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रायपुर जल संकट: 60% वार्ड प्रभावित, पानी की समस्या गहराई
रायपुर (छ.ग.)
शिवनगर, रायपुरा और डंगनिया समेत कई इलाकों में पानी की किल्लत, गर्मी के बीच सप्लाई व्यवस्था चरमराई
भीषण गर्मी के बीच छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में जल संकट गंभीर होता जा रहा है। शहर के अधिकांश हिस्सों में पानी की किल्लत से लोग जूझ रहे हैं। हालात यह हैं कि 70 में से करीब 60 प्रतिशत वार्डों में जलापूर्ति प्रभावित है, जिससे दैनिक जीवन पर सीधा असर पड़ रहा है।
शिवनगर, रायपुरा और डंगनिया जैसे प्रमुख इलाकों में स्थिति ज्यादा खराब बताई जा रही है। शिवनगर में बोरवेल जल जाने से लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है और कई परिवार पहले से पानी स्टोर कर रहे हैं। वहीं रायपुरा में पाइपलाइन लीकेज के कारण नियमित सप्लाई बाधित हो गई है, जिससे कई घरों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा। डंगनिया में सप्लाई तो हो रही है, लेकिन कम प्रेशर के कारण लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा।
इससे पहले भी शहर के कई अन्य इलाकों—जैसे पुरानी बस्ती, चंगोराभाठा, गुढ़ियारी और भनपुरी—में पानी की समस्या सामने आ चुकी है। नगर निगम के पास इन क्षेत्रों से पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित इलाकों में प्राथमिकता के आधार पर सप्लाई बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर राहत अभी सीमित है।
जल संकट की एक बड़ी वजह भूजल स्तर का तेजी से गिरना और बोरवेल का फेल होना माना जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार शहर में बड़ी संख्या में बोरवेल खराब हो चुके हैं, जिससे वैकल्पिक स्रोतों पर दबाव बढ़ गया है। इसके अलावा पाइपलाइन नेटवर्क में लीकेज और रखरखाव की कमी भी समस्या को बढ़ा रही है।
रेन वॉटर हार्वेस्टिंग का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं होना भी संकट को गहरा रहा है। नियमों के बावजूद बड़ी संख्या में मकानों में यह सिस्टम नहीं लगाया गया है। हर साल लाखों लीटर बारिश का पानी बिना उपयोग के बह जाता है, जबकि इसका संरक्षण किया जाए तो जल संकट काफी हद तक कम हो सकता है।
नगर निगम ने इस दिशा में योजनाएं तो बनाई थीं, लेकिन वे अब तक धरातल पर पूरी तरह लागू नहीं हो सकी हैं। कई मामलों में फंड जमा होने के बावजूद काम शुरू नहीं हुआ, जिससे लोगों में नाराजगी भी है।
गर्मी बढ़ने के साथ आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में जल प्रबंधन, बुनियादी ढांचे के सुधार और जनभागीदारी को लेकर ठोस कदम उठाना जरूरी माना जा रहा है, ताकि शहर को लंबे समय तक पानी की समस्या से राहत मिल सके।
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रायपुर जल संकट: 60% वार्ड प्रभावित, पानी की समस्या गहराई
रायपुर (छ.ग.)
भीषण गर्मी के बीच छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में जल संकट गंभीर होता जा रहा है। शहर के अधिकांश हिस्सों में पानी की किल्लत से लोग जूझ रहे हैं। हालात यह हैं कि 70 में से करीब 60 प्रतिशत वार्डों में जलापूर्ति प्रभावित है, जिससे दैनिक जीवन पर सीधा असर पड़ रहा है।
शिवनगर, रायपुरा और डंगनिया जैसे प्रमुख इलाकों में स्थिति ज्यादा खराब बताई जा रही है। शिवनगर में बोरवेल जल जाने से लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है और कई परिवार पहले से पानी स्टोर कर रहे हैं। वहीं रायपुरा में पाइपलाइन लीकेज के कारण नियमित सप्लाई बाधित हो गई है, जिससे कई घरों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा। डंगनिया में सप्लाई तो हो रही है, लेकिन कम प्रेशर के कारण लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा।
इससे पहले भी शहर के कई अन्य इलाकों—जैसे पुरानी बस्ती, चंगोराभाठा, गुढ़ियारी और भनपुरी—में पानी की समस्या सामने आ चुकी है। नगर निगम के पास इन क्षेत्रों से पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित इलाकों में प्राथमिकता के आधार पर सप्लाई बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर राहत अभी सीमित है।
जल संकट की एक बड़ी वजह भूजल स्तर का तेजी से गिरना और बोरवेल का फेल होना माना जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार शहर में बड़ी संख्या में बोरवेल खराब हो चुके हैं, जिससे वैकल्पिक स्रोतों पर दबाव बढ़ गया है। इसके अलावा पाइपलाइन नेटवर्क में लीकेज और रखरखाव की कमी भी समस्या को बढ़ा रही है।
रेन वॉटर हार्वेस्टिंग का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं होना भी संकट को गहरा रहा है। नियमों के बावजूद बड़ी संख्या में मकानों में यह सिस्टम नहीं लगाया गया है। हर साल लाखों लीटर बारिश का पानी बिना उपयोग के बह जाता है, जबकि इसका संरक्षण किया जाए तो जल संकट काफी हद तक कम हो सकता है।
नगर निगम ने इस दिशा में योजनाएं तो बनाई थीं, लेकिन वे अब तक धरातल पर पूरी तरह लागू नहीं हो सकी हैं। कई मामलों में फंड जमा होने के बावजूद काम शुरू नहीं हुआ, जिससे लोगों में नाराजगी भी है।
गर्मी बढ़ने के साथ आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में जल प्रबंधन, बुनियादी ढांचे के सुधार और जनभागीदारी को लेकर ठोस कदम उठाना जरूरी माना जा रहा है, ताकि शहर को लंबे समय तक पानी की समस्या से राहत मिल सके।
