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अल-अक्सा मस्जिद 60 साल में पहली बार ईद पर बंद, जंग की छाया में मिडिल ईस्ट
अंतराष्ट्रीय न्यूज
ईरान-इजराइल संघर्ष के बीच खाड़ी देशों में भी ईद की नमाज पर पाबंदियां, वैश्विक असर स्पष्ट
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच इस बार ईद-उल-फितर अभूतपूर्व परिस्थितियों में मनाई जा रही है। इजराइल के यरुशलम स्थित अल-अक्सा मस्जिद को सुरक्षा कारणों से पूरी तरह बंद कर दिया गया, जो 1967 के अरब-इजराइल युद्ध के बाद पहली बार हुआ है। यह इस्लाम का तीसरा सबसे पवित्र स्थल माना जाता है।
शुक्रवार को यरुशलम के ओल्ड सिटी इलाके में एक ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल का मलबा गिरने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने एहतियात बढ़ा दी। यह मलबा वेस्टर्न वॉल और अल-अक्सा मस्जिद से करीब 400 गज की दूरी पर गिरा। इसके बाद पूरे इलाके में आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई
28 फरवरी से अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब 22वें दिन में पहुंच चुका है। लगातार हो रहे हमलों और सुरक्षा खतरों के चलते इजराइली प्रशासन ने धार्मिक स्थलों पर भीड़ को सीमित करने का फैसला लिया।
6 मार्च से यरुशलम के प्रमुख धार्मिक स्थलों—अल-अक्सा, वेस्टर्न वॉल और चर्च ऑफ द होली सेपल्कर—को आम लोगों के लिए बंद रखा गया है। केवल सीमित संख्या में स्थानीय लोगों को ही प्रवेश की अनुमति दी गई।
कैसे प्रभावित हुई ईद?
यरुशलम में ईद की नमाज के दौरान कई स्थानों पर तनाव भी देखने को मिला। पुराने शहर के गेट पर नमाजियों और पुलिस के बीच झड़प हुई, जब लोगों ने अंदर प्रवेश की कोशिश की।
ईरान में भी ईद का उत्साह फीका रहा। युद्ध और आर्थिक दबाव के कारण बाजार सूने दिखे और लोगों ने सादगी से त्योहार मनाया। कई परिवारों ने हालिया हमलों में मारे गए बच्चों को श्रद्धांजलि दी।
खाड़ी देशों—UAE, कतर और कुवैत—में सुरक्षा कारणों से खुले मैदानों में सामूहिक नमाज पर रोक लगाई गई। हालांकि मस्जिदों में सीमित संख्या में नमाज की अनुमति दी गई।
अन्य देशों में हालात
गाजा में युद्ध और महंगाई के बीच ईद मनाई गई, जहां जरूरी सामानों के दाम बढ़ गए हैं। लेबनान में हजारों लोग शरणार्थी शिविरों में ईद मना रहे हैं।
इसके विपरीत रूस और तुर्किये में बड़े स्तर पर नमाज आयोजित हुई। मॉस्को में करीब 2 लाख लोग मस्जिदों में जुटे, जबकि इस्तांबुल में भी बड़ी संख्या में लोगों ने नमाज अदा की।
ब्रिटेन के बर्मिंघम में भी हजारों लोग खुले मैदान में एकत्र हुए, जो अन्य क्षेत्रों की तुलना में सामान्य स्थिति को दर्शाता है।
विश्लेषकों के मुताबिक, यह स्थिति मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और धार्मिक आयोजनों पर उसके असर का संकेत है। यदि संघर्ष जारी रहा, तो आने वाले दिनों में और कड़े प्रतिबंध लागू हो सकते हैं।
इस बीच पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने ईद के अवसर पर अस्थायी युद्धविराम की घोषणा की है, जिसे क्षेत्रीय शांति की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
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अल-अक्सा मस्जिद 60 साल में पहली बार ईद पर बंद, जंग की छाया में मिडिल ईस्ट
अंतराष्ट्रीय न्यूज
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच इस बार ईद-उल-फितर अभूतपूर्व परिस्थितियों में मनाई जा रही है। इजराइल के यरुशलम स्थित अल-अक्सा मस्जिद को सुरक्षा कारणों से पूरी तरह बंद कर दिया गया, जो 1967 के अरब-इजराइल युद्ध के बाद पहली बार हुआ है। यह इस्लाम का तीसरा सबसे पवित्र स्थल माना जाता है।
शुक्रवार को यरुशलम के ओल्ड सिटी इलाके में एक ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल का मलबा गिरने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने एहतियात बढ़ा दी। यह मलबा वेस्टर्न वॉल और अल-अक्सा मस्जिद से करीब 400 गज की दूरी पर गिरा। इसके बाद पूरे इलाके में आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई
28 फरवरी से अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब 22वें दिन में पहुंच चुका है। लगातार हो रहे हमलों और सुरक्षा खतरों के चलते इजराइली प्रशासन ने धार्मिक स्थलों पर भीड़ को सीमित करने का फैसला लिया।
6 मार्च से यरुशलम के प्रमुख धार्मिक स्थलों—अल-अक्सा, वेस्टर्न वॉल और चर्च ऑफ द होली सेपल्कर—को आम लोगों के लिए बंद रखा गया है। केवल सीमित संख्या में स्थानीय लोगों को ही प्रवेश की अनुमति दी गई।
कैसे प्रभावित हुई ईद?
यरुशलम में ईद की नमाज के दौरान कई स्थानों पर तनाव भी देखने को मिला। पुराने शहर के गेट पर नमाजियों और पुलिस के बीच झड़प हुई, जब लोगों ने अंदर प्रवेश की कोशिश की।
ईरान में भी ईद का उत्साह फीका रहा। युद्ध और आर्थिक दबाव के कारण बाजार सूने दिखे और लोगों ने सादगी से त्योहार मनाया। कई परिवारों ने हालिया हमलों में मारे गए बच्चों को श्रद्धांजलि दी।
खाड़ी देशों—UAE, कतर और कुवैत—में सुरक्षा कारणों से खुले मैदानों में सामूहिक नमाज पर रोक लगाई गई। हालांकि मस्जिदों में सीमित संख्या में नमाज की अनुमति दी गई।
अन्य देशों में हालात
गाजा में युद्ध और महंगाई के बीच ईद मनाई गई, जहां जरूरी सामानों के दाम बढ़ गए हैं। लेबनान में हजारों लोग शरणार्थी शिविरों में ईद मना रहे हैं।
इसके विपरीत रूस और तुर्किये में बड़े स्तर पर नमाज आयोजित हुई। मॉस्को में करीब 2 लाख लोग मस्जिदों में जुटे, जबकि इस्तांबुल में भी बड़ी संख्या में लोगों ने नमाज अदा की।
ब्रिटेन के बर्मिंघम में भी हजारों लोग खुले मैदान में एकत्र हुए, जो अन्य क्षेत्रों की तुलना में सामान्य स्थिति को दर्शाता है।
विश्लेषकों के मुताबिक, यह स्थिति मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और धार्मिक आयोजनों पर उसके असर का संकेत है। यदि संघर्ष जारी रहा, तो आने वाले दिनों में और कड़े प्रतिबंध लागू हो सकते हैं।
इस बीच पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने ईद के अवसर पर अस्थायी युद्धविराम की घोषणा की है, जिसे क्षेत्रीय शांति की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
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