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तारिक रहमान के भारत दौरे से पहले ढाका ने रखी नई शर्तें
Sandeep Patel
तारिक रहमान की भारत यात्रा पर अनिश्चितता बनी है। ढाका ने ब्रिक्स सम्मेलन से पहले बेहतर माहौल, आपसी विश्वास और द्विपक्षीय मुद्दों पर प्रगति की मांग की है।
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। ढाका ने नई दिल्ली के साथ उच्चस्तरीय बातचीत से पहले बेहतर राजनयिक माहौल बनाने पर जोर दिया है। बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने कहा है कि दोनों देशों के बीच भरोसा और आपसी सहमति का माहौल नहीं बनने तक निकट भविष्य में रहमान की भारत यात्रा की संभावना बेहद कम है।
भारत ने रहमान को द्विपक्षीय यात्रा के लिए आमंत्रित किया है। इसके अलावा उन्हें 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया गया है। बांग्लादेश फिलहाल बिम्सटेक की अध्यक्षता कर रहा है, जिसमें भारत भी सदस्य है।
रहमान की यात्रा को लेकर अनिश्चितता ऐसे समय बनी हुई है जब अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में कई संवेदनशील मुद्दे सामने आए हैं।
ढाका चाहता है बेहतर माहौल
हुमायूं कबीर ने बांग्लादेश की सरकारी समाचार एजेंसी बीएसएस को बताया कि ढाका जल्दबाजी में शिखर स्तर की बैठक नहीं करना चाहता।
उन्होंने कहा कि यदि दोनों देशों के बीच सहमति और आपसी समझ से उपयुक्त माहौल तैयार होता है, तो बांग्लादेश ब्रिक्स बैठक में शामिल होने को लेकर सकारात्मक रुख रखेगा।
कबीर ने सम्मान, संप्रभुता और महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुद्दों पर प्रगति को भी रहमान की भारत यात्रा के लिए अहम बताया।
भारत का निमंत्रण बरकरार
नई दिल्ली ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री की मेजबानी को लेकर अपना रुख स्पष्ट रखा है।
भारतीय अधिकारियों ने पहले कहा है कि भारत रहमान की यात्रा का इंतजार कर रहा है और दोनों देशों के संबंधों को रचनात्मक दिशा में आगे बढ़ाना चाहता है।
बांग्लादेश को ब्रिक्स आउटरीच सत्र में शामिल होने का निमंत्रण मिल चुका है। ढाका इस निमंत्रण पर विचार कर रहा है और अंतिम निर्णय अभी बाकी है।
बांग्लादेश ब्रिक्स का सदस्य नहीं है। उसे सम्मेलन में आमंत्रित किए जाने का संबंध उसके क्षेत्रीय महत्व और बिम्सटेक की मौजूदा अध्यक्षता से भी है।
यात्रा की तारीख तय नहीं
ढाका ने कई बार स्पष्ट किया है कि रहमान की भारत यात्रा की कोई अंतिम तारीख तय नहीं हुई है।
इससे पहले कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री ब्रिक्स सम्मेलन से पहले नई दिल्ली जा सकते हैं। हालांकि, बांग्लादेशी अधिकारियों ने ऐसी रिपोर्टों को पुष्टि नहीं माना है।
नवीनतम टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि ढाका पहले दोनों देशों के बीच व्यापक बातचीत में प्रगति चाहता है और उसके बाद रहमान की यात्रा पर अंतिम फैसला करेगा।
शेख हसीना बना बड़ा मुद्दा
भारत-बांग्लादेश संबंधों में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का मुद्दा सबसे संवेदनशील विषयों में बना हुआ है।
अगस्त 2024 में बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद हसीना बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं। इसके बाद ढाका ने उनकी वापसी की मांग की है। भारत ने कहा है कि संबंधित अनुरोधों की जांच कानूनी और राजनयिक प्रक्रियाओं के तहत की जा रही है।
बांग्लादेश ने भारत से हसीना को राजनीतिक गतिविधियों के लिए मंच मिलने पर भी आपत्ति जताई है। यह मुद्दा दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की राह में बड़ी चुनौती बना हुआ है।
व्यापार और सुरक्षा पर जोर
रहमान की संभावित भारत यात्रा दोनों देशों को शेख हसीना के मुद्दे से आगे बढ़कर व्यापक द्विपक्षीय विषयों पर चर्चा का अवसर दे सकती है।
व्यापार, सीमा प्रबंधन, संपर्क परियोजनाएं, जल संसाधन और सुरक्षा सहयोग भारत-बांग्लादेश संबंधों के प्रमुख क्षेत्र हैं।
दोनों देशों के बीच लंबी साझा सीमा और मजबूत आर्थिक संबंध हैं। इसलिए सीमा पर स्थिरता बनाए रखना और व्यापारिक संपर्क बढ़ाना दोनों सरकारों के हित में है।
ढाका का बढ़ता वैश्विक संपर्क
रहमान सरकार भारत के अलावा चीन, सऊदी अरब, तुर्किये और अन्य देशों के साथ भी संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
बांग्लादेश ने कई मौकों पर ऐसी विदेश नीति पर जोर दिया है जिसमें वह किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय कई प्रमुख शक्तियों के साथ संबंध बनाए रखे।
चीन बांग्लादेश के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार बन चुका है। वहीं ढाका खाड़ी देशों से निवेश और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर भी ध्यान दे रहा है।
यह व्यापक विदेश नीति भारत के साथ बांग्लादेश के संबंधों को फिर से संतुलित करने की कोशिश का हिस्सा हो सकती है।
ब्रिक्स पर फैसला अहम
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि तारिक रहमान 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में शामिल होंगे या नहीं।
अगर रहमान सम्मेलन में शामिल होते हैं, तो उन्हें भारतीय नेतृत्व के साथ सीधे बातचीत का अवसर मिल सकता है। इससे दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रहे मतभेदों पर चर्चा और विश्वास बहाली का रास्ता खुल सकता है।
अगर ढाका निमंत्रण स्वीकार नहीं करता है, तो यह भारत-बांग्लादेश संबंधों में मौजूद मतभेदों की गंभीरता का संकेत माना जा सकता है।
इसलिए तारिक रहमान की भारत यात्रा केवल एक राजनयिक दौरा नहीं रह गई है। यह इस बात का संकेत भी बनेगी कि नई दिल्ली और ढाका आपसी विश्वास बहाल करने और द्विपक्षीय संबंधों के लिए नया ढांचा तैयार करने में कितनी प्रगति कर पाते हैं।
तारिक रहमान के भारत दौरे से पहले ढाका ने रखी नई शर्तें
Sandeep Patel
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। ढाका ने नई दिल्ली के साथ उच्चस्तरीय बातचीत से पहले बेहतर राजनयिक माहौल बनाने पर जोर दिया है। बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने कहा है कि दोनों देशों के बीच भरोसा और आपसी सहमति का माहौल नहीं बनने तक निकट भविष्य में रहमान की भारत यात्रा की संभावना बेहद कम है।
भारत ने रहमान को द्विपक्षीय यात्रा के लिए आमंत्रित किया है। इसके अलावा उन्हें 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया गया है। बांग्लादेश फिलहाल बिम्सटेक की अध्यक्षता कर रहा है, जिसमें भारत भी सदस्य है।
रहमान की यात्रा को लेकर अनिश्चितता ऐसे समय बनी हुई है जब अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में कई संवेदनशील मुद्दे सामने आए हैं।
ढाका चाहता है बेहतर माहौल
हुमायूं कबीर ने बांग्लादेश की सरकारी समाचार एजेंसी बीएसएस को बताया कि ढाका जल्दबाजी में शिखर स्तर की बैठक नहीं करना चाहता।
उन्होंने कहा कि यदि दोनों देशों के बीच सहमति और आपसी समझ से उपयुक्त माहौल तैयार होता है, तो बांग्लादेश ब्रिक्स बैठक में शामिल होने को लेकर सकारात्मक रुख रखेगा।
कबीर ने सम्मान, संप्रभुता और महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुद्दों पर प्रगति को भी रहमान की भारत यात्रा के लिए अहम बताया।
भारत का निमंत्रण बरकरार
नई दिल्ली ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री की मेजबानी को लेकर अपना रुख स्पष्ट रखा है।
भारतीय अधिकारियों ने पहले कहा है कि भारत रहमान की यात्रा का इंतजार कर रहा है और दोनों देशों के संबंधों को रचनात्मक दिशा में आगे बढ़ाना चाहता है।
बांग्लादेश को ब्रिक्स आउटरीच सत्र में शामिल होने का निमंत्रण मिल चुका है। ढाका इस निमंत्रण पर विचार कर रहा है और अंतिम निर्णय अभी बाकी है।
बांग्लादेश ब्रिक्स का सदस्य नहीं है। उसे सम्मेलन में आमंत्रित किए जाने का संबंध उसके क्षेत्रीय महत्व और बिम्सटेक की मौजूदा अध्यक्षता से भी है।
यात्रा की तारीख तय नहीं
ढाका ने कई बार स्पष्ट किया है कि रहमान की भारत यात्रा की कोई अंतिम तारीख तय नहीं हुई है।
इससे पहले कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री ब्रिक्स सम्मेलन से पहले नई दिल्ली जा सकते हैं। हालांकि, बांग्लादेशी अधिकारियों ने ऐसी रिपोर्टों को पुष्टि नहीं माना है।
नवीनतम टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि ढाका पहले दोनों देशों के बीच व्यापक बातचीत में प्रगति चाहता है और उसके बाद रहमान की यात्रा पर अंतिम फैसला करेगा।
शेख हसीना बना बड़ा मुद्दा
भारत-बांग्लादेश संबंधों में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का मुद्दा सबसे संवेदनशील विषयों में बना हुआ है।
अगस्त 2024 में बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद हसीना बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं। इसके बाद ढाका ने उनकी वापसी की मांग की है। भारत ने कहा है कि संबंधित अनुरोधों की जांच कानूनी और राजनयिक प्रक्रियाओं के तहत की जा रही है।
बांग्लादेश ने भारत से हसीना को राजनीतिक गतिविधियों के लिए मंच मिलने पर भी आपत्ति जताई है। यह मुद्दा दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की राह में बड़ी चुनौती बना हुआ है।
व्यापार और सुरक्षा पर जोर
रहमान की संभावित भारत यात्रा दोनों देशों को शेख हसीना के मुद्दे से आगे बढ़कर व्यापक द्विपक्षीय विषयों पर चर्चा का अवसर दे सकती है।
व्यापार, सीमा प्रबंधन, संपर्क परियोजनाएं, जल संसाधन और सुरक्षा सहयोग भारत-बांग्लादेश संबंधों के प्रमुख क्षेत्र हैं।
दोनों देशों के बीच लंबी साझा सीमा और मजबूत आर्थिक संबंध हैं। इसलिए सीमा पर स्थिरता बनाए रखना और व्यापारिक संपर्क बढ़ाना दोनों सरकारों के हित में है।
ढाका का बढ़ता वैश्विक संपर्क
रहमान सरकार भारत के अलावा चीन, सऊदी अरब, तुर्किये और अन्य देशों के साथ भी संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
बांग्लादेश ने कई मौकों पर ऐसी विदेश नीति पर जोर दिया है जिसमें वह किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय कई प्रमुख शक्तियों के साथ संबंध बनाए रखे।
चीन बांग्लादेश के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार बन चुका है। वहीं ढाका खाड़ी देशों से निवेश और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर भी ध्यान दे रहा है।
यह व्यापक विदेश नीति भारत के साथ बांग्लादेश के संबंधों को फिर से संतुलित करने की कोशिश का हिस्सा हो सकती है।
ब्रिक्स पर फैसला अहम
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि तारिक रहमान 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में शामिल होंगे या नहीं।
अगर रहमान सम्मेलन में शामिल होते हैं, तो उन्हें भारतीय नेतृत्व के साथ सीधे बातचीत का अवसर मिल सकता है। इससे दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रहे मतभेदों पर चर्चा और विश्वास बहाली का रास्ता खुल सकता है।
अगर ढाका निमंत्रण स्वीकार नहीं करता है, तो यह भारत-बांग्लादेश संबंधों में मौजूद मतभेदों की गंभीरता का संकेत माना जा सकता है।
इसलिए तारिक रहमान की भारत यात्रा केवल एक राजनयिक दौरा नहीं रह गई है। यह इस बात का संकेत भी बनेगी कि नई दिल्ली और ढाका आपसी विश्वास बहाल करने और द्विपक्षीय संबंधों के लिए नया ढांचा तैयार करने में कितनी प्रगति कर पाते हैं।
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