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टीएमसी में बगावत के बीच ममता बनर्जी का बड़ा संदेश, बोलीं- मुझे रोकना है तो मारना पड़ेगा
Digital Desk
बागी नेताओं को खुली चुनौती देते हुए कहा- अगर हिम्मत है तो खुलकर दूसरी पार्टी में शामिल हों, पार्टी के चुनाव चिह्न और संगठन को मजबूत बनाए रखने का किया दावा।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी संगठनात्मक खींचतान के बीच पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि वह किसी भी परिस्थिति में पीछे हटने वाली नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी को उन्हें रोकना है तो उसे उन्हें खत्म करना पड़ेगा, क्योंकि उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता। ममता बनर्जी ने कहा कि वह पार्टी के चुनाव चिह्न और संगठन के साथ जनता के बीच लगातार सक्रिय रहेंगी। साथ ही उन्होंने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को भी खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे उनके नेतृत्व से सहमत नहीं हैं तो खुलकर दूसरी पार्टी का दामन थाम लें। उनके इस बयान को टीएमसी में जारी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच अहम माना जा रहा है।
ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में कहा कि तृणमूल कांग्रेस केवल एक राजनीतिक दल नहीं बल्कि लाखों कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के विश्वास का परिणाम है। उन्होंने कहा कि पार्टी का चुनाव चिह्न और उसकी पहचान किसी व्यक्ति विशेष की नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं की वर्षों की मेहनत से बनी है। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता संगठन को और अधिक मजबूत बनाएंगे तथा जनता के बीच पार्टी की विचारधारा को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन संगठन के साथ विश्वासघात उचित नहीं माना जा सकता।
पूर्व मुख्यमंत्री ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों ने पार्टी के टिकट और चुनाव चिह्न पर जनता का समर्थन हासिल किया, वही आज संगठन से अलग राह पर चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें जिस विश्वास के साथ चुना था, उस विश्वास का सम्मान करना हर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। ममता ने कहा कि राजनीति में विचारों का अंतर हो सकता है, लेकिन किसी भी संगठन के प्रति निष्ठा और जिम्मेदारी का भी महत्व होता है। उन्होंने अपने समर्थकों से अपील की कि वे किसी भी परिस्थिति में निराश न हों और संगठन को मजबूत करने के लिए लगातार काम करते रहें।
हाल के दिनों में टीएमसी के भीतर कई नेताओं के अलग गुट बनाने की खबरों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। पार्टी के कई विधायक और सांसद संगठन से अलग होकर नए राजनीतिक विकल्पों की ओर बढ़ चुके हैं। इसी पृष्ठभूमि में ममता बनर्जी का यह बयान सामने आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संदेश मुख्य रूप से पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने और संगठनात्मक एकजुटता को मजबूत करने के उद्देश्य से दिया गया है।
इसी बीच टीएमसी की पश्चिम बंगाल इकाई की अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद राज्य की राजनीति में हलचल और तेज हो गई। हालांकि पार्टी की ओर से संगठनात्मक स्तर पर आगे की रणनीति तैयार की जा रही है और नए पदाधिकारियों की नियुक्ति को लेकर भी विचार-विमर्श जारी है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले दिनों में पार्टी संगठन में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
बताया जा रहा है कि पार्टी से अलग हुए नेताओं ने अपने स्तर पर नया गुट तैयार किया है और संगठनात्मक दावों को लेकर भी सक्रियता दिखाई है। चुनाव आयोग के समक्ष भी विभिन्न प्रक्रियाओं के तहत अपनी बात रखने की कवायद जारी है। राजनीतिक मामलों के जानकारों के अनुसार ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत ही लिया जाता है। इसलिए पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठनात्मक मान्यता से जुड़े सभी विषय निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार तय होंगे।
ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि किसी भवन या कार्यालय पर अधिकार जताने से जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल की सबसे बड़ी ताकत उसके कार्यकर्ता और आम लोग होते हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता भविष्य में भी संगठन को मजबूत बनाए रखेंगे और जनता के बीच सक्रिय रहेंगे। उन्होंने कहा कि संघर्ष उनकी राजनीतिक यात्रा का हिस्सा रहा है और आगे भी वह पूरी मजबूती के साथ जनता के बीच काम करती रहेंगी।
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टीएमसी में बगावत के बीच ममता बनर्जी का बड़ा संदेश, बोलीं- मुझे रोकना है तो मारना पड़ेगा
Digital Desk
पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी संगठनात्मक खींचतान के बीच पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि वह किसी भी परिस्थिति में पीछे हटने वाली नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी को उन्हें रोकना है तो उसे उन्हें खत्म करना पड़ेगा, क्योंकि उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता। ममता बनर्जी ने कहा कि वह पार्टी के चुनाव चिह्न और संगठन के साथ जनता के बीच लगातार सक्रिय रहेंगी। साथ ही उन्होंने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को भी खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे उनके नेतृत्व से सहमत नहीं हैं तो खुलकर दूसरी पार्टी का दामन थाम लें। उनके इस बयान को टीएमसी में जारी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच अहम माना जा रहा है।
ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में कहा कि तृणमूल कांग्रेस केवल एक राजनीतिक दल नहीं बल्कि लाखों कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के विश्वास का परिणाम है। उन्होंने कहा कि पार्टी का चुनाव चिह्न और उसकी पहचान किसी व्यक्ति विशेष की नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं की वर्षों की मेहनत से बनी है। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता संगठन को और अधिक मजबूत बनाएंगे तथा जनता के बीच पार्टी की विचारधारा को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन संगठन के साथ विश्वासघात उचित नहीं माना जा सकता।
पूर्व मुख्यमंत्री ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों ने पार्टी के टिकट और चुनाव चिह्न पर जनता का समर्थन हासिल किया, वही आज संगठन से अलग राह पर चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें जिस विश्वास के साथ चुना था, उस विश्वास का सम्मान करना हर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। ममता ने कहा कि राजनीति में विचारों का अंतर हो सकता है, लेकिन किसी भी संगठन के प्रति निष्ठा और जिम्मेदारी का भी महत्व होता है। उन्होंने अपने समर्थकों से अपील की कि वे किसी भी परिस्थिति में निराश न हों और संगठन को मजबूत करने के लिए लगातार काम करते रहें।
हाल के दिनों में टीएमसी के भीतर कई नेताओं के अलग गुट बनाने की खबरों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। पार्टी के कई विधायक और सांसद संगठन से अलग होकर नए राजनीतिक विकल्पों की ओर बढ़ चुके हैं। इसी पृष्ठभूमि में ममता बनर्जी का यह बयान सामने आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संदेश मुख्य रूप से पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने और संगठनात्मक एकजुटता को मजबूत करने के उद्देश्य से दिया गया है।
इसी बीच टीएमसी की पश्चिम बंगाल इकाई की अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद राज्य की राजनीति में हलचल और तेज हो गई। हालांकि पार्टी की ओर से संगठनात्मक स्तर पर आगे की रणनीति तैयार की जा रही है और नए पदाधिकारियों की नियुक्ति को लेकर भी विचार-विमर्श जारी है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले दिनों में पार्टी संगठन में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
बताया जा रहा है कि पार्टी से अलग हुए नेताओं ने अपने स्तर पर नया गुट तैयार किया है और संगठनात्मक दावों को लेकर भी सक्रियता दिखाई है। चुनाव आयोग के समक्ष भी विभिन्न प्रक्रियाओं के तहत अपनी बात रखने की कवायद जारी है। राजनीतिक मामलों के जानकारों के अनुसार ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत ही लिया जाता है। इसलिए पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठनात्मक मान्यता से जुड़े सभी विषय निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार तय होंगे।
ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि किसी भवन या कार्यालय पर अधिकार जताने से जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल की सबसे बड़ी ताकत उसके कार्यकर्ता और आम लोग होते हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता भविष्य में भी संगठन को मजबूत बनाए रखेंगे और जनता के बीच सक्रिय रहेंगे। उन्होंने कहा कि संघर्ष उनकी राजनीतिक यात्रा का हिस्सा रहा है और आगे भी वह पूरी मजबूती के साथ जनता के बीच काम करती रहेंगी।
