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SIR के बाद भी बंपर वोटिंग: बंगाल में 95% तक मतदान
नेशनल न्यूज
पश्चिम बंगाल में SIR के बावजूद रिकॉर्ड मतदान, कई सीटों पर 95% से ज्यादा वोटिंग दर्ज बंगाल में वोटरों ने हर अनुमान को पीछे छोड़ दिया।जहां नाम कटे, वहीं सबसे ज्यादा मतदान ने चौंकाया।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। 23 अप्रैल को 152 सीटों पर हुए मतदान में राज्यभर में 92.9 फीसदी वोटिंग दर्ज की गई, जो 2011 के बाद सबसे ज्यादा है। खास बात यह रही कि जिन सीटों पर विशेष पुनरीक्षण अभियान (SIR) के तहत बड़ी संख्या में वोटर सूची से नाम हटाए गए थे, वहां भी 95 फीसदी से अधिक मतदान हुआ। यह ट्रेंड चुनावी माहौल और मतदाताओं के उत्साह को साफ तौर पर दर्शाता है।
चुनाव आयोग के अनुसार, मुर्शिदाबाद जिले की समसेरगंज सीट पर 96.03 फीसदी मतदान हुआ, जबकि यहां सबसे ज्यादा करीब 91 हजार से अधिक नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए थे। इसी तरह लालगोला, भगवानगोला, रघुनाथगंज और फरक्का सीटों पर भी 96 फीसदी के आसपास मतदान दर्ज किया गया, जबकि इन क्षेत्रों में भी SIR के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए गए थे।
SIR के बाद असर
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन अभियान के तहत राज्य में करीब 11.63 फीसदी वोटरों के नाम सूची से हटाए गए थे। चुनाव आयोग के मुताबिक, हटाए गए नामों में मृत, स्थानांतरित या डुप्लिकेट प्रविष्टियां शामिल थीं। इसके बावजूद जिस तरह से वोटिंग प्रतिशत बढ़ा, उसने कई राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है।
बंपर मतदान को लेकर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इसे जनता का समर्थन बताते हुए कहा कि लोगों ने बड़े पैमाने पर मतदान कर विपक्ष की रणनीतियों को नाकाम कर दिया है। वहीं, भाजपा नेताओं का कहना है कि यह बदलाव और सत्ता परिवर्तन की इच्छा का संकेत है।
पृष्ठभूमि की बात करें तो 2011 में पश्चिम बंगाल में 84.72 फीसदी मतदान हुआ था, जब ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस ने वाम मोर्चा सरकार को सत्ता से हटाया था। इस बार का मतदान प्रतिशत उस रिकॉर्ड को भी पार कर गया है।
महिला मतदाताओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, महिलाओं ने 92.69 फीसदी और पुरुषों ने 90.92 फीसदी मतदान किया। यह अंतर दर्शाता है कि महिला वोटर्स इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि SIR प्रक्रिया चुनावी मुद्दा भी बनी, जिसका असर मतदाताओं के रुझान पर पड़ा। कुछ विपक्षी दलों ने इसे लेकर आपत्ति जताई थी और सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचा था।
आगे के चरणों में भी मतदान का यह रुझान बना रहता है या नहीं, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। फिलहाल, पहले चरण की रिकॉर्ड वोटिंग ने यह साफ कर दिया है कि बंगाल में लोकतंत्र के इस उत्सव में जनता बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही है।
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SIR के बाद भी बंपर वोटिंग: बंगाल में 95% तक मतदान
नेशनल न्यूज
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। 23 अप्रैल को 152 सीटों पर हुए मतदान में राज्यभर में 92.9 फीसदी वोटिंग दर्ज की गई, जो 2011 के बाद सबसे ज्यादा है। खास बात यह रही कि जिन सीटों पर विशेष पुनरीक्षण अभियान (SIR) के तहत बड़ी संख्या में वोटर सूची से नाम हटाए गए थे, वहां भी 95 फीसदी से अधिक मतदान हुआ। यह ट्रेंड चुनावी माहौल और मतदाताओं के उत्साह को साफ तौर पर दर्शाता है।
चुनाव आयोग के अनुसार, मुर्शिदाबाद जिले की समसेरगंज सीट पर 96.03 फीसदी मतदान हुआ, जबकि यहां सबसे ज्यादा करीब 91 हजार से अधिक नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए थे। इसी तरह लालगोला, भगवानगोला, रघुनाथगंज और फरक्का सीटों पर भी 96 फीसदी के आसपास मतदान दर्ज किया गया, जबकि इन क्षेत्रों में भी SIR के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए गए थे।
SIR के बाद असर
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन अभियान के तहत राज्य में करीब 11.63 फीसदी वोटरों के नाम सूची से हटाए गए थे। चुनाव आयोग के मुताबिक, हटाए गए नामों में मृत, स्थानांतरित या डुप्लिकेट प्रविष्टियां शामिल थीं। इसके बावजूद जिस तरह से वोटिंग प्रतिशत बढ़ा, उसने कई राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है।
बंपर मतदान को लेकर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इसे जनता का समर्थन बताते हुए कहा कि लोगों ने बड़े पैमाने पर मतदान कर विपक्ष की रणनीतियों को नाकाम कर दिया है। वहीं, भाजपा नेताओं का कहना है कि यह बदलाव और सत्ता परिवर्तन की इच्छा का संकेत है।
पृष्ठभूमि की बात करें तो 2011 में पश्चिम बंगाल में 84.72 फीसदी मतदान हुआ था, जब ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस ने वाम मोर्चा सरकार को सत्ता से हटाया था। इस बार का मतदान प्रतिशत उस रिकॉर्ड को भी पार कर गया है।
महिला मतदाताओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, महिलाओं ने 92.69 फीसदी और पुरुषों ने 90.92 फीसदी मतदान किया। यह अंतर दर्शाता है कि महिला वोटर्स इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि SIR प्रक्रिया चुनावी मुद्दा भी बनी, जिसका असर मतदाताओं के रुझान पर पड़ा। कुछ विपक्षी दलों ने इसे लेकर आपत्ति जताई थी और सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचा था।
आगे के चरणों में भी मतदान का यह रुझान बना रहता है या नहीं, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। फिलहाल, पहले चरण की रिकॉर्ड वोटिंग ने यह साफ कर दिया है कि बंगाल में लोकतंत्र के इस उत्सव में जनता बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही है।
