‘ग्लोबल ऑर्डर मर चुका है’, अमेरिका और चीन पर तीखा हमला: इटली के पूर्व PM मारियो द्रागी की चेतावनी

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ब्रसेल्स में बोले द्रागी— अमेरिका फायदे भूलकर खर्च गिनाता है, चीन सस्ते माल से दुनिया पर दबाव बना रहा

इटली के पूर्व प्रधानमंत्री और यूरोप के वरिष्ठ आर्थिक रणनीतिकार मारियो द्रागी ने मौजूदा वैश्विक व्यवस्था को लेकर कड़ा बयान देते हुए कहा है कि “ग्लोबल ऑर्डर अब जीवित नहीं रहा।” उन्होंने चेतावनी दी कि दुनिया जिस आर्थिक और राजनीतिक संतुलन पर दशकों से टिकी थी, वह टूट चुका है और असली खतरा यह है कि उसकी जगह क्या लेगा।

यह बयान द्रागी ने बेल्जियम की ल्यूवेन यूनिवर्सिटी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक आर्थिक व्यवस्था के बिखरने की आशंका जताने वाले लोग गलत नहीं हैं, लेकिन उससे भी ज्यादा चिंताजनक यह है कि नई व्यवस्था कैसी होगी और किसके नियमों पर चलेगी।

द्रागी ने अमेरिका और चीन—दोनों पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब खुद को वैश्विक व्यवस्था का लाभार्थी मानने के बजाय यह गिनाने लगा है कि उसने दुनिया के लिए कितना खर्च किया। उनके मुताबिक, वॉशिंगटन यह भूल रहा है कि खुली वैश्विक व्यवस्था से उसे रणनीतिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से कितना फायदा मिला।

चीन को लेकर द्रागी और भी सख्त दिखे। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन वैश्विक सप्लाई चेन के अहम हिस्सों पर नियंत्रण रखता है और इसी ताकत का इस्तेमाल बाजारों में सस्ता माल डंप करने, जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति रोकने और अपनी आर्थिक समस्याओं का बोझ दूसरे देशों पर डालने के लिए करता है।

पूर्व प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी कि इन हालात में यूरोप सबसे ज्यादा जोखिम में है। उनके अनुसार, अगर यूरोपीय देश एकजुट नहीं हुए तो महाद्वीप अंदर से कमजोर और बंटा हुआ दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि व्यापार, मुद्रा और प्रतिस्पर्धा के मामलों में यूरोप ने जब एकजुट होकर काम किया, तब वह वैश्विक ताकत बना, लेकिन रक्षा, उद्योग और विदेश नीति में बिखराव उसकी सबसे बड़ी कमजोरी है।

द्रागी ने स्पष्ट कहा कि जब व्यापार और सुरक्षा आपस में जुड़ जाते हैं, तब यूरोप की कमजोरियां उसकी आर्थिक ताकत को भी बेअसर कर देती हैं। अगर यूरोप पैसे और बाजार में तो एक है, लेकिन सुरक्षा और सैन्य मामलों में बंटा हुआ है, तो उसकी आर्थिक शक्ति को उसके खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है—और आज यही हो रहा है।

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की हालिया बयानबाजी का जिक्र करते हुए द्रागी ने कहा कि इसने यूरोप की प्रतिक्रिया क्षमता को उजागर कर दिया है। उनके मुताबिक, खतरे के सामने मजबूत और सीधा जवाब ज्यादा असरदार होता है, बजाय लंबे कूटनीतिक बयानों के।

द्रागी के बयान ऐसे समय आए हैं जब यूरोपीय देशों में अमेरिका की नीतियों को लेकर असहजता बढ़ रही है। NATO, टैरिफ और ग्रीनलैंड जैसे मुद्दों पर अमेरिकी रुख ने यूरोपीय सहयोगियों का भरोसा कमजोर किया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि द्रागी की यह चेतावनी यूरोप के लिए आत्ममंथन का संकेत है।

उन्होंने अंत में कहा कि अगर यूरोप को अपनी सीमाओं, लोकतंत्र और आर्थिक स्वतंत्रता की रक्षा करनी है, तो उसे एक ढीले समूह की तरह नहीं, बल्कि एक मजबूत और निर्णायक यूनियन की तरह काम करना होगा।

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www.dainikjagranmpcg.com
04 Feb 2026 By Nitin Trivedi

‘ग्लोबल ऑर्डर मर चुका है’, अमेरिका और चीन पर तीखा हमला: इटली के पूर्व PM मारियो द्रागी की चेतावनी

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इटली के पूर्व प्रधानमंत्री और यूरोप के वरिष्ठ आर्थिक रणनीतिकार मारियो द्रागी ने मौजूदा वैश्विक व्यवस्था को लेकर कड़ा बयान देते हुए कहा है कि “ग्लोबल ऑर्डर अब जीवित नहीं रहा।” उन्होंने चेतावनी दी कि दुनिया जिस आर्थिक और राजनीतिक संतुलन पर दशकों से टिकी थी, वह टूट चुका है और असली खतरा यह है कि उसकी जगह क्या लेगा।

यह बयान द्रागी ने बेल्जियम की ल्यूवेन यूनिवर्सिटी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक आर्थिक व्यवस्था के बिखरने की आशंका जताने वाले लोग गलत नहीं हैं, लेकिन उससे भी ज्यादा चिंताजनक यह है कि नई व्यवस्था कैसी होगी और किसके नियमों पर चलेगी।

द्रागी ने अमेरिका और चीन—दोनों पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब खुद को वैश्विक व्यवस्था का लाभार्थी मानने के बजाय यह गिनाने लगा है कि उसने दुनिया के लिए कितना खर्च किया। उनके मुताबिक, वॉशिंगटन यह भूल रहा है कि खुली वैश्विक व्यवस्था से उसे रणनीतिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से कितना फायदा मिला।

चीन को लेकर द्रागी और भी सख्त दिखे। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन वैश्विक सप्लाई चेन के अहम हिस्सों पर नियंत्रण रखता है और इसी ताकत का इस्तेमाल बाजारों में सस्ता माल डंप करने, जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति रोकने और अपनी आर्थिक समस्याओं का बोझ दूसरे देशों पर डालने के लिए करता है।

पूर्व प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी कि इन हालात में यूरोप सबसे ज्यादा जोखिम में है। उनके अनुसार, अगर यूरोपीय देश एकजुट नहीं हुए तो महाद्वीप अंदर से कमजोर और बंटा हुआ दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि व्यापार, मुद्रा और प्रतिस्पर्धा के मामलों में यूरोप ने जब एकजुट होकर काम किया, तब वह वैश्विक ताकत बना, लेकिन रक्षा, उद्योग और विदेश नीति में बिखराव उसकी सबसे बड़ी कमजोरी है।

द्रागी ने स्पष्ट कहा कि जब व्यापार और सुरक्षा आपस में जुड़ जाते हैं, तब यूरोप की कमजोरियां उसकी आर्थिक ताकत को भी बेअसर कर देती हैं। अगर यूरोप पैसे और बाजार में तो एक है, लेकिन सुरक्षा और सैन्य मामलों में बंटा हुआ है, तो उसकी आर्थिक शक्ति को उसके खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है—और आज यही हो रहा है।

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की हालिया बयानबाजी का जिक्र करते हुए द्रागी ने कहा कि इसने यूरोप की प्रतिक्रिया क्षमता को उजागर कर दिया है। उनके मुताबिक, खतरे के सामने मजबूत और सीधा जवाब ज्यादा असरदार होता है, बजाय लंबे कूटनीतिक बयानों के।

द्रागी के बयान ऐसे समय आए हैं जब यूरोपीय देशों में अमेरिका की नीतियों को लेकर असहजता बढ़ रही है। NATO, टैरिफ और ग्रीनलैंड जैसे मुद्दों पर अमेरिकी रुख ने यूरोपीय सहयोगियों का भरोसा कमजोर किया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि द्रागी की यह चेतावनी यूरोप के लिए आत्ममंथन का संकेत है।

उन्होंने अंत में कहा कि अगर यूरोप को अपनी सीमाओं, लोकतंत्र और आर्थिक स्वतंत्रता की रक्षा करनी है, तो उसे एक ढीले समूह की तरह नहीं, बल्कि एक मजबूत और निर्णायक यूनियन की तरह काम करना होगा।

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