- Hindi News
- बिजनेस
- अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों से शेयर बाजार में गिरावट
अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों से शेयर बाजार में गिरावट
बिजनेस डेस्क
सेंसेक्स और निफ्टी शुरुआती कारोबार में लुढ़के, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अमेरिकी महंगाई ने बढ़ाई चिंता
भारतीय शेयर बाजार गुरुवार, 11 जून 2026 को शुरुआती कारोबार में दबाव में नजर आया, जब वैश्विक बाजारों में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसका सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी पर देखने को मिला। सुबह के सत्र में बीएसई सेंसेक्स 358.54 अंक गिरकर 73,624.64 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 117 अंक टूटकर 23,098.30 पर कारोबार करता दिखा। बाजार में यह गिरावट लगातार विदेशी निवेशकों की बिकवाली और ग्लोबल आर्थिक संकेतों की कमजोरी के कारण देखने को मिली।
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ रही है। बुधवार को ही FIIs ने करीब 2,124 करोड़ रुपये से अधिक की इक्विटी बेच दी थी, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया। अमेरिका की तरफ से ईरान से जुड़े ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की खबरों ने वैश्विक स्तर पर तनाव को और बढ़ा दिया है। इससे कच्चे तेल के बाजार में तेजी देखी गई है और ब्रेंट क्रूड 1.70 प्रतिशत बढ़कर 94.68 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। तेल की कीमतों में यह उछाल भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।
शेयर बाजार के शुरुआती कारोबार में आईटी सेक्टर के शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। HCL Tech, Infosys, Tech Mahindra, TCS, Eternal और Trent जैसे प्रमुख शेयर गिरावट में रहे। वहीं दूसरी ओर कुछ बैंकिंग और एविएशन स्टॉक्स में हल्की खरीदारी देखने को मिली, जिनमें ICICI Bank, Bharti Airtel और InterGlobe Aviation शामिल रहे। वैश्विक बाजारों में भी इसी तरह का कमजोर रुख देखा गया। जापान का निक्केई, दक्षिण कोरिया का कोस्पी, चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग सभी में गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी बाजार पहले ही बुधवार को बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए थे, जहां डॉव जोंस 950 अंकों से ज्यादा गिर गया था।
भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई का मिश्रित असर निवेशकों के मूड को प्रभावित कर रहा है। अमेरिकी महंगाई दर में बढ़ोतरी ने यह संकेत दिया है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं, जिससे वैश्विक निवेश प्रवाह प्रभावित हो रहा है। भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। इससे न केवल महंगाई बढ़ने का खतरा है, बल्कि रुपये पर दबाव, कंपनियों के मुनाफे में गिरावट और राजकोषीय घाटे पर भी असर पड़ सकता है।
बुधवार को बाजार ने अंत में कुछ रिकवरी दिखाई थी और सेंसेक्स 64 अंक की मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ था, लेकिन गुरुवार की शुरुआत ने फिर से निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। निफ्टी भी हल्की गिरावट के साथ बंद हुआ था, जिससे बाजार की अनिश्चितता साफ दिखाई देती है। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति स्थिर नहीं होती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। खासकर तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भारतीय बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों से शेयर बाजार में गिरावट
बिजनेस डेस्क
भारतीय शेयर बाजार गुरुवार, 11 जून 2026 को शुरुआती कारोबार में दबाव में नजर आया, जब वैश्विक बाजारों में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसका सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी पर देखने को मिला। सुबह के सत्र में बीएसई सेंसेक्स 358.54 अंक गिरकर 73,624.64 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 117 अंक टूटकर 23,098.30 पर कारोबार करता दिखा। बाजार में यह गिरावट लगातार विदेशी निवेशकों की बिकवाली और ग्लोबल आर्थिक संकेतों की कमजोरी के कारण देखने को मिली।
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ रही है। बुधवार को ही FIIs ने करीब 2,124 करोड़ रुपये से अधिक की इक्विटी बेच दी थी, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया। अमेरिका की तरफ से ईरान से जुड़े ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की खबरों ने वैश्विक स्तर पर तनाव को और बढ़ा दिया है। इससे कच्चे तेल के बाजार में तेजी देखी गई है और ब्रेंट क्रूड 1.70 प्रतिशत बढ़कर 94.68 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। तेल की कीमतों में यह उछाल भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।
शेयर बाजार के शुरुआती कारोबार में आईटी सेक्टर के शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। HCL Tech, Infosys, Tech Mahindra, TCS, Eternal और Trent जैसे प्रमुख शेयर गिरावट में रहे। वहीं दूसरी ओर कुछ बैंकिंग और एविएशन स्टॉक्स में हल्की खरीदारी देखने को मिली, जिनमें ICICI Bank, Bharti Airtel और InterGlobe Aviation शामिल रहे। वैश्विक बाजारों में भी इसी तरह का कमजोर रुख देखा गया। जापान का निक्केई, दक्षिण कोरिया का कोस्पी, चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग सभी में गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी बाजार पहले ही बुधवार को बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए थे, जहां डॉव जोंस 950 अंकों से ज्यादा गिर गया था।
भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई का मिश्रित असर निवेशकों के मूड को प्रभावित कर रहा है। अमेरिकी महंगाई दर में बढ़ोतरी ने यह संकेत दिया है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं, जिससे वैश्विक निवेश प्रवाह प्रभावित हो रहा है। भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। इससे न केवल महंगाई बढ़ने का खतरा है, बल्कि रुपये पर दबाव, कंपनियों के मुनाफे में गिरावट और राजकोषीय घाटे पर भी असर पड़ सकता है।
बुधवार को बाजार ने अंत में कुछ रिकवरी दिखाई थी और सेंसेक्स 64 अंक की मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ था, लेकिन गुरुवार की शुरुआत ने फिर से निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। निफ्टी भी हल्की गिरावट के साथ बंद हुआ था, जिससे बाजार की अनिश्चितता साफ दिखाई देती है। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति स्थिर नहीं होती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। खासकर तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भारतीय बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
