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भारत ने नेपाल-बांग्लादेश से बढ़ाई कूटनीतिक सक्रियता, दोनों देशों के PM से मिले भारतीय दूत
Digital Desk
नेपाल में पीएम बालेंद्र शाह से भारतीय राजदूत की पहली मुलाकात, बांग्लादेश में प्रधानमंत्री तारिक रहमान से हुई बातचीत; BRICS शिखर सम्मेलन भी चर्चा के केंद्र में
नई दिल्ली ने नेपाल और बांग्लादेश के साथ राजनयिक संपर्क बढ़ा दिया है। सोमवार को लगभग एक ही समय पर दोनों पड़ोसी देशों में भारतीय प्रतिनिधियों ने वहां के प्रधानमंत्रियों से मुलाकात की। नेपाल में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बातचीत की, जबकि बांग्लादेश में भारत के हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान से शिष्टाचार भेंट की। दोनों मुलाकातें ऐसे समय हुई हैं, जब भारत के दोनों पड़ोसी देशों के साथ संबंधों में कुछ मुद्दों को लेकर तनाव बना हुआ है।
नेपाल में हुई बैठक को खास इसलिए माना जा रहा है क्योंकि मार्च में पद संभालने के बाद प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की किसी विदेशी राजनयिक के साथ यह पहली व्यक्तिगत मुलाकात बताई गई है। बैठक करीब एक घंटे चली। नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, बातचीत में दोनों देशों के पारंपरिक संबंधों, आपसी हितों, विकास परियोजनाओं और द्विपक्षीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। शाह ने भारत और नेपाल के बीच पुराने संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया। दोनों देशों के बीच लंबे समय से व्यापार, ऊर्जा, सीमा, संस्कृति और विकास से जुड़े रिश्ते रहे हैं। ऐसे में भारतीय राजदूत के साथ प्रधानमंत्री की बातचीत को द्विपक्षीय संपर्क बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नेपाल में सीमा को लेकर बयान से बढ़ा था विवाद
नेपाल में भारत के साथ संबंधों को लेकर हाल के महीनों में सीमा का मुद्दा भी चर्चा में रहा है। मई और जून में प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की ओर से संसद में दिए गए कुछ बयानों के बाद राजनीतिक और राजनयिक स्तर पर हलचल बढ़ गई थी। शाह ने नेपाल की जमीन पर भारत की ओर से अतिक्रमण का मुद्दा उठाया था। इसके बाद नेपाल के विदेश मंत्रालय को स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी। मंत्रालय ने बताया था कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी मुख्य रूप से सीमावर्ती इलाकों में नो-मैन्स लैंड और सीमा स्तंभों से जुड़े स्थानीय विवादों तथा सीमित स्तर पर खेती के इस्तेमाल से संबंधित थी। नेपाल सरकार ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि इससे कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों पर उसके आधिकारिक रुख में कोई बदलाव नहीं आया है।
शाह से मुलाकात के बाद चीनी और अमेरिकी प्रतिनिधि से भी बैठक
भारतीय राजदूत से बातचीत के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की अन्य विदेशी प्रतिनिधियों से भी मुलाकात का कार्यक्रम है। उन्हें चीन के राजदूत झांग माओमिंग और अमेरिका के चार्ज डी'अफेयर्स स्कॉट उर्बोम से भी बातचीत करनी है। नेपाल के विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, भारतीय राजदूत की मुलाकात को इस क्रम में पहले रखा गया। इससे सरकार की विदेश नीति में पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को दी जा रही प्राथमिकता को लेकर चर्चा शुरू हुई है।
बांग्लादेश में भी भारतीय हाई कमिश्नर की PM तारिक रहमान से मुलाकात
दूसरी तरफ बांग्लादेश की राजधानी ढाका में भारतीय हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की। यह बैठक बांग्लादेश और भारत के बीच हालिया राजनयिक तनाव के बीच हुई है। इससे एक दिन पहले भारतीय हाई कमिश्नर ने बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान से भी आमने-सामने बातचीत की थी। सोमवार को प्रधानमंत्री से हुई मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया गया। दोनों देशों के बीच हाल में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत से दिए गए वर्चुअल संबोधन को लेकर भी विवाद सामने आया है। 5 अगस्त को नई दिल्ली से हुए इस ऑनलाइन कार्यक्रम पर ढाका ने कड़ी आपत्ति जताई थी।
हसीना के बयान पर ढाका ने जताई थी नाराजगी
शेख हसीना ने अपने संबोधन में बांग्लादेश लौटने की इच्छा जताते हुए कहा था कि वह देश में लोकतंत्र बहाल करने और उसे सही दिशा में ले जाने के लिए वापसी करेंगी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया था कि वापस लौटने पर उन्हें जेल या मौत की सजा का सामना करना पड़ सकता है। हसीना के बयान के बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारत के सामने विरोध दर्ज कराया था। ढाका का कहना था कि इस तरह के बयानों से वहां की जनता की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं और दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की कोशिशों पर असर पड़ सकता है। भारत ने इस मामले में स्पष्ट किया था कि नई दिल्ली में आयोजित उस मीडिया कार्यक्रम से उसका कोई संबंध नहीं था।
BRICS सम्मेलन भी बातचीत का अहम मुद्दा
भारत और बांग्लादेश के बीच होने वाली बातचीत में आगामी BRICS शिखर सम्मेलन भी महत्वपूर्ण विषय है। भारत ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। बांग्लादेश वर्तमान में BIMSTEC की अध्यक्षता कर रहा है, इसलिए उसे BRICS बैठक में आमंत्रित किया गया है। हालांकि, बांग्लादेश की ओर से सम्मेलन में शामिल होने को लेकर अब तक औपचारिक फैसला सार्वजनिक नहीं किया गया है। ऐसे में भारतीय प्रतिनिधि और बांग्लादेशी नेतृत्व के बीच संपर्क को इस संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नेपाल और बांग्लादेश दोनों के साथ संबंधों पर नजर
भारत के लिए नेपाल और बांग्लादेश दोनों ही रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पड़ोसी हैं। नेपाल के साथ सीमा, ऊर्जा, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे मुद्दे लंबे समय से द्विपक्षीय एजेंडे का हिस्सा रहे हैं। वहीं बांग्लादेश के साथ व्यापार, सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, जल संसाधन और क्षेत्रीय संपर्क से जुड़े मुद्दे अहम हैं। एक ही दिन दोनों पड़ोसी देशों के प्रधानमंत्रियों के साथ भारतीय प्रतिनिधियों की बातचीत ऐसे समय हुई है, जब नई दिल्ली क्षेत्रीय स्तर पर अपने पड़ोसी देशों के साथ संपर्क को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
भारत ने नेपाल-बांग्लादेश से बढ़ाई कूटनीतिक सक्रियता, दोनों देशों के PM से मिले भारतीय दूत
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नई दिल्ली ने नेपाल और बांग्लादेश के साथ राजनयिक संपर्क बढ़ा दिया है। सोमवार को लगभग एक ही समय पर दोनों पड़ोसी देशों में भारतीय प्रतिनिधियों ने वहां के प्रधानमंत्रियों से मुलाकात की। नेपाल में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बातचीत की, जबकि बांग्लादेश में भारत के हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान से शिष्टाचार भेंट की। दोनों मुलाकातें ऐसे समय हुई हैं, जब भारत के दोनों पड़ोसी देशों के साथ संबंधों में कुछ मुद्दों को लेकर तनाव बना हुआ है।
नेपाल में हुई बैठक को खास इसलिए माना जा रहा है क्योंकि मार्च में पद संभालने के बाद प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की किसी विदेशी राजनयिक के साथ यह पहली व्यक्तिगत मुलाकात बताई गई है। बैठक करीब एक घंटे चली। नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, बातचीत में दोनों देशों के पारंपरिक संबंधों, आपसी हितों, विकास परियोजनाओं और द्विपक्षीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। शाह ने भारत और नेपाल के बीच पुराने संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया। दोनों देशों के बीच लंबे समय से व्यापार, ऊर्जा, सीमा, संस्कृति और विकास से जुड़े रिश्ते रहे हैं। ऐसे में भारतीय राजदूत के साथ प्रधानमंत्री की बातचीत को द्विपक्षीय संपर्क बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नेपाल में सीमा को लेकर बयान से बढ़ा था विवाद
नेपाल में भारत के साथ संबंधों को लेकर हाल के महीनों में सीमा का मुद्दा भी चर्चा में रहा है। मई और जून में प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की ओर से संसद में दिए गए कुछ बयानों के बाद राजनीतिक और राजनयिक स्तर पर हलचल बढ़ गई थी। शाह ने नेपाल की जमीन पर भारत की ओर से अतिक्रमण का मुद्दा उठाया था। इसके बाद नेपाल के विदेश मंत्रालय को स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी। मंत्रालय ने बताया था कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी मुख्य रूप से सीमावर्ती इलाकों में नो-मैन्स लैंड और सीमा स्तंभों से जुड़े स्थानीय विवादों तथा सीमित स्तर पर खेती के इस्तेमाल से संबंधित थी। नेपाल सरकार ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि इससे कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों पर उसके आधिकारिक रुख में कोई बदलाव नहीं आया है।
शाह से मुलाकात के बाद चीनी और अमेरिकी प्रतिनिधि से भी बैठक
भारतीय राजदूत से बातचीत के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की अन्य विदेशी प्रतिनिधियों से भी मुलाकात का कार्यक्रम है। उन्हें चीन के राजदूत झांग माओमिंग और अमेरिका के चार्ज डी'अफेयर्स स्कॉट उर्बोम से भी बातचीत करनी है। नेपाल के विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, भारतीय राजदूत की मुलाकात को इस क्रम में पहले रखा गया। इससे सरकार की विदेश नीति में पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को दी जा रही प्राथमिकता को लेकर चर्चा शुरू हुई है।
बांग्लादेश में भी भारतीय हाई कमिश्नर की PM तारिक रहमान से मुलाकात
दूसरी तरफ बांग्लादेश की राजधानी ढाका में भारतीय हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की। यह बैठक बांग्लादेश और भारत के बीच हालिया राजनयिक तनाव के बीच हुई है। इससे एक दिन पहले भारतीय हाई कमिश्नर ने बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान से भी आमने-सामने बातचीत की थी। सोमवार को प्रधानमंत्री से हुई मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया गया। दोनों देशों के बीच हाल में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत से दिए गए वर्चुअल संबोधन को लेकर भी विवाद सामने आया है। 5 अगस्त को नई दिल्ली से हुए इस ऑनलाइन कार्यक्रम पर ढाका ने कड़ी आपत्ति जताई थी।
हसीना के बयान पर ढाका ने जताई थी नाराजगी
शेख हसीना ने अपने संबोधन में बांग्लादेश लौटने की इच्छा जताते हुए कहा था कि वह देश में लोकतंत्र बहाल करने और उसे सही दिशा में ले जाने के लिए वापसी करेंगी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया था कि वापस लौटने पर उन्हें जेल या मौत की सजा का सामना करना पड़ सकता है। हसीना के बयान के बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारत के सामने विरोध दर्ज कराया था। ढाका का कहना था कि इस तरह के बयानों से वहां की जनता की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं और दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की कोशिशों पर असर पड़ सकता है। भारत ने इस मामले में स्पष्ट किया था कि नई दिल्ली में आयोजित उस मीडिया कार्यक्रम से उसका कोई संबंध नहीं था।
BRICS सम्मेलन भी बातचीत का अहम मुद्दा
भारत और बांग्लादेश के बीच होने वाली बातचीत में आगामी BRICS शिखर सम्मेलन भी महत्वपूर्ण विषय है। भारत ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। बांग्लादेश वर्तमान में BIMSTEC की अध्यक्षता कर रहा है, इसलिए उसे BRICS बैठक में आमंत्रित किया गया है। हालांकि, बांग्लादेश की ओर से सम्मेलन में शामिल होने को लेकर अब तक औपचारिक फैसला सार्वजनिक नहीं किया गया है। ऐसे में भारतीय प्रतिनिधि और बांग्लादेशी नेतृत्व के बीच संपर्क को इस संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नेपाल और बांग्लादेश दोनों के साथ संबंधों पर नजर
भारत के लिए नेपाल और बांग्लादेश दोनों ही रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पड़ोसी हैं। नेपाल के साथ सीमा, ऊर्जा, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे मुद्दे लंबे समय से द्विपक्षीय एजेंडे का हिस्सा रहे हैं। वहीं बांग्लादेश के साथ व्यापार, सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, जल संसाधन और क्षेत्रीय संपर्क से जुड़े मुद्दे अहम हैं। एक ही दिन दोनों पड़ोसी देशों के प्रधानमंत्रियों के साथ भारतीय प्रतिनिधियों की बातचीत ऐसे समय हुई है, जब नई दिल्ली क्षेत्रीय स्तर पर अपने पड़ोसी देशों के साथ संपर्क को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
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