया है। कोर्ट ने अलग-अलग धाराओं में 3-3 साल और 2 साल की सजा सुनाई है। कानूनी प्रावधानों के अनुसार, दो साल या उससे अधिक की सजा पर विधायकी स्वतः समाप्त हो सकती है। हालांकि, कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को हाईकोर्ट में अपील का अवसर मिलेगा। इस फैसले के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

एफडी हेराफेरी मामला

यह पूरा मामला वर्ष 1998 से 2001 के बीच का बताया जा रहा है। आरोप है कि श्याम सुंदर संस्थान की ओर से दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक में 10 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट कराई गई थी। उसी दौरान राजेंद्र भारती बैंक के संचालक मंडल से जुड़े हुए थे।

आरोपों के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड में कूटरचना कर एफडी की अवधि को 3 साल से बढ़ाकर 15 साल कर दिया गया। इसके बाद सालाना 13.5 प्रतिशत की दर से ब्याज निकालकर लगभग 1.35 लाख रुपये की राशि कई वर्षों तक प्राप्त की गई। जांच में इसे वित्तीय अनियमितता और धोखाधड़ी माना गया।

जांच और कानूनी प्रक्रिया

सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2011 में तत्कालीन बैंक अध्यक्ष ने इस मामले को उजागर किया था। इसके बाद सहकारिता विभाग ने जांच कराई, जिसमें ऑडिट आपत्तियां सामने आईं।

2015 में तत्कालीन कलेक्टर की पहल पर आपराधिक मामला दर्ज हुआ और IPC की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया। मामला बाद में एमपी-एमएलए कोर्ट में स्थानांतरित किया गया। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने अब अपना फैसला सुनाया है।

अदालत का निर्णय और प्रभाव

अदालत ने धोखाधड़ी (धारा 420), जालसाजी (धारा 467, 468, 471) और आपराधिक साजिश (धारा 120B) में दोष सिद्ध किया है। राजेंद्र भारती को तीन साल की सजा सुनाई गई है, हालांकि उन्हें जमानत भी मिल गई है ताकि वे उच्च न्यायालय में अपील कर सकें।

अधिकारियों के अनुसार, यदि सजा पर स्टे नहीं मिलता है, तो उनकी विधायकी स्वतः समाप्त हो सकती है। इससे संबंधित क्षेत्र में उपचुनाव की संभावना भी बन सकती है।

आगे क्या होगा

कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती अब इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में हैं। उनके परिवार के अनुसार, वे कानूनी विकल्पों का उपयोग करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण रहेगा।

यदि उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिलती है, तो उनकी विधानसभा सीट रिक्त घोषित की जा सकती है और चुनाव आयोग उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।

कुल मिलाकर यह मामला न केवल कानूनी दृष्टि से बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद अहम हो गया है, जहां कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की विधायकी पर अब बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/congress-mla-rajendra-bharti-sentenced-to-3-years-gets-bail/article-49954

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