रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय की कंप्यूटर लैब बंद, फिर भी छात्रों का प्रैक्टिकल; मामला विधानसभा तक पहुँचा

जबलपुर(म.प्र.)

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डिजिटल फॉरेंसिक परीक्षा बिना सिस्टम सम्पन्न कराने का आरोप; छात्रों ने सुविधाओं की कमी पर उठाए सवाल, खरीद प्रक्रिया जारी होने का दावा

मध्यप्रदेश के जबलपुर स्थित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड एप्लिकेशन (UICSA) में गुरुवार को आयोजित डिजिटल फॉरेंसिक तृतीय सेमेस्टर की परीक्षा को लेकर विवाद खड़ा हो गया। छात्रों का आरोप है कि आवश्यक कंप्यूटर सिस्टम बंद रहने के बावजूद उनका प्रैक्टिकल पूरा घोषित कर दिया गया। घटना के बाद छात्रों ने संस्थान की बुनियादी सुविधाओं और शैक्षणिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

छात्रों के अनुसार एक घंटे की लिखित परीक्षा के बाद जब उन्होंने प्रैक्टिकल के लिए कंप्यूटर मांगे, तो उन्हें बताया गया कि प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अंक परिणाम में जोड़ दिए जाएंगे। इससे नाराज छात्र कक्षा से बाहर निकल आए और प्रशासन पर औपचारिकता निभाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि तीन सेमेस्टर बीतने के बावजूद उन्हें लैब में नियमित रूप से कार्य करने का अवसर नहीं मिला।

यूआईसीएसए विभाग में बीसीए और एमसीए जैसे तकनीकी पाठ्यक्रम संचालित होते हैं, जिनमें 150 से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं। छात्रों का दावा है कि लैब में लगभग 30 कंप्यूटर मौजूद होने के बावजूद अधिकांश सिस्टम लंबे समय से कार्यशील नहीं हैं। उनका कहना है कि तकनीकी शिक्षा बिना प्रयोगशाला अभ्यास के अधूरी है और इससे उनके व्यावसायिक भविष्य पर असर पड़ सकता है।

मामले को सार्वजनिक महत्व का बताते हुए छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि प्रति सेमेस्टर लगभग 17 हजार रुपए फीस ली जाती है, जबकि सुविधाओं की स्थिति न्यूनतम मानकों से भी नीचे है। उनका आरोप है कि कई बार विभागाध्यक्ष और विश्वविद्यालय प्रशासन को अवगत कराने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ।

तकनीकी शिक्षा संस्थानों के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ने पर्याप्त कंप्यूटर, लाइसेंस प्राप्त सॉफ्टवेयर और प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ की अनिवार्यता तय की है। नियामक दिशा-निर्देशों के अनुसार स्नातक स्तर पर 10 छात्रों पर एक और स्नातकोत्तर स्तर पर 4 छात्रों पर एक कंप्यूटर उपलब्ध होना चाहिए।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपों से इन्कार नहीं किया, लेकिन सुधारात्मक कदम उठाने का दावा किया है। कुलसचिव ने बताया कि पीएम उषा योजना के तहत 200 से अधिक नए कंप्यूटर खरीदे जाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और टेंडर जारी कर दिया गया है। उनका कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद छात्रों को तकनीकी संसाधनों की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

घटना की गूंज विधानसभा तक पहुंची, जहां जबलपुर पूर्व से कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने विश्वविद्यालय की लैब सुविधाओं और संसाधनों की स्थिति पर प्रश्न उठाया। उच्च शिक्षा विभाग ने संसाधन उपलब्धता और खरीद प्रक्रिया जारी होने की जानकारी दी, लेकिन छात्रों के आरोपों ने जमीनी स्थिति पर नई बहस छेड़ दी है।

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www.dainikjagranmpcg.com
27 Feb 2026 By Nitin Trivedi

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय की कंप्यूटर लैब बंद, फिर भी छात्रों का प्रैक्टिकल; मामला विधानसभा तक पहुँचा

जबलपुर(म.प्र.)

मध्यप्रदेश के जबलपुर स्थित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड एप्लिकेशन (UICSA) में गुरुवार को आयोजित डिजिटल फॉरेंसिक तृतीय सेमेस्टर की परीक्षा को लेकर विवाद खड़ा हो गया। छात्रों का आरोप है कि आवश्यक कंप्यूटर सिस्टम बंद रहने के बावजूद उनका प्रैक्टिकल पूरा घोषित कर दिया गया। घटना के बाद छात्रों ने संस्थान की बुनियादी सुविधाओं और शैक्षणिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

छात्रों के अनुसार एक घंटे की लिखित परीक्षा के बाद जब उन्होंने प्रैक्टिकल के लिए कंप्यूटर मांगे, तो उन्हें बताया गया कि प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अंक परिणाम में जोड़ दिए जाएंगे। इससे नाराज छात्र कक्षा से बाहर निकल आए और प्रशासन पर औपचारिकता निभाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि तीन सेमेस्टर बीतने के बावजूद उन्हें लैब में नियमित रूप से कार्य करने का अवसर नहीं मिला।

यूआईसीएसए विभाग में बीसीए और एमसीए जैसे तकनीकी पाठ्यक्रम संचालित होते हैं, जिनमें 150 से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं। छात्रों का दावा है कि लैब में लगभग 30 कंप्यूटर मौजूद होने के बावजूद अधिकांश सिस्टम लंबे समय से कार्यशील नहीं हैं। उनका कहना है कि तकनीकी शिक्षा बिना प्रयोगशाला अभ्यास के अधूरी है और इससे उनके व्यावसायिक भविष्य पर असर पड़ सकता है।

मामले को सार्वजनिक महत्व का बताते हुए छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि प्रति सेमेस्टर लगभग 17 हजार रुपए फीस ली जाती है, जबकि सुविधाओं की स्थिति न्यूनतम मानकों से भी नीचे है। उनका आरोप है कि कई बार विभागाध्यक्ष और विश्वविद्यालय प्रशासन को अवगत कराने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ।

तकनीकी शिक्षा संस्थानों के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ने पर्याप्त कंप्यूटर, लाइसेंस प्राप्त सॉफ्टवेयर और प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ की अनिवार्यता तय की है। नियामक दिशा-निर्देशों के अनुसार स्नातक स्तर पर 10 छात्रों पर एक और स्नातकोत्तर स्तर पर 4 छात्रों पर एक कंप्यूटर उपलब्ध होना चाहिए।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपों से इन्कार नहीं किया, लेकिन सुधारात्मक कदम उठाने का दावा किया है। कुलसचिव ने बताया कि पीएम उषा योजना के तहत 200 से अधिक नए कंप्यूटर खरीदे जाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और टेंडर जारी कर दिया गया है। उनका कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद छात्रों को तकनीकी संसाधनों की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

घटना की गूंज विधानसभा तक पहुंची, जहां जबलपुर पूर्व से कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने विश्वविद्यालय की लैब सुविधाओं और संसाधनों की स्थिति पर प्रश्न उठाया। उच्च शिक्षा विभाग ने संसाधन उपलब्धता और खरीद प्रक्रिया जारी होने की जानकारी दी, लेकिन छात्रों के आरोपों ने जमीनी स्थिति पर नई बहस छेड़ दी है।

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