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कोलकाता रैली में ममता बनर्जी का थप्पड़ विवाद: हंगामे के बीच वायरल वीडियो से गरमाई सियासत
Digital Desk
बारुईपुर घटना के विरोध मार्च के दौरान कथित वीडियो सामने आने के बाद भाजपा ने साधा निशाना, तृणमूल ने आरोपों को बताया भ्रामक; पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल।
बारुईपुर में 11 वर्षीय बच्ची के कथित दुष्कर्म और हत्या के विरोध में पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में निकाली गई तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की रैली उस समय विवादों में आ गई, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। वीडियो में दावा किया गया कि भीड़ के बीच ममता बनर्जी ने पीली टी-शर्ट पहने एक व्यक्ति को थप्पड़ मार दिया। इस घटना के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा ने इसे लेकर मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि वीडियो को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है। यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया जब तृणमूल कांग्रेस ने बारुईपुर की घटना के विरोध में बालीगंज फाड़ी से हाजरा मोड़ तक विरोध मार्च निकाला था। इस मार्च में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी शामिल हुईं। रैली में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, समर्थक और स्थानीय लोग मौजूद थे। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, लेकिन मार्च के दौरान कई स्थानों पर तनाव की स्थिति बन गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जुलूस आगे बढ़ने के दौरान कुछ लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी। इसी बीच कथित तौर पर अंडे भी फेंके गए और ‘चोर-चोर’ के नारे लगाए गए। इससे माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। वायरल वीडियो में दिखाई देता है कि ममता बनर्जी पहले हाथ जोड़कर भीड़ को शांत करने की कोशिश करती हैं। इसके बाद वह आगे बढ़ती हैं और सामने खड़े एक युवक को थप्पड़ मारती हुई नजर आती हैं। हालांकि इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। भाजपा ने इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला। पार्टी नेताओं का कहना है कि अगर मुख्यमंत्री अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ इस तरह का व्यवहार करती हैं, तो इससे उनके नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल खड़े होते हैं। भाजपा नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताते हुए कहा कि सार्वजनिक मंच पर किसी भी व्यक्ति के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं माना जा सकता।
दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। पार्टी नेताओं का कहना है कि विपक्ष राजनीतिक लाभ लेने के लिए वीडियो को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहा है। पार्टी का दावा है कि मुख्यमंत्री भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा बनाए रखने की कोशिश कर रही थीं। टीएमसी का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम को गलत तरीके से प्रचारित किया जा रहा है ताकि सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके। रैली के दौरान भाजपा और तृणमूल कांग्रेस की युवा शाखा के कार्यकर्ताओं के बीच कई स्थानों पर झड़प भी हुई। पुलिस के अनुसार, स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षा बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। कुछ जगहों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हल्का लाठीचार्ज भी किया गया। अधिकारियों ने बताया कि किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन पूरे इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।बताया जा रहा है कि जुलूस बालीगंज से शुरू होकर करीब तीन किलोमीटर का सफर तय करते हुए हाजरा क्रॉसिंग तक पहुंचा। इसी दौरान अलग-अलग स्थानों पर तनाव की घटनाएं सामने आईं। मुख्यमंत्री के कालीघाट स्थित आवास के आसपास भी भारी भीड़ जमा हो गई थी। पुलिस ने सुरक्षा कारणों से कई रास्तों पर बैरिकेडिंग कर यातायात को नियंत्रित किया।
रैली के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुलिस अधिकारियों से भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करना सभी का अधिकार है, लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने जानबूझकर रैली में व्यवधान पैदा किया और तनाव फैलाने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी तरह की हिंसा या अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और यदि किसी ने कानून हाथ में लिया है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। वायरल वीडियो को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग मुख्यमंत्री के व्यवहार की आलोचना कर रहे हैं, जबकि कई समर्थक इसे भीड़ को नियंत्रित करने की स्वाभाविक प्रतिक्रिया बता रहे हैं। हालांकि वीडियो की प्रामाणिकता और पूरी परिस्थितियों को लेकर अब भी स्पष्ट तस्वीर सामने आना बाकी है।
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कोलकाता रैली में ममता बनर्जी का थप्पड़ विवाद: हंगामे के बीच वायरल वीडियो से गरमाई सियासत
Digital Desk
बारुईपुर में 11 वर्षीय बच्ची के कथित दुष्कर्म और हत्या के विरोध में पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में निकाली गई तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की रैली उस समय विवादों में आ गई, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। वीडियो में दावा किया गया कि भीड़ के बीच ममता बनर्जी ने पीली टी-शर्ट पहने एक व्यक्ति को थप्पड़ मार दिया। इस घटना के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा ने इसे लेकर मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि वीडियो को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है। यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया जब तृणमूल कांग्रेस ने बारुईपुर की घटना के विरोध में बालीगंज फाड़ी से हाजरा मोड़ तक विरोध मार्च निकाला था। इस मार्च में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी शामिल हुईं। रैली में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, समर्थक और स्थानीय लोग मौजूद थे। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, लेकिन मार्च के दौरान कई स्थानों पर तनाव की स्थिति बन गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जुलूस आगे बढ़ने के दौरान कुछ लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी। इसी बीच कथित तौर पर अंडे भी फेंके गए और ‘चोर-चोर’ के नारे लगाए गए। इससे माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। वायरल वीडियो में दिखाई देता है कि ममता बनर्जी पहले हाथ जोड़कर भीड़ को शांत करने की कोशिश करती हैं। इसके बाद वह आगे बढ़ती हैं और सामने खड़े एक युवक को थप्पड़ मारती हुई नजर आती हैं। हालांकि इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। भाजपा ने इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला। पार्टी नेताओं का कहना है कि अगर मुख्यमंत्री अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ इस तरह का व्यवहार करती हैं, तो इससे उनके नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल खड़े होते हैं। भाजपा नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताते हुए कहा कि सार्वजनिक मंच पर किसी भी व्यक्ति के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं माना जा सकता।
दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। पार्टी नेताओं का कहना है कि विपक्ष राजनीतिक लाभ लेने के लिए वीडियो को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहा है। पार्टी का दावा है कि मुख्यमंत्री भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा बनाए रखने की कोशिश कर रही थीं। टीएमसी का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम को गलत तरीके से प्रचारित किया जा रहा है ताकि सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके। रैली के दौरान भाजपा और तृणमूल कांग्रेस की युवा शाखा के कार्यकर्ताओं के बीच कई स्थानों पर झड़प भी हुई। पुलिस के अनुसार, स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षा बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। कुछ जगहों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हल्का लाठीचार्ज भी किया गया। अधिकारियों ने बताया कि किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन पूरे इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।बताया जा रहा है कि जुलूस बालीगंज से शुरू होकर करीब तीन किलोमीटर का सफर तय करते हुए हाजरा क्रॉसिंग तक पहुंचा। इसी दौरान अलग-अलग स्थानों पर तनाव की घटनाएं सामने आईं। मुख्यमंत्री के कालीघाट स्थित आवास के आसपास भी भारी भीड़ जमा हो गई थी। पुलिस ने सुरक्षा कारणों से कई रास्तों पर बैरिकेडिंग कर यातायात को नियंत्रित किया।
रैली के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुलिस अधिकारियों से भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करना सभी का अधिकार है, लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने जानबूझकर रैली में व्यवधान पैदा किया और तनाव फैलाने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी तरह की हिंसा या अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और यदि किसी ने कानून हाथ में लिया है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। वायरल वीडियो को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग मुख्यमंत्री के व्यवहार की आलोचना कर रहे हैं, जबकि कई समर्थक इसे भीड़ को नियंत्रित करने की स्वाभाविक प्रतिक्रिया बता रहे हैं। हालांकि वीडियो की प्रामाणिकता और पूरी परिस्थितियों को लेकर अब भी स्पष्ट तस्वीर सामने आना बाकी है।
