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ईरान ने हूती समूह को बताया स्वतंत्र, रुबियो के प्रॉक्सी दावे को किया खारिज
Digital Desk
ईरान के इस्माइल बघाई ने मार्को रुबियो के हूतियों को ईरान का प्रॉक्सी बताने वाले दावे को खारिज किया और अंसारुल्लाह को एक स्वतंत्र यमनी संगठन बताया।
ईरान ने यमन के हूती आंदोलन को लेकर अमेरिका के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह समूह तेहरान के निर्देश पर काम नहीं करता। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने हूतियों को एक स्वतंत्र यमनी पक्ष बताया, जो अपने राजनीतिक और सैन्य फैसले खुद लेता है।
बघाई की यह प्रतिक्रिया अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के उस बयान के बाद आई जिसमें उन्होंने हालिया हूती हमलों के पीछे ईरान का हाथ होने का आरोप लगाया था। रुबियो ने हूतियों को ईरान के “एजेंट और प्रॉक्सी” बताया और कहा था कि हालिया हमलों में ईरानी भूमिका स्पष्ट दिखाई देती है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में तनाव तेजी से बढ़ रहा है और ईरान-अमेरिका संघर्ष का असर आसपास के देशों तक फैल रहा है।
बघाई ने प्रॉक्सी दावा ठुकराया
बघाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर रुबियो के बयान का सीधा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अंसारल्लाह, जिसे हूती आंदोलन के औपचारिक नाम के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, एक स्वतंत्र यमनी पक्ष है।
उनके अनुसार, संगठन अपने फैसले स्वयं लेता है और तेहरान से आदेश प्राप्त नहीं करता।
बघाई ने अमेरिका पर भी क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ाने का आरोप लगाया। उन्होंने अमेरिकी सैन्य मौजूदगी और उसकी कथित प्रभुत्ववादी नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि यमन में स्थायी शांति के लिए बाहरी सैन्य हस्तक्षेप समाप्त होना चाहिए।
रुबियो ने ईरान को जिम्मेदार बताया
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सऊदी अरब के खिलाफ हालिया हूती हमलों पर चर्चा करते हुए ईरानी भूमिका का आरोप लगाया था।
रुबियो ने कहा कि अमेरिका घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहा है और उनके आकलन में कुछ हमलों के पीछे ईरान का प्रभाव स्पष्ट है।
यह बयान दक्षिण-पश्चिमी सऊदी अरब में हूती हमलों के बाद आया। अबहा, जिजान, नजरान और खमिस मुशैत सहित कई इलाकों में हमलों की खबर सामने आई।
सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, हमलों में 73 लोग घायल हुए और तेल से जुड़े प्रतिष्ठानों सहित अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान तथा आग लगने की घटनाएं हुईं।
हूती हमलों में तेजी
हूतियों और सऊदी अरब के बीच हालिया घटनाक्रम को क्षेत्र में एक बड़े सैन्य तनाव के रूप में देखा जा रहा है।
हूती समूह ने मिसाइल और ड्रोन के जरिए हमलों की जिम्मेदारी ली है और व्यापक ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच सऊदी हितों को निशाना बनाने की चेतावनी भी दी है।
इससे आशंका बढ़ी है कि 2022 के युद्धविराम के बाद अपेक्षाकृत शांत रहे सऊदी-हूती मोर्चे पर फिर से व्यापक संघर्ष शुरू हो सकता है।
हूती यमन के उत्तरी हिस्से के बड़े क्षेत्र पर नियंत्रण रखते हैं, जिसमें राजधानी सना भी शामिल है। संगठन देश के सबसे प्रभावशाली सशस्त्र समूहों में से एक है।
ईरान से संबंधों पर विवाद
ईरान का प्रॉक्सी वाला आरोप खारिज करना ऐसे समय में आया है जब तेहरान और हूतियों के बीच सैन्य तथा राजनीतिक संबंधों के पर्याप्त प्रमाण मौजूद रहे हैं।
कई आकलनों के अनुसार, हूतियों को ईरान से हथियारों, तकनीक और विशेषज्ञता सहित विभिन्न प्रकार का समर्थन मिला है। पिछले एक दशक में इस सहयोग ने समूह की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने में भूमिका निभाई है।
हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि हूतियों की अपनी राजनीतिक और सैन्य निर्णय लेने की क्षमता है और वे हर परिस्थिति में ईरान के निर्देशों का पालन करते हों, ऐसा जरूरी नहीं है।
यही अंतर इस बहस का मुख्य केंद्र है कि हूतियों को ईरान का “प्रॉक्सी” कहना किस हद तक सही है।
क्षेत्रीय संघर्ष का दायरा बढ़ा
तेहरान और वॉशिंगटन के बीच यह नया विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्रीय संघर्ष कई मोर्चों पर फैल रहा है।
ईरान ने हाल के घटनाक्रमों में अमेरिकी हितों को निशाना बनाने के साथ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास समुद्री यातायात को लेकर भी चेतावनी दी है। वहीं, हूतियों की ओर से सऊदी अरब और लाल सागर क्षेत्र में दबाव बढ़ा है।
एक-दूसरे से जुड़े इन संघर्षों ने ईरान, अमेरिका, सऊदी अरब और तेहरान से जुड़े सशस्त्र समूहों के बीच व्यापक क्षेत्रीय टकराव की आशंका बढ़ाई है।
तेल आपूर्ति पर बढ़ा खतरा
हूती हमलों में तेजी ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ाई है।
सऊदी अरब दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादकों में शामिल है। वहीं, लाल सागर और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग हैं।
दोनों जलमार्गों पर एक साथ बढ़ता जोखिम वैश्विक तेल बाजार पर दबाव डाल रहा है। आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच ब्रेंट क्रूड हाल में 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुका है।
यदि व्यवधान लंबे समय तक जारी रहता है, तो शिपिंग लागत बढ़ने के साथ ऊर्जा आयात करने वाली अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई का दबाव भी बढ़ सकता है।
अमेरिका-ईरान टकराव गहराया
बघाई का बयान ईरान की उस व्यापक नीति को दर्शाता है जिसमें वह मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य भूमिका और तेहरान पर लगाए जा रहे आरोपों को खारिज करता रहा है।
वहीं, अमेरिका ईरान को मध्य पूर्व में सक्रिय कई सशस्त्र समूहों के प्रमुख समर्थकों में मानता है।
हूतियों को लेकर दोनों देशों के बीच ताजा बयानबाजी इसी बड़े भू-राजनीतिक टकराव का हिस्सा है।
फिलहाल, ईरान हूतियों को स्वतंत्र यमनी संगठन बता रहा है, जबकि अमेरिका उनके तेहरान से करीबी संबंधों को रेखांकित कर रहा है। सऊदी अरब पर हूती हमलों और व्यापक ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच यह विवाद क्षेत्रीय सुरक्षा संकट का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहने की संभावना है।
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