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युद्ध रणनीति में बदलाव के बीच अमेरिकी सेना विशेष ड्रोन यूनिट को कर रही खत्म
Sandeep Patel
यूक्रेन युद्ध से मिले सबक पर बनी अमेरिकी ड्रोन यूनिट को खत्म किया जा रहा है, जबकि पेंटागन कम लागत वाले सैन्य ड्रोन में निवेश बढ़ा रहा है।
अमेरिकी सेना की विशेष ड्रोन यूनिट को चरणबद्ध तरीके से खत्म किया जा रहा है। यह यूनिट मानवरहित हवाई सिस्टम और जमीन पर चलने वाले रोबोट के जरिए आधुनिक युद्ध की रणनीति विकसित करने के लिए बनाई गई थी। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, यह फैसला यूनिट के गठन के कुछ ही महीनों बाद लिया गया है।
अमेरिकी सेना ने इस यूनिट को यूरोप में रूस-यूक्रेन युद्ध से मिले सबक का अध्ययन करने और युद्ध के मैदान में ड्रोन के इस्तेमाल की नई रणनीतियां विकसित करने के लिए बनाया था।
हालांकि, यूनिट को खत्म करने का अर्थ यह नहीं है कि अमेरिका ड्रोन युद्ध से पीछे हट रहा है। पेंटागन अब भी कम लागत वाले मानवरहित सिस्टम के विकास और उत्पादन पर बड़ा निवेश कर रहा है।
ड्रोन युद्ध के लिए बनी यूनिट
तीसरी बटालियन, 504वीं पैराशूट इन्फैंट्री रेजिमेंट अमेरिकी सेना की 173वीं एयरबोर्न ब्रिगेड का हिस्सा है। इसे जनवरी 2026 में जर्मनी में फिर से सक्रिय किया गया था।
यूनिट के सैनिकों को सक्रिय होने के बाद छोटे मानवरहित हवाई सिस्टम के संचालन और इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया गया।
इसका उद्देश्य केवल ड्रोन उड़ाना नहीं था। यूनिट को यह अध्ययन करना था कि ड्रोन, सेंसर और जमीन पर चलने वाले मानवरहित सिस्टम को पारंपरिक सैनिकों के साथ किस तरह जोड़ा जा सकता है।
अब बदली जाएगी भूमिका
द वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, अमेरिकी सेना के कार्यवाहक चीफ ऑफ स्टाफ जनरल क्रिस्टोफर लानेव ने बटालियन को विशेष ड्रोन और रोबोटिक भूमिका से हटाने का आदेश दिया है।
इसके बाद यूनिट को अधिक पारंपरिक एयरबोर्न इन्फैंट्री भूमिका में वापस ले जाने की योजना है।
यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और सेना का नेतृत्व पारंपरिक युद्धक क्षमताओं तथा नियमित सैन्य संरचनाओं पर अधिक जोर दे रहे हैं।
रक्षा विशेषज्ञों के एक वर्ग ने चिंता जताई है कि विशेष प्रयोगात्मक यूनिट को हटाने से तेजी से बदलती युद्ध तकनीक से सीखने की सेना की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
अमेरिका का ड्रोन निवेश जारी
विशेष बटालियन की भूमिका बदलने के बावजूद अमेरिकी सरकार ने सैन्य ड्रोन कार्यक्रमों में निवेश कम नहीं किया है।
ट्रंप प्रशासन ने लगभग 1.1 अरब डॉलर के ड्रोन डॉमिनेंस प्रोग्राम को समर्थन दिया है। इसका उद्देश्य कम लागत वाले बड़े पैमाने के ड्रोन विकसित करना और अमेरिकी सैनिकों को तेजी से उपलब्ध कराना है।
पेंटागन इस क्षेत्र में निजी कंपनियों और नए मानवरहित प्लेटफॉर्म का परीक्षण भी कर रहा है।
इसलिए एक विशेष बटालियन को खत्म करने को अमेरिकी ड्रोन नीति से पूरी तरह पीछे हटने के रूप में देखना सही नहीं होगा।
यूक्रेन ने बदली युद्ध रणनीति
रूस-यूक्रेन युद्ध ने आधुनिक युद्ध में छोटे और अपेक्षाकृत सस्ते ड्रोन की भूमिका को काफी बढ़ा दिया है।
रूस और यूक्रेन दोनों सेनाएं निगरानी, टोही, तोपखाने के लक्ष्य तय करने और हमलों के लिए ड्रोन का इस्तेमाल करती हैं।
ड्रोन सैनिकों को युद्ध क्षेत्र की वास्तविक समय की जानकारी देने के साथ-साथ कम लागत में दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने में मदद करते हैं।
अमेरिकी सेना ने भी यूक्रेन के युद्ध अनुभवों का अध्ययन किया है। 504वीं पैराशूट इन्फैंट्री बटालियन को इसी प्रक्रिया के तहत छोटे ड्रोन के संचालन का प्रशिक्षण दिया गया था।
सेना की प्राथमिकताओं पर बहस
विशेष ड्रोन यूनिट को हटाने के बाद अमेरिकी सेना के भीतर एक अहम सवाल उठ रहा है कि ड्रोन विशेषज्ञता को अलग यूनिट में रखा जाए या सभी पारंपरिक सैन्य इकाइयों में वितरित किया जाए।
एक मॉडल में प्रत्येक लड़ाकू यूनिट को अपने ड्रोन और ऑपरेटर दिए जा सकते हैं। इससे ड्रोन तकनीक सीधे जमीनी अभियानों का हिस्सा बन सकती है।
दूसरे मॉडल में विशेष यूनिट को नई तकनीकों और रणनीतियों के परीक्षण के लिए इस्तेमाल किया जाता है, ताकि सफल तकनीक को बाद में पूरी सेना में लागू किया जा सके।
यही अंतर मौजूदा फैसले को महत्वपूर्ण बनाता है।
वरिष्ठ नेतृत्व में भी बदलाव
यह फैसला अमेरिकी सेना के वरिष्ठ नेतृत्व में हुए बदलावों के बीच आया है।
जनरल रैंडी जॉर्ज, जिन्होंने सेना के आधुनिकीकरण कार्यक्रमों का समर्थन किया था, इस साल सेना से सेवानिवृत्त हुए। जनरल क्रिस्टोफर डोनाह्यू ने भी यूरोप में अपनी वरिष्ठ कमान की भूमिका छोड़ी।
इन बदलावों के बाद अमेरिकी सेना के आधुनिकीकरण की दिशा को लेकर बहस तेज हुई है।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टिंग यह साबित नहीं करती कि इन नेतृत्व परिवर्तनों के कारण ही विशेष ड्रोन बटालियन की भूमिका बदली गई।
ड्रोन युद्ध का भविष्य
अमेरिकी सेना की विशेष ड्रोन यूनिट का भविष्य बदल रहा है, लेकिन देश की ड्रोन युद्ध क्षमता खत्म नहीं हो रही है।
पेंटागन अब भी ड्रोन के विकास, परीक्षण और खरीद पर खर्च कर रहा है। सेना के सामने अब मुख्य चुनौती यह है कि कम लागत वाले ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेंसर और पारंपरिक लड़ाकू सैनिकों को एक प्रभावी युद्ध प्रणाली में किस तरह जोड़ा जाए।
यूक्रेन युद्ध से मिले सबक ने दुनिया भर की सेनाओं को अपनी युद्ध रणनीतियां बदलने के लिए मजबूर किया है। ऐसे में अमेरिकी सेना द्वारा इस विशेष यूनिट की भूमिका बदलने का फैसला यह तय करने में अहम हो सकता है कि भविष्य में ड्रोन विशेषज्ञता अलग इकाइयों में रहेगी या पारंपरिक सैन्य संरचना का स्थायी हिस्सा बन जाएगी।
युद्ध रणनीति में बदलाव के बीच अमेरिकी सेना विशेष ड्रोन यूनिट को कर रही खत्म
Sandeep Patel
अमेरिकी सेना की विशेष ड्रोन यूनिट को चरणबद्ध तरीके से खत्म किया जा रहा है। यह यूनिट मानवरहित हवाई सिस्टम और जमीन पर चलने वाले रोबोट के जरिए आधुनिक युद्ध की रणनीति विकसित करने के लिए बनाई गई थी। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, यह फैसला यूनिट के गठन के कुछ ही महीनों बाद लिया गया है।
अमेरिकी सेना ने इस यूनिट को यूरोप में रूस-यूक्रेन युद्ध से मिले सबक का अध्ययन करने और युद्ध के मैदान में ड्रोन के इस्तेमाल की नई रणनीतियां विकसित करने के लिए बनाया था।
हालांकि, यूनिट को खत्म करने का अर्थ यह नहीं है कि अमेरिका ड्रोन युद्ध से पीछे हट रहा है। पेंटागन अब भी कम लागत वाले मानवरहित सिस्टम के विकास और उत्पादन पर बड़ा निवेश कर रहा है।
ड्रोन युद्ध के लिए बनी यूनिट
तीसरी बटालियन, 504वीं पैराशूट इन्फैंट्री रेजिमेंट अमेरिकी सेना की 173वीं एयरबोर्न ब्रिगेड का हिस्सा है। इसे जनवरी 2026 में जर्मनी में फिर से सक्रिय किया गया था।
यूनिट के सैनिकों को सक्रिय होने के बाद छोटे मानवरहित हवाई सिस्टम के संचालन और इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया गया।
इसका उद्देश्य केवल ड्रोन उड़ाना नहीं था। यूनिट को यह अध्ययन करना था कि ड्रोन, सेंसर और जमीन पर चलने वाले मानवरहित सिस्टम को पारंपरिक सैनिकों के साथ किस तरह जोड़ा जा सकता है।
अब बदली जाएगी भूमिका
द वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, अमेरिकी सेना के कार्यवाहक चीफ ऑफ स्टाफ जनरल क्रिस्टोफर लानेव ने बटालियन को विशेष ड्रोन और रोबोटिक भूमिका से हटाने का आदेश दिया है।
इसके बाद यूनिट को अधिक पारंपरिक एयरबोर्न इन्फैंट्री भूमिका में वापस ले जाने की योजना है।
यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और सेना का नेतृत्व पारंपरिक युद्धक क्षमताओं तथा नियमित सैन्य संरचनाओं पर अधिक जोर दे रहे हैं।
रक्षा विशेषज्ञों के एक वर्ग ने चिंता जताई है कि विशेष प्रयोगात्मक यूनिट को हटाने से तेजी से बदलती युद्ध तकनीक से सीखने की सेना की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
अमेरिका का ड्रोन निवेश जारी
विशेष बटालियन की भूमिका बदलने के बावजूद अमेरिकी सरकार ने सैन्य ड्रोन कार्यक्रमों में निवेश कम नहीं किया है।
ट्रंप प्रशासन ने लगभग 1.1 अरब डॉलर के ड्रोन डॉमिनेंस प्रोग्राम को समर्थन दिया है। इसका उद्देश्य कम लागत वाले बड़े पैमाने के ड्रोन विकसित करना और अमेरिकी सैनिकों को तेजी से उपलब्ध कराना है।
पेंटागन इस क्षेत्र में निजी कंपनियों और नए मानवरहित प्लेटफॉर्म का परीक्षण भी कर रहा है।
इसलिए एक विशेष बटालियन को खत्म करने को अमेरिकी ड्रोन नीति से पूरी तरह पीछे हटने के रूप में देखना सही नहीं होगा।
यूक्रेन ने बदली युद्ध रणनीति
रूस-यूक्रेन युद्ध ने आधुनिक युद्ध में छोटे और अपेक्षाकृत सस्ते ड्रोन की भूमिका को काफी बढ़ा दिया है।
रूस और यूक्रेन दोनों सेनाएं निगरानी, टोही, तोपखाने के लक्ष्य तय करने और हमलों के लिए ड्रोन का इस्तेमाल करती हैं।
ड्रोन सैनिकों को युद्ध क्षेत्र की वास्तविक समय की जानकारी देने के साथ-साथ कम लागत में दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने में मदद करते हैं।
अमेरिकी सेना ने भी यूक्रेन के युद्ध अनुभवों का अध्ययन किया है। 504वीं पैराशूट इन्फैंट्री बटालियन को इसी प्रक्रिया के तहत छोटे ड्रोन के संचालन का प्रशिक्षण दिया गया था।
सेना की प्राथमिकताओं पर बहस
विशेष ड्रोन यूनिट को हटाने के बाद अमेरिकी सेना के भीतर एक अहम सवाल उठ रहा है कि ड्रोन विशेषज्ञता को अलग यूनिट में रखा जाए या सभी पारंपरिक सैन्य इकाइयों में वितरित किया जाए।
एक मॉडल में प्रत्येक लड़ाकू यूनिट को अपने ड्रोन और ऑपरेटर दिए जा सकते हैं। इससे ड्रोन तकनीक सीधे जमीनी अभियानों का हिस्सा बन सकती है।
दूसरे मॉडल में विशेष यूनिट को नई तकनीकों और रणनीतियों के परीक्षण के लिए इस्तेमाल किया जाता है, ताकि सफल तकनीक को बाद में पूरी सेना में लागू किया जा सके।
यही अंतर मौजूदा फैसले को महत्वपूर्ण बनाता है।
वरिष्ठ नेतृत्व में भी बदलाव
यह फैसला अमेरिकी सेना के वरिष्ठ नेतृत्व में हुए बदलावों के बीच आया है।
जनरल रैंडी जॉर्ज, जिन्होंने सेना के आधुनिकीकरण कार्यक्रमों का समर्थन किया था, इस साल सेना से सेवानिवृत्त हुए। जनरल क्रिस्टोफर डोनाह्यू ने भी यूरोप में अपनी वरिष्ठ कमान की भूमिका छोड़ी।
इन बदलावों के बाद अमेरिकी सेना के आधुनिकीकरण की दिशा को लेकर बहस तेज हुई है।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टिंग यह साबित नहीं करती कि इन नेतृत्व परिवर्तनों के कारण ही विशेष ड्रोन बटालियन की भूमिका बदली गई।
ड्रोन युद्ध का भविष्य
अमेरिकी सेना की विशेष ड्रोन यूनिट का भविष्य बदल रहा है, लेकिन देश की ड्रोन युद्ध क्षमता खत्म नहीं हो रही है।
पेंटागन अब भी ड्रोन के विकास, परीक्षण और खरीद पर खर्च कर रहा है। सेना के सामने अब मुख्य चुनौती यह है कि कम लागत वाले ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेंसर और पारंपरिक लड़ाकू सैनिकों को एक प्रभावी युद्ध प्रणाली में किस तरह जोड़ा जाए।
यूक्रेन युद्ध से मिले सबक ने दुनिया भर की सेनाओं को अपनी युद्ध रणनीतियां बदलने के लिए मजबूर किया है। ऐसे में अमेरिकी सेना द्वारा इस विशेष यूनिट की भूमिका बदलने का फैसला यह तय करने में अहम हो सकता है कि भविष्य में ड्रोन विशेषज्ञता अलग इकाइयों में रहेगी या पारंपरिक सैन्य संरचना का स्थायी हिस्सा बन जाएगी।
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