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भारत ने UNSC सुधार पर दिया जोर, आतंकी सूची में पारदर्शिता की मांग
Sandeep Patel
भारत ने UNSC सुधार, वैश्विक दक्षिण को अधिक प्रतिनिधित्व और आतंकी सूची में पारदर्शी व प्रमाण आधारित फैसलों की मांग दोहराई।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की अपनी मांग फिर दोहराई है। नई दिल्ली ने कहा कि सुरक्षा परिषद का इस्तेमाल संकीर्ण राजनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए नहीं होना चाहिए और इसकी कार्यप्रणाली को मौजूदा वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाया जाना जरूरी है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्रभारी राजदूत योज्ना पटेल ने सुरक्षा परिषद की कार्यप्रणाली पर आयोजित खुली बहस में भारत का पक्ष रखा।
उन्होंने कहा कि परिषद में सुधार की जरूरत पहले की तुलना में अब अधिक स्पष्ट और जरूरी हो गई है।
आतंकी सूची पर पारदर्शिता
भारत ने आतंकवाद से जुड़े व्यक्तियों और संगठनों को संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में शामिल करने तथा सूची से हटाने की प्रक्रिया पर भी चिंता जताई।
भारत का कहना है कि ऐसे फैसले पारदर्शी और वस्तुनिष्ठ मानदंडों तथा पर्याप्त दस्तावेजी प्रमाणों के आधार पर होने चाहिए।
नई दिल्ली ने इस बात पर जोर दिया कि राजनीतिक विचारों के आधार पर किसी व्यक्ति या संगठन को आतंकी सूची में शामिल करना या हटाना नहीं होना चाहिए।
भारत ने यह भी कहा कि सुरक्षा परिषद की सदस्यता या प्रक्रिया का इस्तेमाल आतंकवादियों को वैधता देने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
राजनीतिक दबाव पर सवाल
योज्ना पटेल ने अपने संबोधन में किसी देश का सीधे नाम नहीं लिया। हालांकि, भारत की यह टिप्पणी संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों और उनसे जुड़े लोगों को सूचीबद्ध करने के प्रस्तावों पर पहले हुए विवादों की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारत पहले भी संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध समितियों में तकनीकी रोक या अन्य प्रक्रियात्मक उपायों के जरिए आतंकवाद से जुड़े प्रस्तावों को लंबित किए जाने पर आपत्ति जता चुका है।
नई दिल्ली का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में दोहरे मानदंड नहीं होने चाहिए और सभी मामलों में समान नियम लागू होने चाहिए।
वैश्विक दक्षिण को प्रतिनिधित्व
भारत ने सुरक्षा परिषद में वैश्विक दक्षिण के देशों की अधिक भागीदारी की मांग भी दोहराई।
भारत का तर्क है कि 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी व्यवस्था आज की दुनिया की वास्तविकताओं को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करती।
पिछले आठ दशकों में संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता में काफी विस्तार हुआ है। इसके बावजूद सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना में स्थायी और गैर-स्थायी प्रतिनिधित्व को लेकर पुरानी व्यवस्था काफी हद तक बनी हुई है।
भारत चाहता है कि परिषद की दोनों श्रेणियों में विस्तार किया जाए और विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व मिले।
कार्यप्रणाली में बदलाव जरूरी
भारत ने कहा कि सुरक्षा परिषद की कार्यप्रणाली में सुधार को व्यापक संस्थागत सुधार से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए।
नई दिल्ली के अनुसार, सुधार की चर्चा में सदस्यता की श्रेणियां, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, वीटो व्यवस्था और परिषद की कार्यप्रणाली जैसे मुद्दे एक साथ शामिल होने चाहिए।
भारत ने सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए पाठ आधारित वार्ता, स्पष्ट लक्ष्य और निर्धारित समयसीमा की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।
नई दिल्ली का मानना है कि केवल प्रक्रियात्मक बदलाव सुरक्षा परिषद की प्रतिनिधित्व संबंधी समस्या का समाधान नहीं कर सकते।
आतंकवाद पर भारत का रुख
आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई भारत की संयुक्त राष्ट्र कूटनीति का प्रमुख हिस्सा रही है।
भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवादी संगठनों और उनके समर्थकों के खिलाफ एक समान और निर्णायक नीति अपनाने की अपील करता रहा है।
नई दिल्ली का कहना है कि आतंकवाद को किसी भी राजनीतिक या रणनीतिक हित के आधार पर अलग-अलग तरीके से नहीं देखा जाना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र भी आतंकवाद के वित्तपोषण, उभरती तकनीकों और आतंकवादी संगठनों के बदलते तरीकों से निपटने के लिए अपने वैश्विक ढांचे को मजबूत कर रहा है।
आगे की राह क्या होगी
भारत आने वाले समय में UNSC सुधार के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र की अंतर-सरकारी वार्ता प्रक्रिया में आगे बढ़ा सकता है।
सुरक्षा परिषद के विस्तार, स्थायी और गैर-स्थायी सदस्यों की संख्या, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और वीटो जैसे मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच सहमति बनाना सबसे बड़ी चुनौती रहेगी।
भारत के ताजा रुख में संस्थागत सुधार और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को एक-दूसरे से जोड़ा गया है। नई दिल्ली का संदेश स्पष्ट है कि आतंकवाद से जुड़े नामों को सूची में शामिल करने या हटाने की प्रक्रिया प्रमाण, पारदर्शिता और समान नियमों पर आधारित होनी चाहिए, न कि राजनीतिक सौदेबाजी पर।
भारत ने UNSC सुधार पर दिया जोर, आतंकी सूची में पारदर्शिता की मांग
Sandeep Patel
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की अपनी मांग फिर दोहराई है। नई दिल्ली ने कहा कि सुरक्षा परिषद का इस्तेमाल संकीर्ण राजनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए नहीं होना चाहिए और इसकी कार्यप्रणाली को मौजूदा वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाया जाना जरूरी है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्रभारी राजदूत योज्ना पटेल ने सुरक्षा परिषद की कार्यप्रणाली पर आयोजित खुली बहस में भारत का पक्ष रखा।
उन्होंने कहा कि परिषद में सुधार की जरूरत पहले की तुलना में अब अधिक स्पष्ट और जरूरी हो गई है।
आतंकी सूची पर पारदर्शिता
भारत ने आतंकवाद से जुड़े व्यक्तियों और संगठनों को संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में शामिल करने तथा सूची से हटाने की प्रक्रिया पर भी चिंता जताई।
भारत का कहना है कि ऐसे फैसले पारदर्शी और वस्तुनिष्ठ मानदंडों तथा पर्याप्त दस्तावेजी प्रमाणों के आधार पर होने चाहिए।
नई दिल्ली ने इस बात पर जोर दिया कि राजनीतिक विचारों के आधार पर किसी व्यक्ति या संगठन को आतंकी सूची में शामिल करना या हटाना नहीं होना चाहिए।
भारत ने यह भी कहा कि सुरक्षा परिषद की सदस्यता या प्रक्रिया का इस्तेमाल आतंकवादियों को वैधता देने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
राजनीतिक दबाव पर सवाल
योज्ना पटेल ने अपने संबोधन में किसी देश का सीधे नाम नहीं लिया। हालांकि, भारत की यह टिप्पणी संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों और उनसे जुड़े लोगों को सूचीबद्ध करने के प्रस्तावों पर पहले हुए विवादों की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारत पहले भी संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध समितियों में तकनीकी रोक या अन्य प्रक्रियात्मक उपायों के जरिए आतंकवाद से जुड़े प्रस्तावों को लंबित किए जाने पर आपत्ति जता चुका है।
नई दिल्ली का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में दोहरे मानदंड नहीं होने चाहिए और सभी मामलों में समान नियम लागू होने चाहिए।
वैश्विक दक्षिण को प्रतिनिधित्व
भारत ने सुरक्षा परिषद में वैश्विक दक्षिण के देशों की अधिक भागीदारी की मांग भी दोहराई।
भारत का तर्क है कि 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी व्यवस्था आज की दुनिया की वास्तविकताओं को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करती।
पिछले आठ दशकों में संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता में काफी विस्तार हुआ है। इसके बावजूद सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना में स्थायी और गैर-स्थायी प्रतिनिधित्व को लेकर पुरानी व्यवस्था काफी हद तक बनी हुई है।
भारत चाहता है कि परिषद की दोनों श्रेणियों में विस्तार किया जाए और विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व मिले।
कार्यप्रणाली में बदलाव जरूरी
भारत ने कहा कि सुरक्षा परिषद की कार्यप्रणाली में सुधार को व्यापक संस्थागत सुधार से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए।
नई दिल्ली के अनुसार, सुधार की चर्चा में सदस्यता की श्रेणियां, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, वीटो व्यवस्था और परिषद की कार्यप्रणाली जैसे मुद्दे एक साथ शामिल होने चाहिए।
भारत ने सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए पाठ आधारित वार्ता, स्पष्ट लक्ष्य और निर्धारित समयसीमा की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।
नई दिल्ली का मानना है कि केवल प्रक्रियात्मक बदलाव सुरक्षा परिषद की प्रतिनिधित्व संबंधी समस्या का समाधान नहीं कर सकते।
आतंकवाद पर भारत का रुख
आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई भारत की संयुक्त राष्ट्र कूटनीति का प्रमुख हिस्सा रही है।
भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवादी संगठनों और उनके समर्थकों के खिलाफ एक समान और निर्णायक नीति अपनाने की अपील करता रहा है।
नई दिल्ली का कहना है कि आतंकवाद को किसी भी राजनीतिक या रणनीतिक हित के आधार पर अलग-अलग तरीके से नहीं देखा जाना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र भी आतंकवाद के वित्तपोषण, उभरती तकनीकों और आतंकवादी संगठनों के बदलते तरीकों से निपटने के लिए अपने वैश्विक ढांचे को मजबूत कर रहा है।
आगे की राह क्या होगी
भारत आने वाले समय में UNSC सुधार के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र की अंतर-सरकारी वार्ता प्रक्रिया में आगे बढ़ा सकता है।
सुरक्षा परिषद के विस्तार, स्थायी और गैर-स्थायी सदस्यों की संख्या, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और वीटो जैसे मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच सहमति बनाना सबसे बड़ी चुनौती रहेगी।
भारत के ताजा रुख में संस्थागत सुधार और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को एक-दूसरे से जोड़ा गया है। नई दिल्ली का संदेश स्पष्ट है कि आतंकवाद से जुड़े नामों को सूची में शामिल करने या हटाने की प्रक्रिया प्रमाण, पारदर्शिता और समान नियमों पर आधारित होनी चाहिए, न कि राजनीतिक सौदेबाजी पर।
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