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रायपुर में 8 से 14 जुलाई तक देवकीनंदन ठाकुर की श्रीमद्भागवत कथा, ‘नो तिलक-नो एंट्री’ नियम रहेगा लागू
रायपुर,(छ.ग.)
बूढ़ापारा इंडोर स्टेडियम में सात दिवसीय धार्मिक आयोजन, प्रतिदिन दोपहर 3:30 बजे से कथा; कलश यात्रा, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, महारास सहित कई विशेष कार्यक्रम होंगे, आस्था चैनल और यूट्यूब पर होगा सीधा प्रसारण।
राजधानी रायपुर एक बार फिर भक्ति, आध्यात्म और सनातन संस्कृति के रंग में रंगने जा रही है। शहर के बूढ़ापारा स्थित इंडोर स्टेडियम में 8 जुलाई से 14 जुलाई तक प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन किया जाएगा। यह सात दिवसीय धार्मिक आयोजन अंतरराष्ट्रीय वैश्य फेडरेशन के तत्वावधान में आयोजित होगा, जिसमें छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
आयोजकों के अनुसार कथा का शुभारंभ प्रतिदिन दोपहर 3:30 बजे होगा। सात दिनों तक श्रीमद्भागवत की विभिन्न लीलाओं, भगवान श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों और सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों पर आधारित प्रवचन होंगे। कथा के साथ भजन, संकीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का भी आयोजन किया जाएगा।
इस बार आयोजन की सबसे विशेष बात ‘नो तिलक, नो एंट्री’ अभियान है। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि कथा स्थल पर प्रवेश से पहले सभी अपने माथे पर तिलक अवश्य लगाकर आएं। उनका कहना है कि यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति के सम्मान और उसकी पहचान का प्रतीक है। इस पहल का उद्देश्य लोगों में अपनी धार्मिक परंपराओं के प्रति जागरूकता और गौरव की भावना विकसित करना है।
आयोजन समिति का मानना है कि वर्तमान समय में भारतीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए ऐसे प्रयास आवश्यक हैं। तिलक लगाने की परंपरा भारतीय संस्कृति में सदियों से चली आ रही है और इसे आध्यात्मिक ऊर्जा, सकारात्मकता तथा धार्मिक पहचान का प्रतीक माना जाता है। इसी संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाने के लिए कथा स्थल पर इस नियम को लागू किया गया है।
कार्यक्रम की शुरुआत 8 जुलाई को भव्य कलश यात्रा और भागवत महात्म्य के साथ होगी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाएं और श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में कलश यात्रा में शामिल होंगे। इसके बाद प्रतिदिन श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों का विस्तृत वर्णन किया जाएगा।
9 जुलाई को भीष्म पितामह, माता कुंती के आगमन तथा पूतना वध की कथा सुनाई जाएगी। 10 जुलाई को गोवर्धन पूजा, अन्नकूट महोत्सव और छप्पन भोग का विशेष आयोजन रहेगा। श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और गोवर्धन पर्वत की महिमा से जुड़े प्रसंग सुनने का अवसर मिलेगा।
11 जुलाई को वामन अवतार, भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का भव्य आयोजन किया जाएगा। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के दौरान आकर्षक झांकियां, भजन और विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की जाएंगी, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाएगा।
12 जुलाई को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं, माखन चोरी, गोवर्धन पूजन और छप्पन भोग का आयोजन होगा। इसके बाद 13 जुलाई को महारास, सुदामा मिलन, रुक्मिणी विवाह और चिंतक विदाई जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। इन आयोजनों में भक्ति संगीत और धार्मिक प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
सात दिवसीय कथा का समापन 14 जुलाई को सुदामा चरित्र, कंस वध और हवन-पूजन के साथ होगा। अंतिम दिन श्रद्धालु सामूहिक रूप से पूर्णाहुति में शामिल होंगे और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से आयोजन का समापन किया जाएगा।
आयोजन समिति ने बताया कि कथा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। कथा स्थल पर बैठने, पेयजल, पार्किंग, सुरक्षा और चिकित्सा जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। प्रशासन और स्वयंसेवकों की टीम आयोजन को व्यवस्थित और सुचारु रूप से संचालित करने में सहयोग करेगी।
जो श्रद्धालु किसी कारणवश रायपुर नहीं पहुंच पाएंगे, उनके लिए कथा का सीधा प्रसारण भी किया जाएगा। आयोजन का लाइव टेलीकास्ट आस्था चैनल और यूट्यूब के माध्यम से प्रसारित होगा, जिससे देश-विदेश में बैठे श्रद्धालु भी कथा का लाभ ले सकेंगे।
आयोजन से पहले अंतरराष्ट्रीय वैश्य फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष योगेश अग्रवाल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका से राजभवन में मुलाकात कर उन्हें कथा में शामिल होने का निमंत्रण दिया। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश महामंत्री एवं प्रवक्ता राजकुमार राठी सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। राज्यपाल ने आयोजन के लिए शुभकामनाएं देते हुए निमंत्रण स्वीकार किया और धार्मिक आयोजनों के सामाजिक महत्व की सराहना की।
आयोजन समिति का कहना है कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों, पारिवारिक संस्कारों और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। देवकीनंदन ठाकुर अपने सहज, सरल और प्रेरणादायी प्रवचनों के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध हैं। उनके कथा कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं और सामाजिक समरसता, आध्यात्मिक जागरूकता तथा सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा मिलता है।
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रायपुर में 8 से 14 जुलाई तक देवकीनंदन ठाकुर की श्रीमद्भागवत कथा, ‘नो तिलक-नो एंट्री’ नियम रहेगा लागू
रायपुर,(छ.ग.)
राजधानी रायपुर एक बार फिर भक्ति, आध्यात्म और सनातन संस्कृति के रंग में रंगने जा रही है। शहर के बूढ़ापारा स्थित इंडोर स्टेडियम में 8 जुलाई से 14 जुलाई तक प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन किया जाएगा। यह सात दिवसीय धार्मिक आयोजन अंतरराष्ट्रीय वैश्य फेडरेशन के तत्वावधान में आयोजित होगा, जिसमें छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
आयोजकों के अनुसार कथा का शुभारंभ प्रतिदिन दोपहर 3:30 बजे होगा। सात दिनों तक श्रीमद्भागवत की विभिन्न लीलाओं, भगवान श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों और सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों पर आधारित प्रवचन होंगे। कथा के साथ भजन, संकीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का भी आयोजन किया जाएगा।
इस बार आयोजन की सबसे विशेष बात ‘नो तिलक, नो एंट्री’ अभियान है। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि कथा स्थल पर प्रवेश से पहले सभी अपने माथे पर तिलक अवश्य लगाकर आएं। उनका कहना है कि यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति के सम्मान और उसकी पहचान का प्रतीक है। इस पहल का उद्देश्य लोगों में अपनी धार्मिक परंपराओं के प्रति जागरूकता और गौरव की भावना विकसित करना है।
आयोजन समिति का मानना है कि वर्तमान समय में भारतीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए ऐसे प्रयास आवश्यक हैं। तिलक लगाने की परंपरा भारतीय संस्कृति में सदियों से चली आ रही है और इसे आध्यात्मिक ऊर्जा, सकारात्मकता तथा धार्मिक पहचान का प्रतीक माना जाता है। इसी संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाने के लिए कथा स्थल पर इस नियम को लागू किया गया है।
कार्यक्रम की शुरुआत 8 जुलाई को भव्य कलश यात्रा और भागवत महात्म्य के साथ होगी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाएं और श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में कलश यात्रा में शामिल होंगे। इसके बाद प्रतिदिन श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों का विस्तृत वर्णन किया जाएगा।
9 जुलाई को भीष्म पितामह, माता कुंती के आगमन तथा पूतना वध की कथा सुनाई जाएगी। 10 जुलाई को गोवर्धन पूजा, अन्नकूट महोत्सव और छप्पन भोग का विशेष आयोजन रहेगा। श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और गोवर्धन पर्वत की महिमा से जुड़े प्रसंग सुनने का अवसर मिलेगा।
11 जुलाई को वामन अवतार, भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का भव्य आयोजन किया जाएगा। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के दौरान आकर्षक झांकियां, भजन और विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की जाएंगी, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाएगा।
12 जुलाई को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं, माखन चोरी, गोवर्धन पूजन और छप्पन भोग का आयोजन होगा। इसके बाद 13 जुलाई को महारास, सुदामा मिलन, रुक्मिणी विवाह और चिंतक विदाई जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। इन आयोजनों में भक्ति संगीत और धार्मिक प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
सात दिवसीय कथा का समापन 14 जुलाई को सुदामा चरित्र, कंस वध और हवन-पूजन के साथ होगा। अंतिम दिन श्रद्धालु सामूहिक रूप से पूर्णाहुति में शामिल होंगे और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से आयोजन का समापन किया जाएगा।
आयोजन समिति ने बताया कि कथा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। कथा स्थल पर बैठने, पेयजल, पार्किंग, सुरक्षा और चिकित्सा जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। प्रशासन और स्वयंसेवकों की टीम आयोजन को व्यवस्थित और सुचारु रूप से संचालित करने में सहयोग करेगी।
जो श्रद्धालु किसी कारणवश रायपुर नहीं पहुंच पाएंगे, उनके लिए कथा का सीधा प्रसारण भी किया जाएगा। आयोजन का लाइव टेलीकास्ट आस्था चैनल और यूट्यूब के माध्यम से प्रसारित होगा, जिससे देश-विदेश में बैठे श्रद्धालु भी कथा का लाभ ले सकेंगे।
आयोजन से पहले अंतरराष्ट्रीय वैश्य फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष योगेश अग्रवाल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका से राजभवन में मुलाकात कर उन्हें कथा में शामिल होने का निमंत्रण दिया। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश महामंत्री एवं प्रवक्ता राजकुमार राठी सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। राज्यपाल ने आयोजन के लिए शुभकामनाएं देते हुए निमंत्रण स्वीकार किया और धार्मिक आयोजनों के सामाजिक महत्व की सराहना की।
आयोजन समिति का कहना है कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों, पारिवारिक संस्कारों और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। देवकीनंदन ठाकुर अपने सहज, सरल और प्रेरणादायी प्रवचनों के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध हैं। उनके कथा कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं और सामाजिक समरसता, आध्यात्मिक जागरूकता तथा सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा मिलता है।
