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मोदी नेतृत्व के 12 वर्ष राष्ट्र निर्माण की एक युगान्तरकारी यात्रा
Digital Desk
भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे हैं, जिनके नेतृत्व से राष्ट्र निर्माण को एक नवीन दिशा मिली है और भारत ने विकास एवं प्रगति की ऊंचाइयों को स्पर्श किया है। विगत बारह वर्षों में भारत एक ऐसे ही प्रभावी नेतृत्व का अनुभव कर रहा है। यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी का नेतृत्व। मोदी जी के नेतृत्व का यह कालखंड एक ऐसे राष्ट्रीय पुनर्जागरण का अध्याय है, जिसमें आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता, सांस्कृतिक गौरव, राष्ट्रीय प्रगति और वैश्विक प्रतिष्ठा का अद्वितीय संगम दिखाई देता है।
श्रीमद्भगवद्गीता कहती है:-
तस्मादसक्तः सततं कार्यं कर्म समाचर।
असक्तो ह्याचरन् कर्म परमाप्नोति पुरुषः।।
— श्रीमद्भगवद्गीता - 3/19
अर्थात् : "आसक्ति रहित होकर निरंतर अपने कर्तव्य का पालन करने वाला पुरुष ही श्रेष्ठता प्राप्त करता है।"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आसक्ति रहित और बिना किसी अपेक्षा के प्रधानमंत्री के रूप में विगत बारह वर्षों से राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं। मोदी जी के सार्वजनिक जीवन की सबसे बड़ी विशेषता उनकी ‘राष्ट्र प्रथम’ की नीति रही है। उनकी नीतियों, निर्णयों, योजनाओं और उनकी कार्यशैली में राष्ट्रहित सर्वोपरि दिखाई देता है। उन्होंने राजनीति को हमेशा राष्ट्र सेवा का माध्यम माना है और यही कारण है कि उनका प्रत्येक कदम, उनका प्रत्येक निर्णय निरंतर भारत को सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्रित रहा है। उनका जीवन संघर्ष, अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रवाद की प्रेरक गाथा है। अत्यंत साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का नेतृत्व करना, भारत की महान लोकतांत्रिक प्रणाली की जीवंत शक्ति का प्रमाण है।
प्रधानमंत्री मोदी की कार्यशैली उन्हें समकालीन वैश्विक नेतृत्व में विशिष्ट स्थान प्रदान करती है। वे निरंतर काम करने वाले, सूक्ष्मतम विवरणों पर ध्यान देने वाले और परिणामोन्मुखी नेतृत्व के प्रतीक माने जाते हैं। उनके व्यक्तित्व में आधुनिक प्रशासनिक दक्षता और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति सम्मान एक साथ परिलक्षित होते हैं। उनकी जीवनशैली, अनुशासन, निर्णय क्षमता और कार्य के प्रति उनका समर्पण युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। राष्ट्र के समक्ष उन्होंने स्वयं को 'प्रधान सेवक' के रूप में प्रस्तुत किया है, जो लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व की भावना को सशक्त बनाता है।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले बारह वर्षों में भारत ने अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय परिवर्तन देखे हैं। आधारभूत संरचना का विस्तार, डिजिटल क्रांति, वित्तीय समावेशन, स्वच्छता, ग्रामीण विकास, ऊर्जा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में व्यापक प्रयास हुए हैं। सड़क, रेल, हवाई अड्डे, बंदरगाह और डिजिटल नेटवर्क जैसे क्षेत्रों में तीव्र गति से हुए विकास ने भारत की आर्थिक क्षमता को नई ऊर्जा प्रदान की है।
प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना, उज्ज्वला योजना, जनधन योजना, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन जैसी अनेक योजनाओं के द्वारा आम आदमी के जीवन में आमूलचूल परिवर्तन हुआ है, और समाज की दिशा बदली है। मोदी जी के नेतृत्व में भारत की सैन्य शक्ति सशक्त हुई है, जिसका प्रमाण हम लगातार देख रहे हैं। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 की समाप्ति राष्ट्रीय एकता की दिशा में ऐतिहासिक कदम है, जो मोदी युग को एक अद्वितीय पहचान दिलाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ को राष्ट्रीय आत्मविश्वास के अभियान के रूप में प्रस्तुत किया है, जिसका उद्देश्य भारत को उत्पादन, नवाचार, कौशल और उद्यमिता के क्षेत्र में एक वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करना है।
यह दृष्टि भारतीय युवा पीढ़ी, उद्यमियों, किसानों, महिलाओं, नवप्रवर्तकों को नए अवसर प्रदान करने का प्रयास करती है। आत्मनिर्भरता का यह विचार स्वदेशी क्षमता, स्थानीय संसाधनों और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा सकता है।
शास्त्रों में कहा गया है—
संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्।
देवा भागं यथा पूर्वे संजानाना उपासते।।
— ऋग्वेद
अर्थात् : "साथ चलो, साथ सोचो और एक मन होकर राष्ट्र का निर्माण करो।"
इसी भावना को हृदय में रखकर प्रधानमंत्री मोदी ‘सबका साथ, सबका विकास’ के विचार के साथ राष्ट्र निर्माण के पुनीत कार्य में लगे हुए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत के प्रति वैश्विक सम्मान बढ़ा है। उन्होंने वैश्विक मंच पर भारतीय संस्कृति, योग, आयुर्वेद, अध्यात्म और सनातन परंपराओं को व्यापक पहचान दिलाई है। इससे नई पीढ़ी में अपने सांस्कृतिक गौरव और अपनी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति विश्वास और सम्मान की भावना विकसित हुई है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण भारत में मोदी युग के सांस्कृतिक पुनरुत्थान का जीवंत उदाहरण है।
पिछले बारह वर्षों में भारत की वैश्विक उपस्थिति और प्रभाव में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की आवाज प्रभावशाली रूप से स्थापित हुई है। माननीय मोदी के नेतृत्व में आज भारत को एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में देखा जाता है।
शास्त्र कहते हैं—
प्रजासुखं राज्ञः प्रजानां च हिते हितम्।
नात्मप्रियं हितं राज्ञः प्रजानां तु प्रियं हितम्।।
— अर्थशास्त्र
अर्थात् : "राजा का सुख प्रजा के सुख में है और उसका हित प्रजा के हित में निहित है।"
कौटिल्य के इसी आदर्श के अनुरूप प्रधानमंत्री मोदी एक जन-नेता और प्रेरणा-पुरुष के रूप में राष्ट्र के सामने उपस्थित हुए हैं। मोदी जी की सबसे बड़ी शक्ति जनता से उनका प्रत्यक्ष संवाद माना जाता है। वे करोड़ों भारतीयों की आकांक्षाओं, आशाओं और सपनों से स्वयं को जोड़ने का प्रयास करते हैं। उनकी 'मन की बात' हर भारतीय के हृदय में आत्मिक प्रेरणा का प्रवाह करती है।
श्रीमद्भगवद्गीता कहती है—
यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः।
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते।।
— श्रीमद्भगवद्गीता - 3/21
अर्थात् : "श्रेष्ठ पुरुष जो आचरण करते हैं, सामान्य व्यक्ति उसी का अनुसरण करते हैं। वे अपने अनुकरणीय कार्यों से जो आदर्श प्रस्तुत करते हैं, संपूर्ण विश्व उसका अनुसरण करता है।"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के बारह वर्ष भारतीय लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण यात्रा के रूप में देखे जा सकते हैं। इन बारह वर्षों में उन्होंने केवल भारत का ही नेतृत्व नहीं किया, बल्कि वैश्विक नेतृत्व और राजनीति को भी एक नई दिशा दी है। बारह वर्ष का यह कालखंड, विकास, आत्मनिर्भरता, सुशासन, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय आत्मविश्वास को सुदृढ़ करने की एक राष्ट्रीय अभिलाषा का प्रतीक है। उनका व्यक्तित्व कर्मयोग, राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और समर्पण का प्रतीक है। 'राष्ट्र सर्वोपरि' की भावना उनके सार्वजनिक जीवन की मूल प्रेरणा रही है। उनके नेतृत्व के इन बारह वर्षों का कालखंड भारत के आत्मविश्वास, आकांक्षा, लोककल्याण और नवोदय की एक अविस्मरणीय और युगान्तरकारी यात्रा है।
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मोदी नेतृत्व के 12 वर्ष राष्ट्र निर्माण की एक युगान्तरकारी यात्रा
Digital Desk
श्रीमद्भगवद्गीता कहती है:-
तस्मादसक्तः सततं कार्यं कर्म समाचर।
असक्तो ह्याचरन् कर्म परमाप्नोति पुरुषः।।
— श्रीमद्भगवद्गीता - 3/19
अर्थात् : "आसक्ति रहित होकर निरंतर अपने कर्तव्य का पालन करने वाला पुरुष ही श्रेष्ठता प्राप्त करता है।"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आसक्ति रहित और बिना किसी अपेक्षा के प्रधानमंत्री के रूप में विगत बारह वर्षों से राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं। मोदी जी के सार्वजनिक जीवन की सबसे बड़ी विशेषता उनकी ‘राष्ट्र प्रथम’ की नीति रही है। उनकी नीतियों, निर्णयों, योजनाओं और उनकी कार्यशैली में राष्ट्रहित सर्वोपरि दिखाई देता है। उन्होंने राजनीति को हमेशा राष्ट्र सेवा का माध्यम माना है और यही कारण है कि उनका प्रत्येक कदम, उनका प्रत्येक निर्णय निरंतर भारत को सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्रित रहा है। उनका जीवन संघर्ष, अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रवाद की प्रेरक गाथा है। अत्यंत साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का नेतृत्व करना, भारत की महान लोकतांत्रिक प्रणाली की जीवंत शक्ति का प्रमाण है।
प्रधानमंत्री मोदी की कार्यशैली उन्हें समकालीन वैश्विक नेतृत्व में विशिष्ट स्थान प्रदान करती है। वे निरंतर काम करने वाले, सूक्ष्मतम विवरणों पर ध्यान देने वाले और परिणामोन्मुखी नेतृत्व के प्रतीक माने जाते हैं। उनके व्यक्तित्व में आधुनिक प्रशासनिक दक्षता और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति सम्मान एक साथ परिलक्षित होते हैं। उनकी जीवनशैली, अनुशासन, निर्णय क्षमता और कार्य के प्रति उनका समर्पण युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। राष्ट्र के समक्ष उन्होंने स्वयं को 'प्रधान सेवक' के रूप में प्रस्तुत किया है, जो लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व की भावना को सशक्त बनाता है।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले बारह वर्षों में भारत ने अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय परिवर्तन देखे हैं। आधारभूत संरचना का विस्तार, डिजिटल क्रांति, वित्तीय समावेशन, स्वच्छता, ग्रामीण विकास, ऊर्जा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में व्यापक प्रयास हुए हैं। सड़क, रेल, हवाई अड्डे, बंदरगाह और डिजिटल नेटवर्क जैसे क्षेत्रों में तीव्र गति से हुए विकास ने भारत की आर्थिक क्षमता को नई ऊर्जा प्रदान की है।
प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना, उज्ज्वला योजना, जनधन योजना, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन जैसी अनेक योजनाओं के द्वारा आम आदमी के जीवन में आमूलचूल परिवर्तन हुआ है, और समाज की दिशा बदली है। मोदी जी के नेतृत्व में भारत की सैन्य शक्ति सशक्त हुई है, जिसका प्रमाण हम लगातार देख रहे हैं। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 की समाप्ति राष्ट्रीय एकता की दिशा में ऐतिहासिक कदम है, जो मोदी युग को एक अद्वितीय पहचान दिलाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ को राष्ट्रीय आत्मविश्वास के अभियान के रूप में प्रस्तुत किया है, जिसका उद्देश्य भारत को उत्पादन, नवाचार, कौशल और उद्यमिता के क्षेत्र में एक वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करना है।
यह दृष्टि भारतीय युवा पीढ़ी, उद्यमियों, किसानों, महिलाओं, नवप्रवर्तकों को नए अवसर प्रदान करने का प्रयास करती है। आत्मनिर्भरता का यह विचार स्वदेशी क्षमता, स्थानीय संसाधनों और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा सकता है।
शास्त्रों में कहा गया है—
संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्।
देवा भागं यथा पूर्वे संजानाना उपासते।।
— ऋग्वेद
अर्थात् : "साथ चलो, साथ सोचो और एक मन होकर राष्ट्र का निर्माण करो।"
इसी भावना को हृदय में रखकर प्रधानमंत्री मोदी ‘सबका साथ, सबका विकास’ के विचार के साथ राष्ट्र निर्माण के पुनीत कार्य में लगे हुए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत के प्रति वैश्विक सम्मान बढ़ा है। उन्होंने वैश्विक मंच पर भारतीय संस्कृति, योग, आयुर्वेद, अध्यात्म और सनातन परंपराओं को व्यापक पहचान दिलाई है। इससे नई पीढ़ी में अपने सांस्कृतिक गौरव और अपनी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति विश्वास और सम्मान की भावना विकसित हुई है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण भारत में मोदी युग के सांस्कृतिक पुनरुत्थान का जीवंत उदाहरण है।
पिछले बारह वर्षों में भारत की वैश्विक उपस्थिति और प्रभाव में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की आवाज प्रभावशाली रूप से स्थापित हुई है। माननीय मोदी के नेतृत्व में आज भारत को एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में देखा जाता है।
शास्त्र कहते हैं—
प्रजासुखं राज्ञः प्रजानां च हिते हितम्।
नात्मप्रियं हितं राज्ञः प्रजानां तु प्रियं हितम्।।
— अर्थशास्त्र
अर्थात् : "राजा का सुख प्रजा के सुख में है और उसका हित प्रजा के हित में निहित है।"
कौटिल्य के इसी आदर्श के अनुरूप प्रधानमंत्री मोदी एक जन-नेता और प्रेरणा-पुरुष के रूप में राष्ट्र के सामने उपस्थित हुए हैं। मोदी जी की सबसे बड़ी शक्ति जनता से उनका प्रत्यक्ष संवाद माना जाता है। वे करोड़ों भारतीयों की आकांक्षाओं, आशाओं और सपनों से स्वयं को जोड़ने का प्रयास करते हैं। उनकी 'मन की बात' हर भारतीय के हृदय में आत्मिक प्रेरणा का प्रवाह करती है।
श्रीमद्भगवद्गीता कहती है—
यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः।
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते।।
— श्रीमद्भगवद्गीता - 3/21
अर्थात् : "श्रेष्ठ पुरुष जो आचरण करते हैं, सामान्य व्यक्ति उसी का अनुसरण करते हैं। वे अपने अनुकरणीय कार्यों से जो आदर्श प्रस्तुत करते हैं, संपूर्ण विश्व उसका अनुसरण करता है।"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के बारह वर्ष भारतीय लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण यात्रा के रूप में देखे जा सकते हैं। इन बारह वर्षों में उन्होंने केवल भारत का ही नेतृत्व नहीं किया, बल्कि वैश्विक नेतृत्व और राजनीति को भी एक नई दिशा दी है। बारह वर्ष का यह कालखंड, विकास, आत्मनिर्भरता, सुशासन, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय आत्मविश्वास को सुदृढ़ करने की एक राष्ट्रीय अभिलाषा का प्रतीक है। उनका व्यक्तित्व कर्मयोग, राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और समर्पण का प्रतीक है। 'राष्ट्र सर्वोपरि' की भावना उनके सार्वजनिक जीवन की मूल प्रेरणा रही है। उनके नेतृत्व के इन बारह वर्षों का कालखंड भारत के आत्मविश्वास, आकांक्षा, लोककल्याण और नवोदय की एक अविस्मरणीय और युगान्तरकारी यात्रा है।
