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ईरान युद्ध के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका ने बनाया गुप्त तेल मार्ग
Sandeep Patel
ईरान तनाव के बीच अमेरिका कथित तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों की सुरक्षा कर रहा है, जिससे खाड़ी से लाखों बैरल तेल की आवाजाही जारी है।
ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की आवाजाही बनाए रखने के लिए एक गुप्त सैन्य-सहायता प्राप्त समुद्री गलियारा तैयार किया है। Axios की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारी ओमान के तट के पास दक्षिणी मार्ग से गुजरने वाले वाणिज्यिक टैंकरों की आवाजाही में समन्वय और सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस मार्ग से हर रात करीब 15 से 20 तेल टैंकर जलडमरूमध्य के आर-पार जा रहे हैं। इनमें खाड़ी देशों से कच्चा तेल लेकर निकलने वाले टैंकरों के साथ खाली जहाज भी शामिल हैं, जो नए माल के लिए खाड़ी में प्रवेश कर रहे हैं।
इस अभियान ने संघर्ष के कारण बाधित तेल आपूर्ति को आंशिक रूप से बहाल करने में मदद की है। हालांकि, समुद्री यातायात अभी भी सामान्य स्तर से काफी नीचे है और ईरानी ड्रोन, तेज हमला करने वाली नौकाओं तथा पोत-रोधी हथियारों का खतरा बना हुआ है।
दक्षिणी मार्ग से तेल जारी
इस मार्ग का इस्तेमाल सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर और बहरीन जैसे प्रमुख खाड़ी तेल उत्पादक देशों से आने वाले टैंकर कर रहे हैं।
ओमान के तट के करीब स्थित दक्षिणी समुद्री मार्ग अब अमेरिकी समन्वय वाले वाणिज्यिक जहाजों के लिए महत्वपूर्ण रास्ता बन गया है। Axios से बात करने वाले अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया कि अमेरिकी सेना करीब दो महीने से इस दक्षिणी लेन पर प्रभावी नियंत्रण बनाए हुए है।
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि अमेरिका ने पूरे होर्मुज जलडमरूमध्य पर औपचारिक नियंत्रण स्थापित कर लिया है। यह दावा मुख्य रूप से अमेरिकी सैन्य अधिकारियों द्वारा मार्ग की सुरक्षा और निगरानी में निभाई जा रही भूमिका से जुड़ा है।
रोजाना लाखों बैरल तेल
Axios के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों का अनुमान है कि मौजूदा समय में होर्मुज जलडमरूमध्य से रोजाना करीब 1 करोड़ बैरल तेल गुजर रहा है। यह संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर का लगभग आधा है।
हालांकि, यह आंकड़ा अमेरिकी अधिकारियों का अनुमान है और इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इससे पहले की रिपोर्टों में दक्षिणी मार्ग से करीब 80 लाख बैरल प्रतिदिन तेल गुजरने का अनुमान लगाया गया था।
स्वतंत्र जहाजरानी आंकड़े बताते हैं कि जलडमरूमध्य में कुल वाणिज्यिक यातायात अभी भी सामान्य स्तर से काफी कम है। सुरक्षा कारणों से कुछ जहाजों द्वारा अपना स्वचालित पहचान प्रणाली संकेत बंद करने के कारण वास्तविक आवाजाही को ट्रैक करना भी मुश्किल हो रहा है।
ईरानी निगरानी तंत्र पर हमला
रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिणी मार्ग को सक्रिय बनाए रखने में अमेरिकी सैन्य अभियान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अमेरिकी हमलों ने कथित तौर पर होर्मुज के आसपास ईरान की रडार और समुद्री निगरानी क्षमताओं को नुकसान पहुंचाया है।
Axios के मुताबिक, इससे ईरानी बलों के लिए दक्षिणी मार्ग से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की निगरानी करना कठिन हुआ है। अमेरिकी विमान भी संभावित खतरों पर नजर रखने और टैंकरों को हवाई सुरक्षा देने में भूमिका निभा रहे हैं।
हालांकि, ईरान के पास अभी भी ड्रोन, तेज हमला करने वाली नौकाएं और पोत-रोधी मिसाइलें मौजूद हैं। इसलिए इस समुद्री गलियारे में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा पूरी तरह जोखिम-मुक्त नहीं हुई है।
ऊर्जा का बड़ा समुद्री केंद्र
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के ऊर्जा बाजारों के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है।
इस मार्ग में लंबे समय तक व्यवधान आने से कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसके साथ ही जहाजों के बीमा, माल ढुलाई और ईंधन की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है।
मौजूदा संघर्ष के कारण जहाजों की आवाजाही में आई गिरावट ने पहले ही वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है।
ईरान-अमेरिका तनाव जारी
यह गुप्त समुद्री गलियारा अमेरिका और ईरान के बीच जारी व्यापक सैन्य और कूटनीतिक टकराव के बीच सामने आया है।
ईरान ने जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही पर अपना दबाव बनाए रखा है, जबकि अमेरिका ने वाणिज्यिक जहाजों के लिए मार्ग खुला रखने पर जोर दिया है।
ओमान भी इस संकट में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। देश ने अतीत में अमेरिका और ईरान के बीच संवाद स्थापित करने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई है।
यदि तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो खाड़ी के तेल उत्पादकों, जहाजरानी कंपनियों और तेल आयात करने वाले देशों पर दबाव बढ़ सकता है।
तेल बाजारों पर नजर
दक्षिणी मार्ग से सीमित संख्या में टैंकरों की आवाजाही ने खाड़ी से तेल की पूरी तरह आपूर्ति रुकने के जोखिम को कुछ कम किया है। लेकिन इससे संकट समाप्त नहीं हुआ है।
किसी भी टैंकर पर हमला होने की स्थिति में बीमा और माल ढुलाई लागत बढ़ सकती है। इससे जहाजरानी कंपनियां होर्मुज से होकर गुजरने के फैसले पर दोबारा विचार कर सकती हैं।
गुरुवार को ब्रेंट कच्चा तेल 94 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा था। बाजार ईरान-अमेरिका तनाव, होर्मुज में जहाजों की आवाजाही और कूटनीतिक प्रयासों की स्थिति पर नजर रख रहा है।
भारत के लिए बढ़ी चिंता
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए होर्मुज जलडमरूमध्य में लंबे समय तक व्यवधान रहने का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से रिफाइनरियों की लागत, माल ढुलाई और बीमा खर्च बढ़ सकते हैं। इससे महंगाई और चालू खाते पर भी दबाव पड़ सकता है।
फिलहाल अमेरिकी सुरक्षा वाले दक्षिणी मार्ग ने खाड़ी से तेल की कुछ आपूर्ति जारी रखने में मदद की है। लेकिन इससे होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य समुद्री यातायात बहाल नहीं हुआ है।
आने वाले दिनों में स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कितना कम होता है और क्या वाणिज्यिक जहाज बिना सैन्य सुरक्षा के सामान्य रूप से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरना शुरू कर पाते हैं।
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