लीबिया में गद्दाफी के बेटे सैफ अल-इस्लाम की गोली मारकर हत्या, राजनीतिक भविष्य पर फिरा पानी

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घर में घुसकर हमला, चार हथियारबंद हमलावरों ने की हत्या; राष्ट्रपति चुनाव की तैयारी कर रहे थे सैफ अल-इस्लाम

त्रिपोली। लीबिया के पूर्व तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी के बेटे और विवादित राजनेता सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी की मंगलवार को गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना पश्चिमी लीबिया के जिंटान शहर में उनके आवास पर हुई, जहां चार हथियारबंद हमलावरों ने घर में घुसकर उन पर फायरिंग की। सैफ अल-इस्लाम की उम्र 53 वर्ष थी। वे आने वाले समय में राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे।

हमला अचानक और सुनियोजित तरीके से किया गया। घटना के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए। फिलहाल उनकी पहचान या हमले के पीछे के मकसद को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। सैफ अल-इस्लाम के वकील खालिद अल-जैदी और राजनीतिक सलाहकार अब्दुल्ला ओथमान ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उनकी मौत की पुष्टि की।

हालांकि, मामले को लेकर विरोधाभासी दावे भी सामने आए हैं। सैफ की बहन ने दावा किया कि उनकी मौत लीबिया-अल्जीरिया सीमा के पास हुई। BBC ने लीबियाई टेलीविजन सूत्रों के हवाले से इस दावे का उल्लेख किया है। लीबियाई प्रशासन की ओर से अभी तक कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है।

सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी को लंबे समय तक अपने पिता मुअम्मर गद्दाफी का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता रहा। उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से शिक्षा प्राप्त की थी और 2000 के दशक में खुद को सुधारवादी नेता के रूप में प्रस्तुत किया। पश्चिमी देशों से रिश्ते सुधारने में उनकी भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा रही।

2011 में अरब स्प्रिंग के दौरान हुए विद्रोह में उन्होंने अपने पिता का खुला समर्थन किया था। उस समय उनके भाषणों और चेतावनियों ने उन्हें विद्रोहियों की नजर में प्रमुख दुश्मन बना दिया। गद्दाफी शासन के पतन के बाद नवंबर 2011 में सैफ को जिंटान की मिलिशिया ने गिरफ्तार किया। 2015 में लीबियाई अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई, हालांकि उन्हें अदालत में पेश नहीं किया गया था।

अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) ने उन पर युद्ध अपराधों के आरोप लगाए थे। 2017 में एक आम माफी के तहत उन्हें रिहा कर दिया गया। इसके बाद वे लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन से दूर रहे, लेकिन 2021 में उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की घोषणा कर ली थी। कानूनी विवादों के बावजूद अदालत से राहत मिलने के बाद उनकी उम्मीदवारी बहाल हुई, हालांकि चुनाव टल गए।

विशेषज्ञों के अनुसार, सैफ अल-इस्लाम की हत्या लीबिया की पहले से अस्थिर राजनीतिक स्थिति को और जटिल बना सकती है। यह घटना देश में सत्ता संघर्ष, मिलिशिया प्रभाव और कानून व्यवस्था की कमजोरी को एक बार फिर उजागर करती है। मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इसके राजनीतिक असर स्पष्ट होने की संभावना है।

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www.dainikjagranmpcg.com
04 Feb 2026 By Nitin Trivedi

लीबिया में गद्दाफी के बेटे सैफ अल-इस्लाम की गोली मारकर हत्या, राजनीतिक भविष्य पर फिरा पानी

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त्रिपोली। लीबिया के पूर्व तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी के बेटे और विवादित राजनेता सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी की मंगलवार को गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना पश्चिमी लीबिया के जिंटान शहर में उनके आवास पर हुई, जहां चार हथियारबंद हमलावरों ने घर में घुसकर उन पर फायरिंग की। सैफ अल-इस्लाम की उम्र 53 वर्ष थी। वे आने वाले समय में राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे।

हमला अचानक और सुनियोजित तरीके से किया गया। घटना के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए। फिलहाल उनकी पहचान या हमले के पीछे के मकसद को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। सैफ अल-इस्लाम के वकील खालिद अल-जैदी और राजनीतिक सलाहकार अब्दुल्ला ओथमान ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उनकी मौत की पुष्टि की।

हालांकि, मामले को लेकर विरोधाभासी दावे भी सामने आए हैं। सैफ की बहन ने दावा किया कि उनकी मौत लीबिया-अल्जीरिया सीमा के पास हुई। BBC ने लीबियाई टेलीविजन सूत्रों के हवाले से इस दावे का उल्लेख किया है। लीबियाई प्रशासन की ओर से अभी तक कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है।

सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी को लंबे समय तक अपने पिता मुअम्मर गद्दाफी का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता रहा। उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से शिक्षा प्राप्त की थी और 2000 के दशक में खुद को सुधारवादी नेता के रूप में प्रस्तुत किया। पश्चिमी देशों से रिश्ते सुधारने में उनकी भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा रही।

2011 में अरब स्प्रिंग के दौरान हुए विद्रोह में उन्होंने अपने पिता का खुला समर्थन किया था। उस समय उनके भाषणों और चेतावनियों ने उन्हें विद्रोहियों की नजर में प्रमुख दुश्मन बना दिया। गद्दाफी शासन के पतन के बाद नवंबर 2011 में सैफ को जिंटान की मिलिशिया ने गिरफ्तार किया। 2015 में लीबियाई अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई, हालांकि उन्हें अदालत में पेश नहीं किया गया था।

अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) ने उन पर युद्ध अपराधों के आरोप लगाए थे। 2017 में एक आम माफी के तहत उन्हें रिहा कर दिया गया। इसके बाद वे लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन से दूर रहे, लेकिन 2021 में उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की घोषणा कर ली थी। कानूनी विवादों के बावजूद अदालत से राहत मिलने के बाद उनकी उम्मीदवारी बहाल हुई, हालांकि चुनाव टल गए।

विशेषज्ञों के अनुसार, सैफ अल-इस्लाम की हत्या लीबिया की पहले से अस्थिर राजनीतिक स्थिति को और जटिल बना सकती है। यह घटना देश में सत्ता संघर्ष, मिलिशिया प्रभाव और कानून व्यवस्था की कमजोरी को एक बार फिर उजागर करती है। मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इसके राजनीतिक असर स्पष्ट होने की संभावना है।

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