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ईरान के कट्टरपंथी नेता लंबे युद्ध की तैयारी में
Digital Desk
ईरान के कट्टरपंथी नेतृत्व ने सैन्य कमान, मिसाइल-ड्रोन उत्पादन और क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ समन्वय मजबूत किया, रिपोर्ट में दावा किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के कट्टरपंथी नेतृत्व ने सैन्य नियंत्रण मजबूत करने, मिसाइल और ड्रोन उत्पादन बढ़ाने तथा क्षेत्रीय सहयोगी समूहों के साथ समन्वय तेज करने की तैयारी की है।
ईरान के कट्टरपंथी नेतृत्व ने अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ लंबे टकराव की संभावना को देखते हुए अपनी सैन्य तैयारियां तेज कर दी हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में ईरानी और अरब अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि तेहरान ने सैन्य कमान में बदलाव, आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और मिसाइल व ड्रोन उत्पादन बढ़ाने जैसे कदम उठाए हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब वॉशिंगटन और तेहरान के बीच कूटनीतिक प्रयास मुश्किल दौर में पहुंच गए हैं। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि बातचीत विफल रहने पर ईरान अपनी सैन्य नीति को रक्षात्मक से “पूरी तरह आक्रामक” रुख में बदल सकता है, खासकर रणनीतिक होरमुज जलडमरूमध्य के आसपास।
ईरान में सैन्य कमान मजबूत
वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, ईरान के कट्टरपंथी नेताओं ने जून में हुए समझौते के बाद मिले कूटनीतिक समय का इस्तेमाल स्थायी समाधान की तैयारी से अधिक सैन्य क्षमता मजबूत करने में किया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दौरान इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की भूमिका नियमित सेना के भीतर बढ़ाई गई। ईरान-इराक युद्ध और पिछले आंतरिक सुरक्षा अभियानों का अनुभव रखने वाले वरिष्ठ अधिकारियों को भी महत्वपूर्ण रक्षा और सुरक्षा पदों पर नियुक्त किए जाने की जानकारी सामने आई है।
इन बदलावों से ईरान की सैन्य निर्णय प्रक्रिया अधिक केंद्रीकृत हो सकती है और किसी नए संघर्ष की स्थिति में कमान और नियंत्रण मजबूत हो सकता है।
मिसाइल और ड्रोन उत्पादन बढ़ा
ईरान ने अपनी मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को फिर से मजबूत करने पर भी ध्यान केंद्रित किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान लंबे संघर्ष की स्थिति में सैन्य भंडार बनाए रखने के लिए उत्पादन बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। मिसाइलें ईरान की सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा हैं, जबकि ड्रोन ईरानी सेना और उसके क्षेत्रीय सहयोगी सशस्त्र समूहों के लिए भी महत्वपूर्ण हथियार बन चुके हैं।
यह तैयारी संकेत देती है कि ईरानी नेतृत्व कुछ सप्ताह की लड़ाई के बजाय लंबे सैन्य टकराव की संभावना को ध्यान में रख रहा है।
क्षेत्रीय सहयोगियों से समन्वय
ईरान ने इराक और यमन सहित क्षेत्र में अपने सहयोगी सशस्त्र समूहों के साथ समन्वय भी बढ़ाया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में क्षेत्रीय खुफिया आकलनों के आधार पर इस दिशा में बढ़ती गतिविधियों का उल्लेख किया गया है।
ऐसे समन्वय से किसी व्यापक संघर्ष की स्थिति में ईरान पर सीधे हमले का दबाव कम करने और क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में अमेरिका तथा उसके सहयोगियों पर दबाव बढ़ाने की क्षमता मिल सकती है।
यमन और लाल सागर क्षेत्र में पहले से जारी तनाव के कारण समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ी हुई है।
खाड़ी देशों पर बढ़ा खतरा
लंबे संघर्ष की संभावना ने खाड़ी देशों की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। इस क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रतिष्ठान, बंदरगाह और अमेरिकी सैन्य सुविधाएं मौजूद हैं।
यदि ईरान या उसके सहयोगी समूह तेल प्रतिष्ठानों, बंदरगाहों या व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाते हैं, तो इसका असर क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था से आगे वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है।
खासकर होरमुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता बढ़ी है। हाल के दिनों में यहां जहाजों की आवाजाही में भारी कमी आई है। रॉयटर्स के अनुसार, शनिवार को केवल पांच टैंकर इस मार्ग से गुजरे और रविवार को कोई टैंकर नहीं गया, जबकि इससे पहले वाले सप्ताहांत में 31 टैंकर गुजरे थे।
कूटनीति पर बढ़ता दबाव
ईरान की सैन्य तैयारियों की खबरें ऐसे समय आई हैं जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता ठहर गई है।
रॉयटर्स के अनुसार, वॉशिंगटन ने अस्थायी युद्धविराम को आगे बढ़ाने से इनकार किया है। इसके जवाब में एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा कि बातचीत विफल रहने पर तेहरान होरमुज और व्यापक क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई बढ़ाने के लिए तैयार है।
हालांकि, कूटनीतिक संपर्क पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे संपर्क की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे बातचीत के जरिए तनाव कम करने की सीमित संभावना बनी हुई है।
होरमुज बना मुख्य मोर्चा
होरमुज जलडमरूमध्य मौजूदा टकराव का सबसे संवेदनशील बिंदु बना हुआ है। इस मार्ग से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है और यहां लंबे समय तक व्यवधान से कच्चे तेल की कीमतों तथा शिपिंग लागत पर दबाव बढ़ सकता है।
रॉयटर्स के अनुसार, कूटनीतिक गतिरोध और होरमुज में कम होती जहाजों की आवाजाही ने पहले ही तेल बाजार में आपूर्ति संबंधी चिंताएं बढ़ा दी हैं। मंगलवार को ब्रेंट क्रूड करीब 91 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।
अब आगे क्या होगा
आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत, होरमुज में समुद्री आवाजाही और ईरान की सैन्य गतिविधियों पर करीबी नजर रहेगी। मिसाइल और ड्रोन उत्पादन में बढ़ोतरी या क्षेत्रीय सहयोगी समूहों के साथ अधिक सैन्य समन्वय नए तनाव के संकेत माने जा सकते हैं।
भारत के लिए भी इसका सीधा आर्थिक महत्व है, क्योंकि होरमुज में लंबे व्यवधान से कच्चे तेल, माल ढुलाई और ऊर्जा लागत बढ़ सकती है। ईरान के कट्टरपंथी नेतृत्व की लंबे युद्ध की तैयारी से संकेत मिलता है कि तेहरान फिलहाल केवल कूटनीति पर निर्भर रहने के बजाय लंबे टकराव के लिए अपनी सैन्य क्षमता मजबूत कर रहा है।
ईरान के कट्टरपंथी नेता लंबे युद्ध की तैयारी में
Digital Desk
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के कट्टरपंथी नेतृत्व ने सैन्य नियंत्रण मजबूत करने, मिसाइल और ड्रोन उत्पादन बढ़ाने तथा क्षेत्रीय सहयोगी समूहों के साथ समन्वय तेज करने की तैयारी की है।
ईरान के कट्टरपंथी नेतृत्व ने अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ लंबे टकराव की संभावना को देखते हुए अपनी सैन्य तैयारियां तेज कर दी हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में ईरानी और अरब अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि तेहरान ने सैन्य कमान में बदलाव, आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और मिसाइल व ड्रोन उत्पादन बढ़ाने जैसे कदम उठाए हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब वॉशिंगटन और तेहरान के बीच कूटनीतिक प्रयास मुश्किल दौर में पहुंच गए हैं। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि बातचीत विफल रहने पर ईरान अपनी सैन्य नीति को रक्षात्मक से “पूरी तरह आक्रामक” रुख में बदल सकता है, खासकर रणनीतिक होरमुज जलडमरूमध्य के आसपास।
ईरान में सैन्य कमान मजबूत
वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, ईरान के कट्टरपंथी नेताओं ने जून में हुए समझौते के बाद मिले कूटनीतिक समय का इस्तेमाल स्थायी समाधान की तैयारी से अधिक सैन्य क्षमता मजबूत करने में किया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दौरान इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की भूमिका नियमित सेना के भीतर बढ़ाई गई। ईरान-इराक युद्ध और पिछले आंतरिक सुरक्षा अभियानों का अनुभव रखने वाले वरिष्ठ अधिकारियों को भी महत्वपूर्ण रक्षा और सुरक्षा पदों पर नियुक्त किए जाने की जानकारी सामने आई है।
इन बदलावों से ईरान की सैन्य निर्णय प्रक्रिया अधिक केंद्रीकृत हो सकती है और किसी नए संघर्ष की स्थिति में कमान और नियंत्रण मजबूत हो सकता है।
मिसाइल और ड्रोन उत्पादन बढ़ा
ईरान ने अपनी मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को फिर से मजबूत करने पर भी ध्यान केंद्रित किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान लंबे संघर्ष की स्थिति में सैन्य भंडार बनाए रखने के लिए उत्पादन बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। मिसाइलें ईरान की सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा हैं, जबकि ड्रोन ईरानी सेना और उसके क्षेत्रीय सहयोगी सशस्त्र समूहों के लिए भी महत्वपूर्ण हथियार बन चुके हैं।
यह तैयारी संकेत देती है कि ईरानी नेतृत्व कुछ सप्ताह की लड़ाई के बजाय लंबे सैन्य टकराव की संभावना को ध्यान में रख रहा है।
क्षेत्रीय सहयोगियों से समन्वय
ईरान ने इराक और यमन सहित क्षेत्र में अपने सहयोगी सशस्त्र समूहों के साथ समन्वय भी बढ़ाया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में क्षेत्रीय खुफिया आकलनों के आधार पर इस दिशा में बढ़ती गतिविधियों का उल्लेख किया गया है।
ऐसे समन्वय से किसी व्यापक संघर्ष की स्थिति में ईरान पर सीधे हमले का दबाव कम करने और क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में अमेरिका तथा उसके सहयोगियों पर दबाव बढ़ाने की क्षमता मिल सकती है।
यमन और लाल सागर क्षेत्र में पहले से जारी तनाव के कारण समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ी हुई है।
खाड़ी देशों पर बढ़ा खतरा
लंबे संघर्ष की संभावना ने खाड़ी देशों की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। इस क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रतिष्ठान, बंदरगाह और अमेरिकी सैन्य सुविधाएं मौजूद हैं।
यदि ईरान या उसके सहयोगी समूह तेल प्रतिष्ठानों, बंदरगाहों या व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाते हैं, तो इसका असर क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था से आगे वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है।
खासकर होरमुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता बढ़ी है। हाल के दिनों में यहां जहाजों की आवाजाही में भारी कमी आई है। रॉयटर्स के अनुसार, शनिवार को केवल पांच टैंकर इस मार्ग से गुजरे और रविवार को कोई टैंकर नहीं गया, जबकि इससे पहले वाले सप्ताहांत में 31 टैंकर गुजरे थे।
कूटनीति पर बढ़ता दबाव
ईरान की सैन्य तैयारियों की खबरें ऐसे समय आई हैं जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता ठहर गई है।
रॉयटर्स के अनुसार, वॉशिंगटन ने अस्थायी युद्धविराम को आगे बढ़ाने से इनकार किया है। इसके जवाब में एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा कि बातचीत विफल रहने पर तेहरान होरमुज और व्यापक क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई बढ़ाने के लिए तैयार है।
हालांकि, कूटनीतिक संपर्क पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे संपर्क की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे बातचीत के जरिए तनाव कम करने की सीमित संभावना बनी हुई है।
होरमुज बना मुख्य मोर्चा
होरमुज जलडमरूमध्य मौजूदा टकराव का सबसे संवेदनशील बिंदु बना हुआ है। इस मार्ग से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है और यहां लंबे समय तक व्यवधान से कच्चे तेल की कीमतों तथा शिपिंग लागत पर दबाव बढ़ सकता है।
रॉयटर्स के अनुसार, कूटनीतिक गतिरोध और होरमुज में कम होती जहाजों की आवाजाही ने पहले ही तेल बाजार में आपूर्ति संबंधी चिंताएं बढ़ा दी हैं। मंगलवार को ब्रेंट क्रूड करीब 91 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।
अब आगे क्या होगा
आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत, होरमुज में समुद्री आवाजाही और ईरान की सैन्य गतिविधियों पर करीबी नजर रहेगी। मिसाइल और ड्रोन उत्पादन में बढ़ोतरी या क्षेत्रीय सहयोगी समूहों के साथ अधिक सैन्य समन्वय नए तनाव के संकेत माने जा सकते हैं।
भारत के लिए भी इसका सीधा आर्थिक महत्व है, क्योंकि होरमुज में लंबे व्यवधान से कच्चे तेल, माल ढुलाई और ऊर्जा लागत बढ़ सकती है। ईरान के कट्टरपंथी नेतृत्व की लंबे युद्ध की तैयारी से संकेत मिलता है कि तेहरान फिलहाल केवल कूटनीति पर निर्भर रहने के बजाय लंबे टकराव के लिए अपनी सैन्य क्षमता मजबूत कर रहा है।
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