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हार्वर्ड में गूंजी रामचरितमानस की चौपाइयां, मोरारी बापू ने शुरू की नौ दिवसीय राम कथा
Digital desk
विश्वप्रसिद्ध रामकथा वक्ता पूज्य मोरारी बापू ने शनिवार को हार्वर्ड विश्वविद्यालय के मेमोरियल हॉल स्थित सैंडर्स थिएटर में नौ दिवसीय राम कथा का शुभारंभ किया। ‘मानस गुरु प्रसाद’ नाम से आयोजित यह कथा 23 अगस्त तक चलेगी।
भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शुरू हुई इस कथा में पहली बार हार्वर्ड के प्रतिष्ठित परिसर में रामचरितमानस की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा की प्रस्तुति हो रही है।
कार्यक्रम का स्वागत हार्वर्ड विश्वविद्यालय के लक्ष्मी मित्तल एंड फैमिली साउथ एशिया इंस्टीट्यूट के कार्यकारी निदेशक हितेश हाथी ने किया। संस्थान की फैकल्टी निदेशक प्रो. डायना एक ने रामायण को भारत के जीवंत भू-दृश्य से जोड़ते हुए कहा कि राम, सीता और लक्ष्मण की वन यात्रा ने भारत के अनेक स्थानों को तीर्थ के रूप में स्थापित किया। उन्होंने कहा कि रामायण केवल एक कथा या मानचित्र नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा और भू-दृश्य है, जो भारत से आगे थाईलैंड, इंडोनेशिया और कंबोडिया तक फैला है।
सत्य, प्रेम और करुणा को बनाया केंद्र
मोरारी बापू ने कहा कि यह कथा सावन मास और तुलसी जयंती के संदर्भ में आयोजित हो रही है। उन्होंने कहा कि यहां ज्ञान दीप नहीं, बल्कि प्रेम ज्योति प्रज्वलित की गई है। कथा के माध्यम से सत्य, प्रेम और करुणा के संदेश को दुनिया तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
बापू ने कहा, “लौकिक, अलौकिक छोड़कर मौलिक हो जाएं।” उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान व्यक्त किया और कहा कि प्रोटोकॉल के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज को सलाम किया जाता है, लेकिन भारतीय ध्वज को प्रणाम करने का मन करता है।
कथा की केंद्रीय विषयवस्तु रामचरितमानस की तीन चौपाइयों पर आधारित है, जिनमें गुरु प्रसाद, ज्ञान और संरक्षण की भावना को प्रमुखता दी गई है।
19 अगस्त को पहली बार अमेरिका में तुलसी जयंती समारोह
19 अगस्त को गोस्वामी तुलसीदास की जयंती के अवसर पर सैंडर्स थिएटर में तुलसी, व्यास, वाल्मीकि और रत्नावली पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। आयोजकों के अनुसार, इन पुरस्कारों का भारत से बाहर पहली बार आयोजन हो रहा है।
मोरारी बापू ने वर्ष 2010 में तुलसी जयंती कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य रामकथा और रामचरितमानस की परंपरा को संरक्षित करने, उसकी व्याख्या करने और उसे आगे बढ़ाने में योगदान देने वाले संतों, विद्वानों और कथाकारों को सम्मानित करना रहा है। अब 2026 में यह परंपरा पहली बार भारत से बाहर अमेरिका पहुंची है।
तीन दिवसीय विद्वतापूर्ण व्याख्यान श्रृंखला भी
नौ दिवसीय राम कथा के साथ 16 से 18 अगस्त तक तीन दिवसीय विद्वतापूर्ण व्याख्यान श्रृंखला भी आयोजित की जा रही है। कार्यक्रम में कथाकारों, संतों, विद्वानों, संगीतकारों, कलाकारों और अंतरराष्ट्रीय शिक्षाविदों का प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ है।
प्रतिनिधिमंडल में पूज्य मां मंदाकिनी जी (अयोध्या), पूज्य भूपेंद्रभाई पंड्या जी, डॉ. श्री पुंडरीक गोस्वामी जी (वृंदावन), श्री उमा शंकर शर्मा और जगद्गुरु श्री रामकमलदास वेदांती जी महाराज (वाराणसी) सहित कई संत और विद्वान शामिल हैं।
आयोजन टीम के पावन पोपट OBE ने कहा कि नौ दिनों तक दुनिया की प्राचीन कथा परंपराओं में से एक और दुनिया के प्रमुख शिक्षण केंद्रों में से एक एक ही परिसर में एक-दूसरे को सुनेंगे। उन्होंने कहा कि इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता मंच नहीं, बल्कि भारत के विभिन्न तीर्थ क्षेत्रों से आए संत और विद्वान हैं, जिनमें कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने पहले कभी भारत से बाहर यात्रा नहीं की थी।
हार्वर्ड के ऐतिहासिक मंच पर भारतीय आध्यात्मिक परंपरा
मेमोरियल हॉल का सैंडर्स थिएटर लंबे समय से वैश्विक स्तर के विचारकों और वक्ताओं की मेजबानी करता रहा है। यहां विंस्टन चर्चिल, मार्टिन लूथर किंग जूनियर और टी.एस. एलियट जैसे व्यक्तित्व अपने विचार व्यक्त कर चुके हैं।
हार्वर्ड और भारत के बीच भी लंबे समय से बौद्धिक संबंध रहे हैं। भारत के पहले नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर ने 1913 में हार्वर्ड में भारतीय दर्शन और उपनिषदों पर व्याख्यान दिए थे। नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन भी लंबे समय तक हार्वर्ड में अध्यापन से जुड़े रहे।
900 से अधिक स्थानों पर कर चुके हैं राम कथा
मोरारी बापू दुनिया के विभिन्न देशों में 900 से अधिक स्थानों पर 980 से ज्यादा राम कथाएं कर चुके हैं। उनकी कथाएं वेटिकन, न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय और 2023 में यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज जैसे प्रतिष्ठित वैश्विक मंचों पर भी आयोजित हो चुकी हैं। अब हार्वर्ड भी इस सूची में शामिल हो गया है।
आयोजकों के अनुसार, भारत से आए प्रतिनिधिमंडल के किसी भी सदस्य को आयोजन में भाग लेने के लिए भुगतान नहीं किया गया है। पूरे प्रतिनिधिमंडल की यात्रा, ठहरने और भोजन का खर्च धर्मार्थ संस्थाओं द्वारा वहन किया गया है।
आयोजकों का कहना है कि हार्वर्ड में आयोजित यह कार्यक्रम भारत की कहानी को दुनिया को समझाने का प्रयास मात्र नहीं, बल्कि भारत की अपनी आवाज में उसकी आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक परंपरा को वैश्विक मंच तक पहुंचाने का अवसर है।
हार्वर्ड में गूंजी रामचरितमानस की चौपाइयां, मोरारी बापू ने शुरू की नौ दिवसीय राम कथा
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भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शुरू हुई इस कथा में पहली बार हार्वर्ड के प्रतिष्ठित परिसर में रामचरितमानस की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा की प्रस्तुति हो रही है।
कार्यक्रम का स्वागत हार्वर्ड विश्वविद्यालय के लक्ष्मी मित्तल एंड फैमिली साउथ एशिया इंस्टीट्यूट के कार्यकारी निदेशक हितेश हाथी ने किया। संस्थान की फैकल्टी निदेशक प्रो. डायना एक ने रामायण को भारत के जीवंत भू-दृश्य से जोड़ते हुए कहा कि राम, सीता और लक्ष्मण की वन यात्रा ने भारत के अनेक स्थानों को तीर्थ के रूप में स्थापित किया। उन्होंने कहा कि रामायण केवल एक कथा या मानचित्र नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा और भू-दृश्य है, जो भारत से आगे थाईलैंड, इंडोनेशिया और कंबोडिया तक फैला है।
सत्य, प्रेम और करुणा को बनाया केंद्र
मोरारी बापू ने कहा कि यह कथा सावन मास और तुलसी जयंती के संदर्भ में आयोजित हो रही है। उन्होंने कहा कि यहां ज्ञान दीप नहीं, बल्कि प्रेम ज्योति प्रज्वलित की गई है। कथा के माध्यम से सत्य, प्रेम और करुणा के संदेश को दुनिया तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
बापू ने कहा, “लौकिक, अलौकिक छोड़कर मौलिक हो जाएं।” उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान व्यक्त किया और कहा कि प्रोटोकॉल के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज को सलाम किया जाता है, लेकिन भारतीय ध्वज को प्रणाम करने का मन करता है।
कथा की केंद्रीय विषयवस्तु रामचरितमानस की तीन चौपाइयों पर आधारित है, जिनमें गुरु प्रसाद, ज्ञान और संरक्षण की भावना को प्रमुखता दी गई है।
19 अगस्त को पहली बार अमेरिका में तुलसी जयंती समारोह
19 अगस्त को गोस्वामी तुलसीदास की जयंती के अवसर पर सैंडर्स थिएटर में तुलसी, व्यास, वाल्मीकि और रत्नावली पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। आयोजकों के अनुसार, इन पुरस्कारों का भारत से बाहर पहली बार आयोजन हो रहा है।
मोरारी बापू ने वर्ष 2010 में तुलसी जयंती कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य रामकथा और रामचरितमानस की परंपरा को संरक्षित करने, उसकी व्याख्या करने और उसे आगे बढ़ाने में योगदान देने वाले संतों, विद्वानों और कथाकारों को सम्मानित करना रहा है। अब 2026 में यह परंपरा पहली बार भारत से बाहर अमेरिका पहुंची है।
तीन दिवसीय विद्वतापूर्ण व्याख्यान श्रृंखला भी
नौ दिवसीय राम कथा के साथ 16 से 18 अगस्त तक तीन दिवसीय विद्वतापूर्ण व्याख्यान श्रृंखला भी आयोजित की जा रही है। कार्यक्रम में कथाकारों, संतों, विद्वानों, संगीतकारों, कलाकारों और अंतरराष्ट्रीय शिक्षाविदों का प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ है।
प्रतिनिधिमंडल में पूज्य मां मंदाकिनी जी (अयोध्या), पूज्य भूपेंद्रभाई पंड्या जी, डॉ. श्री पुंडरीक गोस्वामी जी (वृंदावन), श्री उमा शंकर शर्मा और जगद्गुरु श्री रामकमलदास वेदांती जी महाराज (वाराणसी) सहित कई संत और विद्वान शामिल हैं।
आयोजन टीम के पावन पोपट OBE ने कहा कि नौ दिनों तक दुनिया की प्राचीन कथा परंपराओं में से एक और दुनिया के प्रमुख शिक्षण केंद्रों में से एक एक ही परिसर में एक-दूसरे को सुनेंगे। उन्होंने कहा कि इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता मंच नहीं, बल्कि भारत के विभिन्न तीर्थ क्षेत्रों से आए संत और विद्वान हैं, जिनमें कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने पहले कभी भारत से बाहर यात्रा नहीं की थी।
हार्वर्ड के ऐतिहासिक मंच पर भारतीय आध्यात्मिक परंपरा
मेमोरियल हॉल का सैंडर्स थिएटर लंबे समय से वैश्विक स्तर के विचारकों और वक्ताओं की मेजबानी करता रहा है। यहां विंस्टन चर्चिल, मार्टिन लूथर किंग जूनियर और टी.एस. एलियट जैसे व्यक्तित्व अपने विचार व्यक्त कर चुके हैं।
हार्वर्ड और भारत के बीच भी लंबे समय से बौद्धिक संबंध रहे हैं। भारत के पहले नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर ने 1913 में हार्वर्ड में भारतीय दर्शन और उपनिषदों पर व्याख्यान दिए थे। नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन भी लंबे समय तक हार्वर्ड में अध्यापन से जुड़े रहे।
900 से अधिक स्थानों पर कर चुके हैं राम कथा
मोरारी बापू दुनिया के विभिन्न देशों में 900 से अधिक स्थानों पर 980 से ज्यादा राम कथाएं कर चुके हैं। उनकी कथाएं वेटिकन, न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय और 2023 में यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज जैसे प्रतिष्ठित वैश्विक मंचों पर भी आयोजित हो चुकी हैं। अब हार्वर्ड भी इस सूची में शामिल हो गया है।
आयोजकों के अनुसार, भारत से आए प्रतिनिधिमंडल के किसी भी सदस्य को आयोजन में भाग लेने के लिए भुगतान नहीं किया गया है। पूरे प्रतिनिधिमंडल की यात्रा, ठहरने और भोजन का खर्च धर्मार्थ संस्थाओं द्वारा वहन किया गया है।
आयोजकों का कहना है कि हार्वर्ड में आयोजित यह कार्यक्रम भारत की कहानी को दुनिया को समझाने का प्रयास मात्र नहीं, बल्कि भारत की अपनी आवाज में उसकी आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक परंपरा को वैश्विक मंच तक पहुंचाने का अवसर है।
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