कावेरी जल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में 13 अगस्त को सुनवाई, तमिलनाडु ने मांगा पानी

Digital Desk

On

तमिलनाडु ने कर्नाटक से 15 दिन तक रोज 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने की मांग की; CWMA के निर्देश के पालन को लेकर राज्य ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

कावेरी नदी के पानी को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। अदालत 13 अगस्त को तमिलनाडु सरकार की उस याचिका पर सुनवाई करेगी, जिसमें कर्नाटक को कावेरी से तय मात्रा में पानी छोड़ने का निर्देश देने की मांग की गई है। तमिलनाडु ने अपनी याचिका में मांग की है कि कर्नाटक को 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी तमिलनाडु के लिए छोड़ने का निर्देश दिया जाए। राज्य सरकार का कहना है कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) की ओर से जारी निर्देश के बावजूद उसे अपेक्षित मात्रा में पानी नहीं मिल रहा है।

CWMA के आदेश को लागू कराने की मांग

तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण ने 30 जुलाई को कर्नाटक को पानी छोड़ने का निर्देश दिया था। इसके तहत बिलिगुंडुलु सीमा बिंदु पर रोजाना 3,500 क्यूसेक पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जानी थी। तमिलनाडु का आरोप है कि कर्नाटक की ओर से इस निर्देश का पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा है। राज्य ने 15 दिनों की अवधि में करीब 4.536 टीएमसी पानी उपलब्ध कराने की मांग रखी है।

13 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने मामले को 13 अगस्त के लिए सूचीबद्ध किया है। तमिलनाडु की याचिका में अदालत से हस्तक्षेप कर कर्नाटक को CWMA के निर्देशों के अनुरूप पानी छोड़ने का आदेश देने की मांग की गई है। इसी मुद्दे से जुड़ी DMK की ओर से दाखिल याचिका भी सुनवाई के दौरान सामने आ सकती है। कावेरी जल बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। पानी की उपलब्धता, मानसून और जलाशयों में भंडारण की स्थिति के आधार पर दोनों राज्यों के बीच समय-समय पर टकराव की स्थिति बनती रही है।

कर्नाटक में भी पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता

कर्नाटक की ओर से पहले यह कहा गया था कि बारिश में सुधार और कावेरी बेसिन के जलाशयों में आवक बढ़ने के बाद CWMA के निर्देश का पालन करने की स्थिति बेहतर हुई है। राज्य की ओर से 3,500 क्यूसेक प्रतिदिन पानी छोड़ने के निर्देश के अनुपालन की बात भी सामने आई थी। इसके बावजूद तमिलनाडु ने पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिलने का दावा करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अब अदालत में दोनों पक्षों की दलीलों और पानी छोड़ने से जुड़े निर्देशों पर सुनवाई होगी।

Also Read:  बिना थर्ड पार्टी बीमा वाले वाहनों पर सख्ती की तैयारी, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और IRDA को दिए बड़े निर्देश

www.dainikjagranmpcg.com
10 Aug 2026 By Priyanka

कावेरी जल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में 13 अगस्त को सुनवाई, तमिलनाडु ने मांगा पानी

Digital Desk

कावेरी नदी के पानी को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। अदालत 13 अगस्त को तमिलनाडु सरकार की उस याचिका पर सुनवाई करेगी, जिसमें कर्नाटक को कावेरी से तय मात्रा में पानी छोड़ने का निर्देश देने की मांग की गई है। तमिलनाडु ने अपनी याचिका में मांग की है कि कर्नाटक को 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी तमिलनाडु के लिए छोड़ने का निर्देश दिया जाए। राज्य सरकार का कहना है कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) की ओर से जारी निर्देश के बावजूद उसे अपेक्षित मात्रा में पानी नहीं मिल रहा है।

CWMA के आदेश को लागू कराने की मांग

तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण ने 30 जुलाई को कर्नाटक को पानी छोड़ने का निर्देश दिया था। इसके तहत बिलिगुंडुलु सीमा बिंदु पर रोजाना 3,500 क्यूसेक पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जानी थी। तमिलनाडु का आरोप है कि कर्नाटक की ओर से इस निर्देश का पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा है। राज्य ने 15 दिनों की अवधि में करीब 4.536 टीएमसी पानी उपलब्ध कराने की मांग रखी है।

13 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने मामले को 13 अगस्त के लिए सूचीबद्ध किया है। तमिलनाडु की याचिका में अदालत से हस्तक्षेप कर कर्नाटक को CWMA के निर्देशों के अनुरूप पानी छोड़ने का आदेश देने की मांग की गई है। इसी मुद्दे से जुड़ी DMK की ओर से दाखिल याचिका भी सुनवाई के दौरान सामने आ सकती है। कावेरी जल बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। पानी की उपलब्धता, मानसून और जलाशयों में भंडारण की स्थिति के आधार पर दोनों राज्यों के बीच समय-समय पर टकराव की स्थिति बनती रही है।

कर्नाटक में भी पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता

कर्नाटक की ओर से पहले यह कहा गया था कि बारिश में सुधार और कावेरी बेसिन के जलाशयों में आवक बढ़ने के बाद CWMA के निर्देश का पालन करने की स्थिति बेहतर हुई है। राज्य की ओर से 3,500 क्यूसेक प्रतिदिन पानी छोड़ने के निर्देश के अनुपालन की बात भी सामने आई थी। इसके बावजूद तमिलनाडु ने पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिलने का दावा करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अब अदालत में दोनों पक्षों की दलीलों और पानी छोड़ने से जुड़े निर्देशों पर सुनवाई होगी।

https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/hearing-on-cauvery-water-dispute-in-supreme-court-on-august/article-61184

दैनिक जागरण से जुड़ें:

देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:

नवीनतम समाचार

जबलपुर स्टेशन पर खड़े रेलवे कोच में आग, मची अफरा-तफरी

सुबह धुआं उठता देख अधिकारियों को मिली सूचना, दमकल ने मौके पर पहुंचकर बुझाई आग; जांच के लिए बनेगी टीम...
मध्य प्रदेश 
जबलपुर स्टेशन पर खड़े रेलवे कोच में आग, मची अफरा-तफरी

बिलौआ अवैध खनन मामले में कलेक्टर तलब, कोर्ट में दिखेगी ड्रोन रिकॉर्डिंग

ग्वालियर हाईकोर्ट में आज होगी सुनवाई, 16 खदानों पर पहले से रोक; खनन क्षेत्र और क्रशरों की स्थिति जांचेगा कोर्ट...
राज्य  मध्य प्रदेश 
बिलौआ अवैध खनन मामले में कलेक्टर तलब, कोर्ट में दिखेगी ड्रोन रिकॉर्डिंग

दतिया जीत के बाद कांग्रेस की PAC बैठक आज, 25 नेता होंगे शामिल

भोपाल में दोपहर 12 बजे जुटेंगे बड़े नेता, नकुलनाथ पहली बार PAC की बैठक में रहेंगे मौजूद
चुनाव  मध्य प्रदेश 
दतिया जीत के बाद कांग्रेस की PAC बैठक आज, 25 नेता होंगे शामिल

भोपाल-विदिशा फोरलेन को कैबिनेट से मिल सकती है मंजूरी, लागत 1757 करोड़

44.83 किमी सड़क होगी चौड़ी, तीन बायपास भी बनेंगे; भोपाल-कानपुर हाई स्पीड कॉरिडोर से कनेक्टिविटी होगी आसान
टॉप न्यूज़ 
भोपाल-विदिशा फोरलेन को कैबिनेट से मिल सकती है मंजूरी, लागत 1757 करोड़

बिजनेस

Copyright (c) Dainik Jagran All Rights Reserved.