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ईरान-इजराइल जंग पर खामेनेई का बड़ा दावा, बोले—दुश्मन नाकाम; ट्रम्प ने NATO को बताया ‘कायर’
अंतराष्ट्रीय न्यूज
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान में एकजुटता का दावा, अमेरिका-इजराइल की सैन्य कार्रवाई जारी
मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच संघर्ष के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जंग में दुश्मन अपने मकसद में नाकाम रहा और ईरानी जनता उम्मीद के विपरीत सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि उसके साथ खड़ी नजर आई।
नौरोज के अवसर पर जारी संदेश में खामेनेई ने कहा कि शुरुआती हमलों के बाद उन्हें आशंका थी कि देश में डर और असंतोष बढ़ेगा, लेकिन वास्तविकता इसके उलट रही। उनके मुताबिक, विभिन्न मतभेदों के बावजूद देश में एकजुटता बनी रही, जिसने विरोधी पक्ष की रणनीति को कमजोर कर दिया।
उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस युद्ध को लेकर NATO देशों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सहयोगी देश ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में साथ देने से पीछे हटे और उन्हें “कायर” करार दिया। ट्रम्प के अनुसार, अमेरिका ने सैन्य बढ़त हासिल कर ली है और फिलहाल युद्धविराम का कोई इरादा नहीं है।
मौजूदा संघर्ष 28 फरवरी से तेज हुआ, जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले शुरू किए। इसके जवाब में ईरान ने भी मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए जवाबी कार्रवाई की। हालात इतने गंभीर हो गए कि क्षेत्र के कई हिस्सों में लगातार एयर अलर्ट और हमलों की खबरें सामने आ रही हैं।
मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, इस संघर्ष में अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या में आम नागरिक भी शामिल हैं। हालांकि, आधिकारिक आंकड़ों और स्वतंत्र रिपोर्टों में अंतर बना हुआ है, जिससे स्थिति की सटीक तस्वीर स्पष्ट नहीं हो पा रही है।
इस बीच, वैश्विक स्तर पर भी इस जंग का असर साफ दिख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया के करीब 20% तेल आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है, तनाव के कारण प्रभावित हुआ है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
भारत समेत कई देशों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। सूत्रों के अनुसार, भारतीय एलपीजी टैंकर भी इस मार्ग से गुजरने की तैयारी में हैं, लेकिन सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। भारत सरकार ने क्षेत्र में मौजूद अपने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की बात कही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर भी गहरा असर डाल सकता है। अमेरिका की ओर से ईरानी तेल पर आंशिक छूट और सैन्य कार्रवाई एक साथ जारी रखना इस जटिल स्थिति को और पेचीदा बना रहा है।
आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या कूटनीतिक प्रयास तेज होते हैं या सैन्य टकराव और बढ़ता है। फिलहाल, मिडिल ईस्ट में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और दुनिया की नजर इस संघर्ष के अगले कदम पर टिकी है।
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ईरान-इजराइल जंग पर खामेनेई का बड़ा दावा, बोले—दुश्मन नाकाम; ट्रम्प ने NATO को बताया ‘कायर’
अंतराष्ट्रीय न्यूज
मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच संघर्ष के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जंग में दुश्मन अपने मकसद में नाकाम रहा और ईरानी जनता उम्मीद के विपरीत सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि उसके साथ खड़ी नजर आई।
नौरोज के अवसर पर जारी संदेश में खामेनेई ने कहा कि शुरुआती हमलों के बाद उन्हें आशंका थी कि देश में डर और असंतोष बढ़ेगा, लेकिन वास्तविकता इसके उलट रही। उनके मुताबिक, विभिन्न मतभेदों के बावजूद देश में एकजुटता बनी रही, जिसने विरोधी पक्ष की रणनीति को कमजोर कर दिया।
उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस युद्ध को लेकर NATO देशों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सहयोगी देश ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में साथ देने से पीछे हटे और उन्हें “कायर” करार दिया। ट्रम्प के अनुसार, अमेरिका ने सैन्य बढ़त हासिल कर ली है और फिलहाल युद्धविराम का कोई इरादा नहीं है।
मौजूदा संघर्ष 28 फरवरी से तेज हुआ, जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले शुरू किए। इसके जवाब में ईरान ने भी मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए जवाबी कार्रवाई की। हालात इतने गंभीर हो गए कि क्षेत्र के कई हिस्सों में लगातार एयर अलर्ट और हमलों की खबरें सामने आ रही हैं।
मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, इस संघर्ष में अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या में आम नागरिक भी शामिल हैं। हालांकि, आधिकारिक आंकड़ों और स्वतंत्र रिपोर्टों में अंतर बना हुआ है, जिससे स्थिति की सटीक तस्वीर स्पष्ट नहीं हो पा रही है।
इस बीच, वैश्विक स्तर पर भी इस जंग का असर साफ दिख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया के करीब 20% तेल आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है, तनाव के कारण प्रभावित हुआ है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
भारत समेत कई देशों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। सूत्रों के अनुसार, भारतीय एलपीजी टैंकर भी इस मार्ग से गुजरने की तैयारी में हैं, लेकिन सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। भारत सरकार ने क्षेत्र में मौजूद अपने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की बात कही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर भी गहरा असर डाल सकता है। अमेरिका की ओर से ईरानी तेल पर आंशिक छूट और सैन्य कार्रवाई एक साथ जारी रखना इस जटिल स्थिति को और पेचीदा बना रहा है।
आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या कूटनीतिक प्रयास तेज होते हैं या सैन्य टकराव और बढ़ता है। फिलहाल, मिडिल ईस्ट में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और दुनिया की नजर इस संघर्ष के अगले कदम पर टिकी है।
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