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भारत पहुंचे कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, निवेश और ऊर्जा सहयोग पर जोर
नेशनल न्यूज
चार दिन के दौरे में व्यापार, तकनीक और सुरक्षा साझेदारी पर उच्चस्तरीय वार्ता
नई दिल्ली। मार्क कार्नी आड चार दिन के आधिकारिक दौरे पर भारत पहुंचे, जहां उनका मुख्य फोकस निवेश, व्यापार और ऊर्जा सहयोग को गति देना है। प्रधानमंत्री के रूप में उनका यह पहला भारत दौरा है। कार्यक्रम के अनुसार, 2 मार्च को नई दिल्ली में वे नरेंद्र मोदी से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, जिसमें व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) को आगे बढ़ाने, रक्षा सहयोग और आपूर्ति शृंखला मजबूती पर चर्चा होगी।
दौरे के दौरान कार्नी मुंबई में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से भी मिलेंगे। इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लीन एनर्जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में निवेश बढ़ाने के प्रस्तावों पर बातचीत प्रस्तावित है। दोनों देशों का लक्ष्य द्विपक्षीय व्यापार को अगले वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ाना है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में भारत-कनाडा व्यापार 21 अरब डॉलर से अधिक है और 600 से ज्यादा कनाडाई कंपनियां भारत में सक्रिय हैं।
यात्रा से पहले कनाडाई अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कनाडा में अपराधों या लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप के आरोपों का भारत से प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने संकेत दिया कि यदि ऐसे गंभीर आरोप पुष्ट होते, तो प्रधानमंत्री का यह दौरा संभव नहीं होता। इसे दोनों देशों के बीच रिश्तों को सामान्य करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
ऊर्जा सहयोग इस दौरे का केंद्रीय मुद्दा है। यूरेनियम आपूर्ति, तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में साझेदारी पर ठोस प्रगति की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि कनाडा के प्राकृतिक संसाधन और भारत की बढ़ती ऊर्जा मांग, दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए परस्पर लाभकारी ढांचा तैयार कर सकते हैं। सरकारी अपडेट के रूप में ऊर्जा संक्रमण और महत्वपूर्ण खनिजों पर सहयोग की संभावनाएं भी एजेंडे में हैं।
पिछले वर्ष दोनों देशों के संबंधों में तनाव के बाद यह दौरा कूटनीतिक संवाद को पुनर्स्थापित करने की दिशा में देखा जा रहा है। उच्चायोग स्तर पर संपर्क बढ़ाने और सुरक्षा सहयोग के लिए समन्वय तंत्र मजबूत करने पर भी सहमति बनने की संभावना है। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समाचार परिदृश्य में इस यात्रा को आर्थिक साझेदारी के नए चरण की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका पर आर्थिक निर्भरता कम करने और एशिया में व्यापारिक अवसरों के विस्तार की कनाडा की रणनीति में भारत प्रमुख साझेदार के रूप में उभरा है। वहीं भारत के लिए यह दौरा पूंजी निवेश, तकनीकी सहयोग और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को गति देने का अवसर प्रदान करता है।
सरकारी सूत्रों ने संकेत दिया है कि वार्ताओं के बाद संयुक्त बयान जारी किया जाएगा, जिसमें व्यापार, ऊर्जा और तकनीकी सहयोग के रोडमैप का उल्लेख होगा।
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