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सोना-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, निवेशकों में हलचल
बिजनेस डेस्क
चांदी ₹12,655 टूटकर ₹2.33 लाख किलो, सोना ₹5,373 गिरकर ₹1.47 लाख प्रति 10 ग्राम; बाजार में उतार-चढ़ाव जारी
सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर तेज गिरावट देखने को मिली है, जिससे सर्राफा बाजार में हलचल बढ़ गई है। बुधवार, 10 जून 2026 को जारी आंकड़ों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच कीमती धातुओं के दामों में अचानक गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों के लिए यह गिरावट एक बड़ा संकेत मानी जा रही है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना ₹5,373 टूटकर ₹1.47 लाख के स्तर पर आ गया है। वहीं चांदी की कीमतों में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली और 1 किलो चांदी ₹12,655 गिरकर ₹2.33 लाख प्रति किलो पर पहुंच गई है।
पिछले कुछ दिनों में चांदी के दामों में लगातार गिरावट का रुख देखा जा रहा है। 31 मई को जहां चांदी की कीमत ₹2.63 लाख प्रति किलो थी, वहीं अब यह करीब ₹30 हजार तक सस्ती हो चुकी है। इसी अवधि में सोने की कीमतों में भी करीब ₹9 हजार की गिरावट दर्ज की गई है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद निवेशक सुरक्षित संपत्तियों से मुनाफावसूली कर रहे हैं, जिससे कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। मिडिल ईस्ट में तनाव और अमेरिकी आर्थिक संकेतों ने भी इस अस्थिरता को बढ़ाया है। सोने और चांदी की कीमतें आमतौर पर संकट के समय बढ़ती हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति में निवेशकों की रणनीति बदल रही है। कई निवेशक ऊंचे स्तर पर मुनाफा वसूल रहे हैं, जिससे कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
घरेलू बाजार में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब शादी-ब्याह और त्योहारी सीजन की तैयारी भी शुरू हो रही है। आमतौर पर इस समय मांग बढ़ने से कीमतों में मजबूती आती है, लेकिन फिलहाल अंतरराष्ट्रीय दबाव ज्यादा प्रभावी दिखाई दे रहा है। सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि कीमतों में इस तरह की तेज गिरावट से अल्पकालिक खरीदारी बढ़ सकती है। हालांकि, लंबे समय के निवेशक अभी भी बाजार की दिशा को लेकर सतर्क बने हुए हैं। इसी बीच वैश्विक बाजारों में भी सोने-चांदी की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है। डॉलर की मजबूती और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों ने भी कीमती धातुओं पर दबाव बनाया है।
टेक्नोलॉजी सेक्टर से जुड़ी एक बड़ी खबर भी सामने आई है। मेटा और रिलायंस इंडस्ट्रीज भारत में पहला AI-इनेबल्ड डेटा सेंटर बनाने की योजना पर काम कर रही हैं। यह साझेदारी भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा दे सकती है। यह प्रोजेक्ट भारत को डिजिटल इकोनॉमी में एक मजबूत स्थिति दिलाने में मदद करेगा और डेटा प्रोसेसिंग तथा AI सेवाओं में बड़ा बदलाव ला सकता है।
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सोना-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, निवेशकों में हलचल
बिजनेस डेस्क
सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर तेज गिरावट देखने को मिली है, जिससे सर्राफा बाजार में हलचल बढ़ गई है। बुधवार, 10 जून 2026 को जारी आंकड़ों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच कीमती धातुओं के दामों में अचानक गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों के लिए यह गिरावट एक बड़ा संकेत मानी जा रही है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना ₹5,373 टूटकर ₹1.47 लाख के स्तर पर आ गया है। वहीं चांदी की कीमतों में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली और 1 किलो चांदी ₹12,655 गिरकर ₹2.33 लाख प्रति किलो पर पहुंच गई है।
पिछले कुछ दिनों में चांदी के दामों में लगातार गिरावट का रुख देखा जा रहा है। 31 मई को जहां चांदी की कीमत ₹2.63 लाख प्रति किलो थी, वहीं अब यह करीब ₹30 हजार तक सस्ती हो चुकी है। इसी अवधि में सोने की कीमतों में भी करीब ₹9 हजार की गिरावट दर्ज की गई है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद निवेशक सुरक्षित संपत्तियों से मुनाफावसूली कर रहे हैं, जिससे कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। मिडिल ईस्ट में तनाव और अमेरिकी आर्थिक संकेतों ने भी इस अस्थिरता को बढ़ाया है। सोने और चांदी की कीमतें आमतौर पर संकट के समय बढ़ती हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति में निवेशकों की रणनीति बदल रही है। कई निवेशक ऊंचे स्तर पर मुनाफा वसूल रहे हैं, जिससे कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
घरेलू बाजार में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब शादी-ब्याह और त्योहारी सीजन की तैयारी भी शुरू हो रही है। आमतौर पर इस समय मांग बढ़ने से कीमतों में मजबूती आती है, लेकिन फिलहाल अंतरराष्ट्रीय दबाव ज्यादा प्रभावी दिखाई दे रहा है। सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि कीमतों में इस तरह की तेज गिरावट से अल्पकालिक खरीदारी बढ़ सकती है। हालांकि, लंबे समय के निवेशक अभी भी बाजार की दिशा को लेकर सतर्क बने हुए हैं। इसी बीच वैश्विक बाजारों में भी सोने-चांदी की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है। डॉलर की मजबूती और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों ने भी कीमती धातुओं पर दबाव बनाया है।
टेक्नोलॉजी सेक्टर से जुड़ी एक बड़ी खबर भी सामने आई है। मेटा और रिलायंस इंडस्ट्रीज भारत में पहला AI-इनेबल्ड डेटा सेंटर बनाने की योजना पर काम कर रही हैं। यह साझेदारी भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा दे सकती है। यह प्रोजेक्ट भारत को डिजिटल इकोनॉमी में एक मजबूत स्थिति दिलाने में मदद करेगा और डेटा प्रोसेसिंग तथा AI सेवाओं में बड़ा बदलाव ला सकता है।
