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सऊदी ने अमेरिका को एयरस्पेस देने से किया इनकार, ट्रम्प ने रोका होर्मुज ऑपरेशन
Digital Desk
होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका का ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ सऊदी इनकार के बाद रुका। ट्रम्प और क्राउन प्रिंस के बीच तनाव की खबरें सामने आईं।
होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा और जहाजों की आवाजाही को लेकर शुरू हुआ अमेरिका का बड़ा ऑपरेशन अब राजनीतिक तनाव में बदलता दिख रहा है। जानकारी के मुताबिक 4 मई को अमेरिका ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ नाम से एक अभियान शुरू किया था, जिसका मकसद होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित और तेज करना बताया गया था। लेकिन शुरुआत के महज एक दिन बाद ही यह पूरा ऑपरेशन अचानक रोक दिया गया। बताया जा रहा है कि इसके पीछे खाड़ी देशों, खासकर सऊदी अरब की असहमति बड़ी वजह बनी। इस पूरे घटनाक्रम ने वॉशिंगटन और रियाद के रिश्तों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
NBC न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब ने अमेरिका को अपने एयरस्पेस और सैन्य एयरबेस इस्तेमाल करने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया। यह वही एयरस्पेस था, जिसके सहारे अमेरिकी विमान होर्मुज स्ट्रेट में निगरानी और रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देने वाले थे। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यह ऑपरेशन बिना विस्तृत कूटनीतिक चर्चा के सोशल मीडिया पर अचानक घोषित कर दिया था, जिससे खाड़ी के कई सहयोगी देश असहज हो गए। सऊदी नेतृत्व ने इस फैसले पर नाराजगी जताई और इसके बाद क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और ट्रम्प के बीच बातचीत भी हुई, लेकिन किसी तरह की सहमति नहीं बन सकी। इसी बीच हालात ऐसे बने कि अमेरिका को अपने कदम पीछे खींचने पड़े।
स्थिति तब और जटिल हो गई जब ऑपरेशन के शुरुआती दो दिनों में अमेरिका केवल तीन जहाजों को ही सुरक्षित तरीके से होर्मुज स्ट्रेट से पार करा पाया। इसके बाद मिशन की रफ्तार लगभग ठप हो गई और रणनीतिक स्तर पर कई तरह की दिक्कतें सामने आने लगीं। सूत्रों का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और सहयोगी देशों के असहयोग के चलते ट्रम्प प्रशासन पर दबाव बढ़ा और आखिरकार ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को रोकने का फैसला लेना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है कि क्या अमेरिका अब अपने पारंपरिक सहयोगियों के साथ तालमेल बनाए रखने में कमजोर पड़ रहा है।
इसी बीच ईरान से भी एक प्रतीकात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है। तेहरान में एक बड़े अमेरिका विरोधी बिलबोर्ड के सामने एक महिला ईरानी झंडा लहराती नजर आई। उस बिलबोर्ड पर राष्ट्रपति ट्रम्प की मूंछ को होर्मुज स्ट्रेट के रूप में दर्शाया गया है, जिसे स्थानीय स्तर पर अमेरिका की नीतियों पर कटाक्ष माना जा रहा है। पूरे घटनाक्रम ने खाड़ी क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है। फिलहाल अमेरिका की ओर से इस मामले पर आधिकारिक बयान सीमित ही है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक इसे रणनीतिक असफलता और कूटनीतिक संतुलन की चुनौती के तौर पर देख रहे हैं।
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सऊदी ने अमेरिका को एयरस्पेस देने से किया इनकार, ट्रम्प ने रोका होर्मुज ऑपरेशन
Digital Desk
होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा और जहाजों की आवाजाही को लेकर शुरू हुआ अमेरिका का बड़ा ऑपरेशन अब राजनीतिक तनाव में बदलता दिख रहा है। जानकारी के मुताबिक 4 मई को अमेरिका ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ नाम से एक अभियान शुरू किया था, जिसका मकसद होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित और तेज करना बताया गया था। लेकिन शुरुआत के महज एक दिन बाद ही यह पूरा ऑपरेशन अचानक रोक दिया गया। बताया जा रहा है कि इसके पीछे खाड़ी देशों, खासकर सऊदी अरब की असहमति बड़ी वजह बनी। इस पूरे घटनाक्रम ने वॉशिंगटन और रियाद के रिश्तों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
NBC न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब ने अमेरिका को अपने एयरस्पेस और सैन्य एयरबेस इस्तेमाल करने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया। यह वही एयरस्पेस था, जिसके सहारे अमेरिकी विमान होर्मुज स्ट्रेट में निगरानी और रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देने वाले थे। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यह ऑपरेशन बिना विस्तृत कूटनीतिक चर्चा के सोशल मीडिया पर अचानक घोषित कर दिया था, जिससे खाड़ी के कई सहयोगी देश असहज हो गए। सऊदी नेतृत्व ने इस फैसले पर नाराजगी जताई और इसके बाद क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और ट्रम्प के बीच बातचीत भी हुई, लेकिन किसी तरह की सहमति नहीं बन सकी। इसी बीच हालात ऐसे बने कि अमेरिका को अपने कदम पीछे खींचने पड़े।
स्थिति तब और जटिल हो गई जब ऑपरेशन के शुरुआती दो दिनों में अमेरिका केवल तीन जहाजों को ही सुरक्षित तरीके से होर्मुज स्ट्रेट से पार करा पाया। इसके बाद मिशन की रफ्तार लगभग ठप हो गई और रणनीतिक स्तर पर कई तरह की दिक्कतें सामने आने लगीं। सूत्रों का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और सहयोगी देशों के असहयोग के चलते ट्रम्प प्रशासन पर दबाव बढ़ा और आखिरकार ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को रोकने का फैसला लेना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है कि क्या अमेरिका अब अपने पारंपरिक सहयोगियों के साथ तालमेल बनाए रखने में कमजोर पड़ रहा है।
इसी बीच ईरान से भी एक प्रतीकात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है। तेहरान में एक बड़े अमेरिका विरोधी बिलबोर्ड के सामने एक महिला ईरानी झंडा लहराती नजर आई। उस बिलबोर्ड पर राष्ट्रपति ट्रम्प की मूंछ को होर्मुज स्ट्रेट के रूप में दर्शाया गया है, जिसे स्थानीय स्तर पर अमेरिका की नीतियों पर कटाक्ष माना जा रहा है। पूरे घटनाक्रम ने खाड़ी क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है। फिलहाल अमेरिका की ओर से इस मामले पर आधिकारिक बयान सीमित ही है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक इसे रणनीतिक असफलता और कूटनीतिक संतुलन की चुनौती के तौर पर देख रहे हैं।
