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MP में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की एंट्री, भोपाल में की प्रेस कॉन्फ्रेंस
नेशनल डेस्क
भोपाल में कॉकरोच जनता पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस से हलचल। युवाओं ने इसे सिस्टम के खिलाफ आंदोलन बताया, NEET पेपर लीक का मुद्दा भी उठाया।
भोपाल में शुक्रवार को एक नई राजनीतिक हलचल देखने को मिली जब 'कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)' के नाम से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन हुआ। यह प्रेस वार्ता शहर के एक निजी कार्यक्रम स्थल पर हुई, जहां सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे युवा मयंक ने खुद को इस आंदोलन का हिस्सा बताते हुए कई तीखे बयान दिए। साथ ही, नीट पेपर लीक से प्रभावित छात्र-छात्राएं और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों का आरोप लगाने वाले युवा भी वहां मौजूद थे। अचानक से उभरे इस 'न्यू एज पॉलिटिकल पहल' ने भोपाल के राजनीतिक और छात्र समुदाय में चर्चा का दौर तेज कर दिया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मयंक ने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी किसी पारंपरिक राजनीतिक दल के जैसे नहीं है, बल्कि यह एक आंदोलन है जो युवाओं की आवाज को व्यवस्था की खामियों और ढीले सिस्टम के खिलाफ उठाने का काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं ने लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद किया है और अब युवा चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब युवा सवाल उठाते हैं, तो उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जाती है, यहां तक कि सोशल मीडिया पर भी रोक लगाने की बातें सामने आती हैं।
मयंक ने बताया कि जल्द ही मध्य प्रदेश स्तर पर पार्टी की कोर कमेटी का ऐलान किया जाएगा, और इसके बाद संगठन विस्तार पर ध्यान दिया जाएगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने विदेशी फॉलोअर्स और राजनीतिक आरोपों को लेकर आए सवालों का जवाब देते हुए इसे 'सरकारी दुष्प्रचार' करार दिया। उनका यह कहना रहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति या पार्टी के खिलाफ नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम की कमियों के खिलाफ है, जिसमें कार्यपालिका से लेकर विपक्ष तक सभी शामिल हैं।
इस बीच, मीडिया के सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि यह युवाओं को जागरूक करने की एक शुरुआत है, ताकि वे स्थानीय स्तर पर सक्रिय भूमिका निभा सकें। आंदोलन के संस्थापक के बारे में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि विचार कहीं से भी आ सकते हैं, स्थान से ज्यादा उद्देश्य महत्वपूर्ण होता है।
पूरे कार्यक्रम के दौरान एक खास प्रतीकात्मक अंदाज भी देखने को मिला, जहां 'मेलोडी' चॉकलेट पर भी चर्चा की गई। मयंक ने बताया कि यह व्यवस्था को करीब से देखने और उसके अनुभव को समझने का प्रतीक है।
दूसरी तरफ, इस नाम और आंदोलन के बारे में सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कुछ लोग इसे युवाओं की नाराजगी का प्रतीक मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे एक डिजिटल या वैचारिक प्रयोग के रूप में देख रहे हैं। राजनीतिक हलकों में भी इसके प्रति अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
यह ध्यान देने योग्य है कि कुछ दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट में युवाओं को लेकर की गई टिप्पणी के बाद 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम चर्चा में आया था और अब भोपाल में इसकी सक्रियता ने इसे और भी सुर्खियों में ला दिया है।
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MP में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की एंट्री, भोपाल में की प्रेस कॉन्फ्रेंस
नेशनल डेस्क
भोपाल में शुक्रवार को एक नई राजनीतिक हलचल देखने को मिली जब 'कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)' के नाम से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन हुआ। यह प्रेस वार्ता शहर के एक निजी कार्यक्रम स्थल पर हुई, जहां सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे युवा मयंक ने खुद को इस आंदोलन का हिस्सा बताते हुए कई तीखे बयान दिए। साथ ही, नीट पेपर लीक से प्रभावित छात्र-छात्राएं और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों का आरोप लगाने वाले युवा भी वहां मौजूद थे। अचानक से उभरे इस 'न्यू एज पॉलिटिकल पहल' ने भोपाल के राजनीतिक और छात्र समुदाय में चर्चा का दौर तेज कर दिया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मयंक ने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी किसी पारंपरिक राजनीतिक दल के जैसे नहीं है, बल्कि यह एक आंदोलन है जो युवाओं की आवाज को व्यवस्था की खामियों और ढीले सिस्टम के खिलाफ उठाने का काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं ने लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद किया है और अब युवा चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब युवा सवाल उठाते हैं, तो उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जाती है, यहां तक कि सोशल मीडिया पर भी रोक लगाने की बातें सामने आती हैं।
मयंक ने बताया कि जल्द ही मध्य प्रदेश स्तर पर पार्टी की कोर कमेटी का ऐलान किया जाएगा, और इसके बाद संगठन विस्तार पर ध्यान दिया जाएगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने विदेशी फॉलोअर्स और राजनीतिक आरोपों को लेकर आए सवालों का जवाब देते हुए इसे 'सरकारी दुष्प्रचार' करार दिया। उनका यह कहना रहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति या पार्टी के खिलाफ नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम की कमियों के खिलाफ है, जिसमें कार्यपालिका से लेकर विपक्ष तक सभी शामिल हैं।
इस बीच, मीडिया के सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि यह युवाओं को जागरूक करने की एक शुरुआत है, ताकि वे स्थानीय स्तर पर सक्रिय भूमिका निभा सकें। आंदोलन के संस्थापक के बारे में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि विचार कहीं से भी आ सकते हैं, स्थान से ज्यादा उद्देश्य महत्वपूर्ण होता है।
पूरे कार्यक्रम के दौरान एक खास प्रतीकात्मक अंदाज भी देखने को मिला, जहां 'मेलोडी' चॉकलेट पर भी चर्चा की गई। मयंक ने बताया कि यह व्यवस्था को करीब से देखने और उसके अनुभव को समझने का प्रतीक है।
दूसरी तरफ, इस नाम और आंदोलन के बारे में सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कुछ लोग इसे युवाओं की नाराजगी का प्रतीक मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे एक डिजिटल या वैचारिक प्रयोग के रूप में देख रहे हैं। राजनीतिक हलकों में भी इसके प्रति अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
यह ध्यान देने योग्य है कि कुछ दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट में युवाओं को लेकर की गई टिप्पणी के बाद 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम चर्चा में आया था और अब भोपाल में इसकी सक्रियता ने इसे और भी सुर्खियों में ला दिया है।
