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अखिला सेवक समाज काउंसिल ने ‘निष्काम सेवा’ पर आधारित राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत की
डिजिटल डेस्क
संस्थापक डॉ. भार्गव मल्लप्पा ने भारतीय मूल्यों और जमीनी प्रभाव पर आधारित दृष्टि को रखा सामने
देश में सामाजिक सेवा के क्षेत्र में एक नई पहल के रूप में अखिला सेवक समाज काउंसिल (ASSC) ने अपने औपचारिक शुभारंभ की घोषणा की है। यह राष्ट्रीय स्तर का संगठन ‘निष्काम सेवा’ यानी निस्वार्थ सेवा के सिद्धांत पर कार्य करते हुए सामाजिक न्याय, सामुदायिक सशक्तिकरण और समावेशी विकास को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
“सेवा परमोधर्मः” के मूल विचार से प्रेरित यह काउंसिल एक सशक्त मंच तैयार करने का लक्ष्य रखती है, जो जमीनी स्तर पर काम करने वाले समुदायों को सरकारी योजनाओं और सामाजिक संगठनों से जोड़ सके। अपने प्रारंभिक चरण में संगठन ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में दीर्घकालिक और प्रभावी पहलों की मजबूत नींव रखने पर कार्य कर रहा है।
दृष्टि और कार्यप्रणाली
“वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को केंद्र में रखते हुए, ASSC स्वयं को एक सेतु के रूप में स्थापित करना चाहता है—जो लोगों तक योजनाओं की जानकारी, उनकी पहुंच और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कर सके। संगठन का कार्य पांच प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है: सामाजिक न्याय, सामुदायिक सशक्तिकरण, कौशल विकास, स्वास्थ्य एवं कल्याण, और भारतीय संस्कृति का संरक्षण।
ASSC एक सहयोगात्मक मॉडल अपनाने की दिशा में काम कर रहा है, जिसमें समुदाय की भागीदारी, संस्थागत साझेदारी और नीतिगत समन्वय के माध्यम से स्थायी और सार्थक बदलाव सुनिश्चित किया जा सके।
इस अवसर पर ASSC के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. भार्गव मल्लप्पा ने कहा, “अखिला सेवक समाज काउंसिल की परिकल्पना इस सोच से प्रेरित है कि सेवा केवल भावना तक सीमित न रहे, बल्कि वह ठोस और मापनीय परिणामों में भी दिखाई दे। ‘निष्काम सेवा’ के माध्यम से हम ऐसा मंच तैयार करना चाहते हैं, जहां समुदाय सशक्त बने और शासन की योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचें।”
उन्होंने आगे कहा, “हमारा ध्यान ऐसे प्रभावी तंत्र विकसित करने पर है, जिससे योजनाओं का क्रियान्वयन जवाबदेही और निरंतरता के साथ हो सके। फिलहाल हम समन्वय तंत्र को मजबूत कर रहे हैं, ताकि हमारे प्रयास समुदाय की जरूरतों और संस्थागत ढांचे दोनों के अनुरूप रहें।”
सतत विकास और साझेदारी पर जोर देते हुए डॉ. मल्लप्पा ने कहा, “जमीनी स्तर पर स्थायी विकास के लिए वित्तीय अनुशासन और स्थानीय सहयोग दोनों आवश्यक हैं। हम पारदर्शी प्रक्रियाओं और मजबूत साझेदारियों के निर्माण की दिशा में काम कर रहे हैं, ताकि स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक प्रभाव सुनिश्चित किया जा सके।”
ASSC ने सामुदायिक पहुंच, जागरूकता अभियानों, कौशल विकास कार्यक्रमों और जनकल्याणकारी योजनाओं के समर्थन जैसे क्षेत्रों में अपनी प्रारंभिक गतिविधियां शुरू कर दी हैं। वर्तमान में संगठन साझेदारियों को मजबूत करने, जमीनी नेटवर्क को विस्तार देने और ऐसे कार्यक्रम मॉडल विकसित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिन्हें आने वाले वर्षों में बड़े स्तर पर लागू किया जा सके।
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अखिला सेवक समाज काउंसिल ने ‘निष्काम सेवा’ पर आधारित राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत की
डिजिटल डेस्क
देश में सामाजिक सेवा के क्षेत्र में एक नई पहल के रूप में अखिला सेवक समाज काउंसिल (ASSC) ने अपने औपचारिक शुभारंभ की घोषणा की है। यह राष्ट्रीय स्तर का संगठन ‘निष्काम सेवा’ यानी निस्वार्थ सेवा के सिद्धांत पर कार्य करते हुए सामाजिक न्याय, सामुदायिक सशक्तिकरण और समावेशी विकास को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
“सेवा परमोधर्मः” के मूल विचार से प्रेरित यह काउंसिल एक सशक्त मंच तैयार करने का लक्ष्य रखती है, जो जमीनी स्तर पर काम करने वाले समुदायों को सरकारी योजनाओं और सामाजिक संगठनों से जोड़ सके। अपने प्रारंभिक चरण में संगठन ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में दीर्घकालिक और प्रभावी पहलों की मजबूत नींव रखने पर कार्य कर रहा है।
दृष्टि और कार्यप्रणाली
“वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को केंद्र में रखते हुए, ASSC स्वयं को एक सेतु के रूप में स्थापित करना चाहता है—जो लोगों तक योजनाओं की जानकारी, उनकी पहुंच और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कर सके। संगठन का कार्य पांच प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है: सामाजिक न्याय, सामुदायिक सशक्तिकरण, कौशल विकास, स्वास्थ्य एवं कल्याण, और भारतीय संस्कृति का संरक्षण।
ASSC एक सहयोगात्मक मॉडल अपनाने की दिशा में काम कर रहा है, जिसमें समुदाय की भागीदारी, संस्थागत साझेदारी और नीतिगत समन्वय के माध्यम से स्थायी और सार्थक बदलाव सुनिश्चित किया जा सके।
इस अवसर पर ASSC के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. भार्गव मल्लप्पा ने कहा, “अखिला सेवक समाज काउंसिल की परिकल्पना इस सोच से प्रेरित है कि सेवा केवल भावना तक सीमित न रहे, बल्कि वह ठोस और मापनीय परिणामों में भी दिखाई दे। ‘निष्काम सेवा’ के माध्यम से हम ऐसा मंच तैयार करना चाहते हैं, जहां समुदाय सशक्त बने और शासन की योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचें।”
उन्होंने आगे कहा, “हमारा ध्यान ऐसे प्रभावी तंत्र विकसित करने पर है, जिससे योजनाओं का क्रियान्वयन जवाबदेही और निरंतरता के साथ हो सके। फिलहाल हम समन्वय तंत्र को मजबूत कर रहे हैं, ताकि हमारे प्रयास समुदाय की जरूरतों और संस्थागत ढांचे दोनों के अनुरूप रहें।”
सतत विकास और साझेदारी पर जोर देते हुए डॉ. मल्लप्पा ने कहा, “जमीनी स्तर पर स्थायी विकास के लिए वित्तीय अनुशासन और स्थानीय सहयोग दोनों आवश्यक हैं। हम पारदर्शी प्रक्रियाओं और मजबूत साझेदारियों के निर्माण की दिशा में काम कर रहे हैं, ताकि स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक प्रभाव सुनिश्चित किया जा सके।”
ASSC ने सामुदायिक पहुंच, जागरूकता अभियानों, कौशल विकास कार्यक्रमों और जनकल्याणकारी योजनाओं के समर्थन जैसे क्षेत्रों में अपनी प्रारंभिक गतिविधियां शुरू कर दी हैं। वर्तमान में संगठन साझेदारियों को मजबूत करने, जमीनी नेटवर्क को विस्तार देने और ऐसे कार्यक्रम मॉडल विकसित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिन्हें आने वाले वर्षों में बड़े स्तर पर लागू किया जा सके।
