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नेपाल फ्लैश फ्लड: 275 भारतीय लापता, भारत ने बढ़ाया रेस्क्यू सपोर्ट
Digital Desk
नेपाल में भीषण फ्लैश फ्लड के बाद 275 भारतीय नागरिक लापता हैं। भारत ने 95 टन राहत सामग्री और विशेषज्ञ रेस्क्यू टीमें भेजकर बचाव अभियान तेज किया है।
नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में 26 अगस्त को आई भीषण फ्लैश फ्लड और मडस्लाइड के बाद राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। भारत ने नेपाल को रेस्क्यू, राहत और पुनर्वास के साथ आगे चलकर पुनर्निर्माण में भी हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया है।
विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, 275 भारतीय नागरिक अभी भी लापता हैं। इनमें 49 ऐसे भारतीय शामिल हैं, जो चीन की तरफ सीमा क्षेत्र में लापता हुए हैं। अब तक 169 भारतीयों को सुरक्षित बचाया जा चुका है।
भारत ने राहत अभियान के लिए सात विमानों के जरिए 95 टन आपातकालीन राहत सामग्री नेपाल भेजी है। भारतीय विशेषज्ञ टीमें पीड़ितों की पहचान और सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश के लिए नेपाली एजेंसियों के साथ काम कर रही हैं।
भारत ने बढ़ाया जमीनी सहयोग
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने आपदा के बाद तत्काल प्रतिक्रिया दी और बचाव एवं पुनर्वास के अगले चरणों में भी नेपाल की मदद जारी रखेगा।
काठमांडू की दो प्रयोगशालाओं में भारतीय फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम काम कर रही है। विशेषज्ञ करीब 1,200 DNA नमूनों की जांच में जुटे हैं, ताकि बरामद शवों और अवशेषों की पहचान की जा सके।
इसके अलावा, प्रभावित इलाकों में भारतीय सुरंग-बचाव दल भी तैनात है। दुर्गम पहाड़ी इलाकों में मलबे और कीचड़ के कारण राहत टीमों के लिए अभियान चलाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
275 भारतीय अब भी लापता
लापता भारतीय नागरिकों की संख्या भारत के लिए सबसे बड़ी चिंताओं में से एक बनी हुई है।
MEA के नवीनतम अपडेट के मुताबिक 275 भारतीयों का अभी पता नहीं चल पाया है, जबकि 169 लोगों को बचाया जा चुका है। लापता लोगों में 49 भारतीय ऐसे हैं, जो चीन की सीमा की तरफ लापता हुए हैं।
काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास संबंधित अधिकारियों और प्रभावित परिवारों के साथ समन्वय कर रहे हैं।
भारत ने चीन की तरफ लापता हुए भारतीय नागरिकों के परिवारों से DNA नमूने उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया है, ताकि बरामद शवों या अवशेषों की पहचान में मदद मिल सके।
नेपाल में बढ़ा मौतों का आंकड़ा
आपदा ने नेपाल के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर जान-माल और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है।
नवीनतम रिपोर्टों में नेपाल पुलिस के आंकड़ों के हवाले से 1,366 हताहतों की जानकारी दी गई है, जबकि प्रभावित क्षेत्रों में 4,077 लोग अब भी लापता बताए गए हैं।
अधिकारियों ने बड़ी संख्या में शव और मानव अवशेष बरामद किए हैं। उनकी पहचान के लिए DNA सैंपल जुटाए जा रहे हैं।
बाढ़ और मलबे से पर्वतीय क्षेत्र की सड़कों, पुलों, बस्तियों और जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
सुरंगों में रेस्क्यू अभियान जारी
बचाव अभियान का एक बड़ा केंद्र जलविद्युत परियोजनाओं की वे सुरंगें हैं, जहां मजदूरों के मलबे के नीचे फंसे होने की आशंका है।
रिपोर्टों के मुताबिक ग्लेशियर के टूटने से आई विनाशकारी बाढ़ ने कम से कम 11 जलविद्युत परियोजनाओं को प्रभावित किया है। चिलिमे और अपर त्रिशूली परियोजनाओं की सुरंगों में खोज अभियान पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
बचाव दल सुरंगों तक पहुंच बनाने के लिए विशेष उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं और कुछ स्थानों पर ऑक्सीजन की आपूर्ति भी की जा रही है।
8 सितंबर तक सुरंग और बाढ़ प्रभावित स्थलों से कम से कम चार लोगों को बचाए जाने की जानकारी सामने आई थी। इनमें एक चीनी नागरिक और जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारी शामिल हैं।
भारत ने भेजी विशेषज्ञ टीमें
भारत की मदद केवल खाद्य सामग्री, दवाइयों और अन्य राहत सामान तक सीमित नहीं है।
नेपाल में 18 सदस्यीय भारतीय फॉरेंसिक टीम DNA विश्लेषण में सहायता कर रही है। इसके साथ भारतीय सुरंग-बचाव विशेषज्ञ भी अभियान में शामिल हैं।
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने भारतीय सहायता का उल्लेख करते हुए बताया है कि अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ टीमें नेपाली सुरक्षा बलों और आपदा प्रतिक्रिया एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही हैं।
भारत की ओर से भेजी गई 95 टन राहत सामग्री का उद्देश्य आपदा प्रभावित समुदायों की तत्काल जरूरतों को पूरा करना है।
बाढ़ से तबाह हुआ ढांचा
फ्लैश फ्लड ने नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र और परिवहन ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।
एक दर्जन से अधिक जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। कई सड़कों और पुलों के क्षतिग्रस्त होने से दूरदराज के इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।
पहाड़ी क्षेत्रों में भारी मलबा जमा होने के कारण खोज और बचाव अभियान धीमा हुआ है। बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने से शवों की बरामदगी के साथ उनकी पहचान भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
रेस्क्यू ऑपरेशन अभी जारी
नेपाल सरकार ने व्यापक स्तर पर खोज और बचाव अभियान जारी रखने का भरोसा दिया है। राहत टीमें मलबे और कीचड़ के बीच संभावित जीवित लोगों की तलाश के साथ बरामद शवों की पहचान में भी जुटी हैं।
भारत ने कहा है कि नेपाल की जरूरत के अनुसार रेस्क्यू, राहत और पुनर्निर्माण के लिए अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। चीन, जापान, अमेरिका, दक्षिण कोरिया समेत कई अन्य देशों ने भी नेपाल को सहायता दी है।
भारत के लिए फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता 275 भारतीय नागरिकों का पता लगाना, उनके परिवारों की मदद करना और नेपाल के आपदा राहत अभियान को समर्थन देना है।
बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित इलाकों में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद खोज अभियान जारी है। आने वाले दिनों में DNA पहचान, सुरंग रेस्क्यू और दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच बनाने की क्षमता इस अभियान के अहम हिस्से होंगे।
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