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प्रीमियम पेट्रोल महंगा, भोपाल में 117 प्रति लीटर पार; इंडस्ट्रियल फ्यूल में 25% बढ़ोतरी
बिजनेस न्यूज
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर, कंपनियों ने प्रीमियम फ्यूल और औद्योगिक ईंधन के दाम बढ़ाए
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर अब देश के प्रीमियम पेट्रोल और औद्योगिक ईंधन पर साफ दिखाई देने लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने 20 मार्च को प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में ₹2.09 से ₹2.35 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की है। इसके बाद भोपाल में प्रीमियम पेट्रोल की कीमत करीब ₹117 प्रति लीटर तक पहुंच गई है, जबकि सामान्य पेट्रोल के दाम फिलहाल स्थिर रखे गए हैं।
तेल कंपनियों के अनुसार यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से कच्चे तेल की लागत और प्रीमियम फ्यूल में इस्तेमाल होने वाले एडिटिव्स की कीमत बढ़ने के कारण की गई है। नई दिल्ली में भी प्रीमियम पेट्रोल की कीमत अब ₹107 से ₹112.30 प्रति लीटर के बीच पहुंच गई है।
भारत पेट्रोलियम (BPCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और इंडियन ऑयल (IOCL) अपनी-अपनी प्रीमियम श्रेणी के पेट्रोल को क्रमशः ‘स्पीड’, ‘पावर’ और ‘XP95’ ब्रांड नाम से बेचती हैं। इनकी कीमत सामान्य पेट्रोल के मुकाबले पहले से ही 10-12 रुपए अधिक होती है, क्योंकि इनमें उच्च गुणवत्ता वाले एडिटिव्स और अधिक ऑक्टेन स्तर का उपयोग किया जाता है।
इसी के साथ इंडियन ऑयल ने इंडस्ट्रियल फ्यूल की कीमतों में भी करीब 25% की बढ़ोतरी की है। इसकी कीमत ₹87.67 प्रति लीटर से बढ़कर ₹109.59 प्रति लीटर हो गई है। इस ईंधन का उपयोग रेलवे, बस सेवाओं, फैक्ट्रियों, अस्पतालों और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में किया जाता है, जिससे उत्पादन लागत पर भी असर पड़ने की आशंका है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 150 डॉलर के पार पहुंचने से तेल कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ा है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और सप्लाई बाधाओं के चलते यह स्थिति बनी है। ऐसे में कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए प्रीमियम और औद्योगिक ईंधन की कीमतों में वृद्धि की है।
हालांकि, पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि प्रीमियम पेट्रोल की बिक्री कुल खपत का केवल 3-4% हिस्सा है, इसलिए आम उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर सीमित रहेगा। फिर भी, अगर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो आने वाले समय में सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी बदलाव संभव है।
तकनीकी रूप से देखें तो प्रीमियम पेट्रोल का ऑक्टेन नंबर 95 से 100 के बीच होता है, जो इंजन को बेहतर प्रदर्शन और लंबी उम्र देने में मदद करता है। हालांकि, विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सामान्य वाहनों के लिए प्रीमियम पेट्रोल आवश्यक नहीं है, जबकि हाई-परफॉर्मेंस और लग्जरी गाड़ियों में इसका उपयोग जरूरी हो सकता है।
फिलहाल बाजार और उपभोक्ता दोनों की नजर कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों पर टिकी है, क्योंकि इसी के आधार पर आगे ईंधन दरों में बदलाव तय होगा।
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प्रीमियम पेट्रोल महंगा, भोपाल में 117 प्रति लीटर पार; इंडस्ट्रियल फ्यूल में 25% बढ़ोतरी
बिजनेस न्यूज
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर अब देश के प्रीमियम पेट्रोल और औद्योगिक ईंधन पर साफ दिखाई देने लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने 20 मार्च को प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में ₹2.09 से ₹2.35 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की है। इसके बाद भोपाल में प्रीमियम पेट्रोल की कीमत करीब ₹117 प्रति लीटर तक पहुंच गई है, जबकि सामान्य पेट्रोल के दाम फिलहाल स्थिर रखे गए हैं।
तेल कंपनियों के अनुसार यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से कच्चे तेल की लागत और प्रीमियम फ्यूल में इस्तेमाल होने वाले एडिटिव्स की कीमत बढ़ने के कारण की गई है। नई दिल्ली में भी प्रीमियम पेट्रोल की कीमत अब ₹107 से ₹112.30 प्रति लीटर के बीच पहुंच गई है।
भारत पेट्रोलियम (BPCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और इंडियन ऑयल (IOCL) अपनी-अपनी प्रीमियम श्रेणी के पेट्रोल को क्रमशः ‘स्पीड’, ‘पावर’ और ‘XP95’ ब्रांड नाम से बेचती हैं। इनकी कीमत सामान्य पेट्रोल के मुकाबले पहले से ही 10-12 रुपए अधिक होती है, क्योंकि इनमें उच्च गुणवत्ता वाले एडिटिव्स और अधिक ऑक्टेन स्तर का उपयोग किया जाता है।
इसी के साथ इंडियन ऑयल ने इंडस्ट्रियल फ्यूल की कीमतों में भी करीब 25% की बढ़ोतरी की है। इसकी कीमत ₹87.67 प्रति लीटर से बढ़कर ₹109.59 प्रति लीटर हो गई है। इस ईंधन का उपयोग रेलवे, बस सेवाओं, फैक्ट्रियों, अस्पतालों और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में किया जाता है, जिससे उत्पादन लागत पर भी असर पड़ने की आशंका है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 150 डॉलर के पार पहुंचने से तेल कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ा है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और सप्लाई बाधाओं के चलते यह स्थिति बनी है। ऐसे में कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए प्रीमियम और औद्योगिक ईंधन की कीमतों में वृद्धि की है।
हालांकि, पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि प्रीमियम पेट्रोल की बिक्री कुल खपत का केवल 3-4% हिस्सा है, इसलिए आम उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर सीमित रहेगा। फिर भी, अगर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो आने वाले समय में सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी बदलाव संभव है।
तकनीकी रूप से देखें तो प्रीमियम पेट्रोल का ऑक्टेन नंबर 95 से 100 के बीच होता है, जो इंजन को बेहतर प्रदर्शन और लंबी उम्र देने में मदद करता है। हालांकि, विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सामान्य वाहनों के लिए प्रीमियम पेट्रोल आवश्यक नहीं है, जबकि हाई-परफॉर्मेंस और लग्जरी गाड़ियों में इसका उपयोग जरूरी हो सकता है।
फिलहाल बाजार और उपभोक्ता दोनों की नजर कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों पर टिकी है, क्योंकि इसी के आधार पर आगे ईंधन दरों में बदलाव तय होगा।
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