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Iran US War: ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियन की चेतावनी, कहा- हमला नहीं करेंगे, लेकिन जवाब होगा विनाशकारी
अंतर्राष्ट्रीय न्यूज
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा है कि उनका देश पहले हमला नहीं करता, लेकिन किसी भी हमले का जवाब बेहद कड़े तरीके से देगा।
Iran US War: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने देश की नीति को स्पष्ट करते हुए कहा है कि ईरान किसी भी संघर्ष की शुरुआत नहीं करता, लेकिन अगर उस पर हमला किया जाता है तो उसका जवाब बेहद कड़ा और निर्णायक होगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो चुकी हैं।
एक्स पोस्ट के जरिए दिया सख्त संदेश
राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात रखते हुए कहा कि ईरान ने हमेशा संयम बरता है और पहले हमला करने की नीति नहीं अपनाई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि देश के बुनियादी ढांचे या आर्थिक ठिकानों को निशाना बनाया गया तो जवाबी कार्रवाई बेहद सख्त होगी। उन्होंने क्षेत्रीय देशों को भी चेतावनी देते हुए कहा कि वे अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए न होने दें।
मिडिल ईस्ट देशों को दी चेतावनी
ईरानी राष्ट्रपति ने अपने बयान में खास तौर पर मिडिल ईस्ट के देशों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि ये देश स्थिरता और विकास चाहते हैं, तो उन्हें इस बात का ध्यान रखना होगा कि उनकी जमीन का इस्तेमाल बाहरी ताकतें ईरान के खिलाफ न करें। यह बयान सीधे तौर पर उन देशों की ओर इशारा माना जा रहा है जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं।
तेहरान पर हमले के बाद बढ़ा तनाव
बताया जा रहा है कि 28 फरवरी को तेहरान पर हुए हमले के बाद क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ गया। इसके बाद से ईरान लगातार अपने विरोधियों के ठिकानों को निशाना बना रहा है। यह घटनाक्रम पूरे मिडिल ईस्ट में अस्थिरता को बढ़ाने वाला साबित हो रहा है।
अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने सऊदी अरब, यूएई, बहरीन, ओमान और कतर जैसे देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाया है। इन हमलों में मिसाइल और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मिडिल ईस्ट में अमेरिका के कई सैन्य बेस इन हमलों से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी चिंता
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक स्तर पर चिंता पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति नियंत्रण में नहीं आई, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है। खास तौर पर तेल उत्पादन और सप्लाई चेन पर इसका बड़ा प्रभाव देखने को मिल सकता है।
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अंतर्राष्ट्रीय न्यूज
Iran US War: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने देश की नीति को स्पष्ट करते हुए कहा है कि ईरान किसी भी संघर्ष की शुरुआत नहीं करता, लेकिन अगर उस पर हमला किया जाता है तो उसका जवाब बेहद कड़ा और निर्णायक होगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो चुकी हैं।
एक्स पोस्ट के जरिए दिया सख्त संदेश
राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात रखते हुए कहा कि ईरान ने हमेशा संयम बरता है और पहले हमला करने की नीति नहीं अपनाई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि देश के बुनियादी ढांचे या आर्थिक ठिकानों को निशाना बनाया गया तो जवाबी कार्रवाई बेहद सख्त होगी। उन्होंने क्षेत्रीय देशों को भी चेतावनी देते हुए कहा कि वे अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए न होने दें।
मिडिल ईस्ट देशों को दी चेतावनी
ईरानी राष्ट्रपति ने अपने बयान में खास तौर पर मिडिल ईस्ट के देशों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि ये देश स्थिरता और विकास चाहते हैं, तो उन्हें इस बात का ध्यान रखना होगा कि उनकी जमीन का इस्तेमाल बाहरी ताकतें ईरान के खिलाफ न करें। यह बयान सीधे तौर पर उन देशों की ओर इशारा माना जा रहा है जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं।
तेहरान पर हमले के बाद बढ़ा तनाव
बताया जा रहा है कि 28 फरवरी को तेहरान पर हुए हमले के बाद क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ गया। इसके बाद से ईरान लगातार अपने विरोधियों के ठिकानों को निशाना बना रहा है। यह घटनाक्रम पूरे मिडिल ईस्ट में अस्थिरता को बढ़ाने वाला साबित हो रहा है।
अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने सऊदी अरब, यूएई, बहरीन, ओमान और कतर जैसे देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाया है। इन हमलों में मिसाइल और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मिडिल ईस्ट में अमेरिका के कई सैन्य बेस इन हमलों से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी चिंता
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक स्तर पर चिंता पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति नियंत्रण में नहीं आई, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है। खास तौर पर तेल उत्पादन और सप्लाई चेन पर इसका बड़ा प्रभाव देखने को मिल सकता है।
