ड्रोन ऑपरेशन मामले में दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून को 30 साल की सजा

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उत्तर कोरिया में सैन्य ड्रोन भेजने और तनाव बढ़ाने के आरोप में अदालत का बड़ा फैसला, मार्शल लॉ विवाद के बाद पूर्व राष्ट्रपति की मुश्किलें और बढ़ीं

दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल को लेकर शुक्रवार को एक बड़ा न्यायिक फैसला सामने आया। सियोल की अदालत ने उन्हें उत्तर कोरिया में सैन्य ड्रोन भेजने के मामले में दोषी मानते हुए 30 वर्ष की जेल की सजा सुनाई है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब यून पहले से ही मार्शल लॉ लागू करने के प्रयास से जुड़े एक अन्य मामले में सजा का सामना कर रहे हैं। अदालत के इस नए आदेश ने दक्षिण कोरिया की राजनीति में एक बार फिर हलचल पैदा कर दी है। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि यून सुक योल के कार्यकाल के दौरान सैन्य ड्रोन को उत्तर कोरिया की सीमा के भीतर भेजा गया था। इन ड्रोन अभियानों का उद्देश्य केवल निगरानी नहीं था, बल्कि कथित तौर पर ऐसा माहौल तैयार करना था जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़े और बाद में आपातकालीन कदमों को उचित ठहराया जा सके। अभियोजकों का दावा था कि इस कार्रवाई ने राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित किया। मामले की सुनवाई के दौरान विशेष अभियोजकों ने अदालत को बताया कि ड्रोन अभियानों के जरिए युद्ध जैसे हालात पैदा करने की कोशिश की गई। उनका कहना था कि इस कदम ने कोरियाई प्रायद्वीप में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया। अभियोजन पक्ष ने अप्रैल में अदालत से यून के लिए 30 वर्ष की सजा की मांग की थी, जिसे अब अदालत ने स्वीकार कर लिया है।

अक्टूबर 2024 में उत्तर कोरिया ने आरोप लगाया था कि दक्षिण कोरिया की ओर से भेजे गए ड्रोन उसके क्षेत्र में घुसे थे और उन्होंने प्रचार सामग्री वाले पर्चे भी गिराए थे। इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव काफी बढ़ गया था। उस समय उत्तर कोरिया ने इसे गंभीर उकसावे की कार्रवाई बताया था और कड़ी प्रतिक्रिया देने की चेतावनी भी दी थी। यून सुक योल ने शुरू से ही अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया। उनके वकीलों ने अदालत में दलील दी कि पूर्व राष्ट्रपति ने न तो किसी ड्रोन अभियान का आदेश दिया और न ही बाद में उसे मंजूरी दी। बचाव पक्ष का कहना था कि सीमा पर बढ़ती गतिविधियों और उत्तर कोरिया की ओर से लगातार भेजे जा रहे कचरे से भरे गुब्बारों के जवाब में कुछ सैन्य कदम उठाए गए थे, लेकिन उनका मार्शल लॉ से कोई संबंध नहीं था। इसके बावजूद अदालत ने अभियोजन पक्ष की दलीलों को अधिक महत्व दिया। अदालत की ओर से जारी संक्षिप्त जानकारी में कहा गया कि उपलब्ध साक्ष्यों और जांच रिपोर्टों के आधार पर पूर्व राष्ट्रपति को दोषी पाया गया है। हालांकि फैसले का विस्तृत आदेश अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन सजा की अवधि ने यह स्पष्ट कर दिया कि अदालत ने मामले को बेहद गंभीर माना है।

यून सुक योल के खिलाफ यह पहला बड़ा फैसला नहीं है। इससे पहले फरवरी 2026 में भी एक दक्षिण कोरियाई अदालत ने उन्हें मार्शल लॉ लागू करने की कोशिश से जुड़े मामले में दोषी ठहराया था। उस मामले में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। अदालत ने माना था कि उनका कदम लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक ढांचे के खिलाफ था। बाद में संवैधानिक न्यायालय ने उनके महाभियोग को भी बरकरार रखा, जिसके चलते उन्हें राष्ट्रपति पद छोड़ना पड़ा। यून के पद से हटने के बाद दक्षिण कोरिया में समय से पहले चुनाव कराए गए थे। इन चुनावों में उदारवादी नेता ली जे म्युंग ने जीत हासिल की और देश के नए राष्ट्रपति बने। नई सरकार के आने के बाद कई विवादित फैसलों और सुरक्षा मामलों की समीक्षा शुरू हुई थी। इसी दौरान ड्रोन अभियानों को लेकर भी जांच तेज हुई और कई दस्तावेज सामने आए।

इस वर्ष की शुरुआत में राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने भी ड्रोन संबंधी घटनाओं पर चिंता जताई थी। एक जांच रिपोर्ट में सामने आया था कि सरकारी अधिकारियों ने जनवरी में उत्तर कोरिया की ओर ड्रोन भेजे थे। इस पर राष्ट्रपति ने खेद व्यक्त किया था और कहा था कि ऐसी गतिविधियां क्षेत्रीय शांति को प्रभावित कर सकती हैं। दिलचस्प बात यह रही कि उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने उस बयान को सकारात्मक संकेत बताया था। दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की उम्मीद ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी। उत्तर कोरिया ने बाद में फिर दक्षिण कोरिया को अपना सबसे बड़ा शत्रु बताया और दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण बयानबाजी जारी रही। विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन, निगरानी गतिविधियां और सीमा पार प्रचार अभियान आने वाले समय में भी दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित करते रहेंगे। यून सुक योल के खिलाफ लगातार आ रहे फैसले दक्षिण कोरिया के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होंगे। कभी देश के शीर्ष अभियोजक और बाद में राष्ट्रपति रहे यून का राजनीतिक सफर जिस तरह कानूनी विवादों में उलझा, उसने देश की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया है। अदालत के इस ताजा फैसले के बाद अब निगाहें संभावित अपील प्रक्रिया पर टिकी हैं। यून के समर्थकों का कहना है कि वे फैसले को उच्च अदालत में चुनौती देंगे, जबकि विरोधी दल इसे कानून के शासन की जीत बता रहे हैं। 

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12 Jun 2026 By Vaishnavi.J

ड्रोन ऑपरेशन मामले में दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून को 30 साल की सजा

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दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल को लेकर शुक्रवार को एक बड़ा न्यायिक फैसला सामने आया। सियोल की अदालत ने उन्हें उत्तर कोरिया में सैन्य ड्रोन भेजने के मामले में दोषी मानते हुए 30 वर्ष की जेल की सजा सुनाई है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब यून पहले से ही मार्शल लॉ लागू करने के प्रयास से जुड़े एक अन्य मामले में सजा का सामना कर रहे हैं। अदालत के इस नए आदेश ने दक्षिण कोरिया की राजनीति में एक बार फिर हलचल पैदा कर दी है। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि यून सुक योल के कार्यकाल के दौरान सैन्य ड्रोन को उत्तर कोरिया की सीमा के भीतर भेजा गया था। इन ड्रोन अभियानों का उद्देश्य केवल निगरानी नहीं था, बल्कि कथित तौर पर ऐसा माहौल तैयार करना था जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़े और बाद में आपातकालीन कदमों को उचित ठहराया जा सके। अभियोजकों का दावा था कि इस कार्रवाई ने राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित किया। मामले की सुनवाई के दौरान विशेष अभियोजकों ने अदालत को बताया कि ड्रोन अभियानों के जरिए युद्ध जैसे हालात पैदा करने की कोशिश की गई। उनका कहना था कि इस कदम ने कोरियाई प्रायद्वीप में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया। अभियोजन पक्ष ने अप्रैल में अदालत से यून के लिए 30 वर्ष की सजा की मांग की थी, जिसे अब अदालत ने स्वीकार कर लिया है।

अक्टूबर 2024 में उत्तर कोरिया ने आरोप लगाया था कि दक्षिण कोरिया की ओर से भेजे गए ड्रोन उसके क्षेत्र में घुसे थे और उन्होंने प्रचार सामग्री वाले पर्चे भी गिराए थे। इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव काफी बढ़ गया था। उस समय उत्तर कोरिया ने इसे गंभीर उकसावे की कार्रवाई बताया था और कड़ी प्रतिक्रिया देने की चेतावनी भी दी थी। यून सुक योल ने शुरू से ही अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया। उनके वकीलों ने अदालत में दलील दी कि पूर्व राष्ट्रपति ने न तो किसी ड्रोन अभियान का आदेश दिया और न ही बाद में उसे मंजूरी दी। बचाव पक्ष का कहना था कि सीमा पर बढ़ती गतिविधियों और उत्तर कोरिया की ओर से लगातार भेजे जा रहे कचरे से भरे गुब्बारों के जवाब में कुछ सैन्य कदम उठाए गए थे, लेकिन उनका मार्शल लॉ से कोई संबंध नहीं था। इसके बावजूद अदालत ने अभियोजन पक्ष की दलीलों को अधिक महत्व दिया। अदालत की ओर से जारी संक्षिप्त जानकारी में कहा गया कि उपलब्ध साक्ष्यों और जांच रिपोर्टों के आधार पर पूर्व राष्ट्रपति को दोषी पाया गया है। हालांकि फैसले का विस्तृत आदेश अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन सजा की अवधि ने यह स्पष्ट कर दिया कि अदालत ने मामले को बेहद गंभीर माना है।

यून सुक योल के खिलाफ यह पहला बड़ा फैसला नहीं है। इससे पहले फरवरी 2026 में भी एक दक्षिण कोरियाई अदालत ने उन्हें मार्शल लॉ लागू करने की कोशिश से जुड़े मामले में दोषी ठहराया था। उस मामले में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। अदालत ने माना था कि उनका कदम लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक ढांचे के खिलाफ था। बाद में संवैधानिक न्यायालय ने उनके महाभियोग को भी बरकरार रखा, जिसके चलते उन्हें राष्ट्रपति पद छोड़ना पड़ा। यून के पद से हटने के बाद दक्षिण कोरिया में समय से पहले चुनाव कराए गए थे। इन चुनावों में उदारवादी नेता ली जे म्युंग ने जीत हासिल की और देश के नए राष्ट्रपति बने। नई सरकार के आने के बाद कई विवादित फैसलों और सुरक्षा मामलों की समीक्षा शुरू हुई थी। इसी दौरान ड्रोन अभियानों को लेकर भी जांच तेज हुई और कई दस्तावेज सामने आए।

इस वर्ष की शुरुआत में राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने भी ड्रोन संबंधी घटनाओं पर चिंता जताई थी। एक जांच रिपोर्ट में सामने आया था कि सरकारी अधिकारियों ने जनवरी में उत्तर कोरिया की ओर ड्रोन भेजे थे। इस पर राष्ट्रपति ने खेद व्यक्त किया था और कहा था कि ऐसी गतिविधियां क्षेत्रीय शांति को प्रभावित कर सकती हैं। दिलचस्प बात यह रही कि उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने उस बयान को सकारात्मक संकेत बताया था। दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की उम्मीद ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी। उत्तर कोरिया ने बाद में फिर दक्षिण कोरिया को अपना सबसे बड़ा शत्रु बताया और दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण बयानबाजी जारी रही। विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन, निगरानी गतिविधियां और सीमा पार प्रचार अभियान आने वाले समय में भी दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित करते रहेंगे। यून सुक योल के खिलाफ लगातार आ रहे फैसले दक्षिण कोरिया के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होंगे। कभी देश के शीर्ष अभियोजक और बाद में राष्ट्रपति रहे यून का राजनीतिक सफर जिस तरह कानूनी विवादों में उलझा, उसने देश की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया है। अदालत के इस ताजा फैसले के बाद अब निगाहें संभावित अपील प्रक्रिया पर टिकी हैं। यून के समर्थकों का कहना है कि वे फैसले को उच्च अदालत में चुनौती देंगे, जबकि विरोधी दल इसे कानून के शासन की जीत बता रहे हैं। 

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