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अरब सागर में बढ़ा तनाव: अमेरिकी नौसेना ने ईरानी ड्रोन को मार गिराया
अंतराष्ट्रीय न्यूज
USS अब्राहम लिंकन के करीब पहुंचा था शाहेद-139, F-35C फाइटर जेट से किया गया नष्ट
दुबई। अरब सागर में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। अमेरिकी नौसेना ने मंगलवार को एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया, जो न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन के काफी नजदीक पहुंच गया था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इसे आत्मरक्षा में उठाया गया जरूरी कदम बताया है।
रॉयटर्स के अनुसार, मार गिराया गया ड्रोन ईरान का शाहेद-139 था। CENTCOM ने अपने बयान में कहा कि ड्रोन ने अमेरिकी चेतावनियों और नॉन-लेथल डिफ्यूजन उपायों के बावजूद अपनी उड़ान दिशा नहीं बदली। इसके बाद USS अब्राहम लिंकन पर तैनात F-35C फाइटर जेट से उसे हवा में ही नष्ट कर दिया गया।
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई किसी उकसावे के तहत नहीं बल्कि वॉरशिप और उस पर सवार कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई। CENTCOM ने ईरान के इस कदम को “आक्रामक व्यवहार” करार दिया है। फिलहाल यह साफ नहीं हो सका है कि ड्रोन को किस मिशन के तहत तैनात किया गया था।
इस घटना पर ईरान की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, हाल के हफ्तों में तेहरान लगातार अपनी ड्रोन क्षमता को लेकर बयान देता रहा है। 30 जनवरी को ईरान ने दावा किया था कि उसने जमीन और समुद्र से हमले में सक्षम करीब 1000 ड्रोन तैयार कर लिए हैं। ईरानी सैन्य नेतृत्व का कहना है कि ये ड्रोन संभावित अमेरिकी या इजराइली हमलों को रोकने में सक्षम हैं।
ड्रोन गिराए जाने की यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक स्तर पर संपर्क बहाल करने की कोशिशें भी चल रही हैं। 6 फरवरी को तुर्किये में दोनों देशों से जुड़े वरिष्ठ प्रतिनिधियों की एक अहम बैठक प्रस्तावित है। क्षेत्रीय सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में अमेरिका, ईरान के अलावा तुर्किये, कतर और मिस्र जैसे देशों के अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पहले ही ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त चेतावनी दे चुके हैं। उन्होंने कहा है कि यदि समझौता नहीं हुआ तो ईरान को “गंभीर परिणाम” भुगतने पड़ सकते हैं। इसके जवाब में ईरान बार-बार यह दोहराता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल ऊर्जा जरूरतों के लिए है, न कि हथियार बनाने के लिए।
रणनीतिक जानकारों के मुताबिक, अरब सागर में यह घटना मिडिल ईस्ट की पहले से अस्थिर सुरक्षा स्थिति को और जटिल बना सकती है। अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य तैनाती पहले ही बढ़ा रखी है, जिसमें कई एयरक्राफ्ट कैरियर और मिसाइल डिफेंस से लैस युद्धपोत शामिल हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ड्रोन गिराए जाने की इस कार्रवाई का कूटनीतिक वार्ताओं और क्षेत्रीय संतुलन पर क्या असर पड़ता है।
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