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क्या शहरों के दिल से कारें हटाने का वक्त आ गया है? पैदल रास्तों और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के बीच नई बहस
Priyanka Mathur
दुनिया के कई शहर डाउनटाउन इलाकों में निजी वाहनों की एंट्री सीमित या बंद करने की दिशा में बढ़ रहे हैं
दुनिया के कई बड़े शहर अपने सबसे व्यस्त केंद्रीय इलाकों को निजी वाहनों से मुक्त करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। इसके पीछे बढ़ता ट्रैफिक, सड़क हादसे, वायु प्रदूषण और सार्वजनिक जगहों पर पैदल यात्रियों के लिए कम होती जगह प्रमुख वजहें हैं। यूरोपीय संघ भी पैदल क्षेत्र, सीमित-ट्रैफिक जोन, कम-उत्सर्जन क्षेत्र और कंजेशन चार्ज जैसी व्यवस्थाओं को शहरी यातायात और प्रदूषण नियंत्रित करने के उपायों के रूप में सूचीबद्ध करता है।
लंदन का ऑक्सफोर्ड स्ट्रीट इसका ताजा उदाहरण है। 2026 में शहर ने ऑक्सफोर्ड स्ट्रीट के ग्रेट पोर्टलैंड स्ट्रीट से ऑर्चर्ड स्ट्रीट तक के हिस्से को ट्रैफिक-फ्री बनाने की योजना आगे बढ़ाई। प्रस्ताव के तहत निजी वाहन, बस, टैक्सी और निजी किराये के वाहनों को इस हिस्से से हटाया जाना है, जबकि आपातकालीन सेवाओं की पहुंच बनी रहेगी और कारोबारियों के लिए रात में सामान पहुंचाने की व्यवस्था रखी जाएगी।
लंदन प्रशासन का तर्क है कि निजी मोटर ट्रैफिक कम होने से पैदल चलने वालों के लिए सड़क अधिक सुरक्षित और आरामदायक हो सकती है। ऑक्सफोर्ड स्ट्रीट की योजना से जुड़े आकलन में सड़क-खतरे में कमी और पैदल यात्रियों के अनुभव में सुधार जैसे संभावित फायदे बताए गए हैं। हालांकि, आसपास की कुछ सड़कों पर ट्रैफिक बढ़ने की संभावना भी मॉडलिंग में सामने आई है।
वायु गुणवत्ता का सवाल भी इस बहस के केंद्र में है। लंदन के आकलन के मुताबिक प्रस्तावित बदलाव से अध्ययन क्षेत्र में कुल CO₂ उत्सर्जन में लगभग 431 टन सालाना की कमी का अनुमान लगाया गया है, हालांकि इस कमी का बड़ा हिस्सा वाहनों और फ्लीट में हो रहे व्यापक सुधारों से जुड़ा है। वहीं कई स्थानों पर NO₂ में बदलाव बेहद मामूली रहने का अनुमान है।
लेकिन कार-फ्री मॉडल को लागू करना सिर्फ वाहनों को सड़क से हटाने का मामला नहीं है। सबसे अहम सवाल यह है कि जिन लोगों के लिए लंबी दूरी पैदल चलना मुश्किल है, वे शहर के केंद्र तक कैसे पहुंचेंगे। लंदन की समानता संबंधी समीक्षा में दिव्यांग और बुजुर्ग लोगों के लिए बस या टैक्सी की पहुंच कम होने तथा ज्यादा पैदल दूरी जैसी संभावित दिक्कतों को भी चिन्हित किया गया है।
बेल्जियम का गेंट शहर एक अलग मॉडल पेश करता है। वहां 2017 से शहर के अंदरूनी हिस्से में बड़े पैमाने पर कार-मुक्त क्षेत्र लागू है। निजी मोटर वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध है, जबकि परमिट वाले वाहनों, सार्वजनिक परिवहन, टैक्सी, स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन सेवाओं के लिए विशेष प्रावधान हैं। शहर ने पार्क-एंड-राइड व्यवस्था भी विकसित की है, ताकि लोग बाहरी इलाकों में वाहन छोड़कर सार्वजनिक परिवहन से केंद्र तक पहुंच सकें।
यही मॉडल इस बहस को सिर्फ “कार बनाम पैदल” का सवाल नहीं रहने देता। यदि शहर निजी वाहनों पर रोक लगाता है, तो उसके साथ तेज और भरोसेमंद बस-सेवा, मेट्रो, सुरक्षित पैदल रास्ते, सुलभ फुटपाथ, व्हीलचेयर-अनुकूल परिवहन, टैक्सी परमिट और पर्याप्त पार्किंग-हब जैसी सुविधाएं भी जरूरी हो जाती हैं। वरना कार पर निर्भर लोगों के लिए शहर का केंद्र ज्यादा मुश्किल हो सकता है।
कार-फ्री शहरों के समर्थक कहते हैं कि सड़क की जगह का इस्तेमाल केवल वाहनों के लिए नहीं होना चाहिए। कम ट्रैफिक वाले इलाकों में दुकानों, रेस्तरां, पैदल यात्रियों और सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए ज्यादा जगह बनाई जा सकती है। लंदन में 2025 के एक ट्रैफिक-फ्री ऑक्सफोर्ड स्ट्रीट कार्यक्रम के दौरान फुटफॉल पिछले सप्ताह की तुलना में 45% ज्यादा दर्ज हुआ था और सर्वे किए गए करीब 70% स्टोर्स ने सामान्य रविवार के बराबर या उससे अधिक बिक्री बताई थी।
दूसरी तरफ, आलोचना यह है कि शहर के केंद्र में कारों को पूरी तरह रोकने से समस्या खत्म होने के बजाय ट्रैफिक आसपास की सड़कों पर जा सकता है। काम के लिए लंबी दूरी तय करने वाले, परिवारों के साथ आने वाले, सामान पहुंचाने वाले और सार्वजनिक परिवहन से कमजोर रूप से जुड़े बाहरी इलाकों के लोगों के लिए निजी वाहन अभी भी जरूरी हो सकते हैं। इसलिए कई शहर पूरी तरह प्रतिबंध के बजाय परमिट, समय-आधारित प्रवेश, कम-उत्सर्जन क्षेत्र और सीमित ट्रैफिक जैसे विकल्प भी अपना रहे हैं।
आने वाले समय में असली चुनौती यह तय करना होगी कि शहरों के केंद्र किसके लिए डिजाइन किए जाएं—तेजी से गुजरने वाली कारों के लिए या वहां रहने, काम करने और घूमने वाले लोगों के लिए। लेकिन किसी भी कार-फ्री नीति की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रतिबंध लगाने के साथ वैकल्पिक परिवहन कितना सुलभ, सुरक्षित और किफायती बनाया जाता है।
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