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नेपाल की बाढ़ के बाद बिहार में ‘असामान्य मछलियों’ पर अलर्ट, खाने-बेचने से भी रोक; जानें क्या है वजह
Digital Desk
नेपाल से आई बाढ़ के पानी के साथ बिहार के कुछ इलाकों में बड़ी और अपरिचित मछलियां दिखाई देने के बाद राज्य सरकार ने एडवाइजरी जारी की है। विभाग ने पहचान और सुरक्षा की पुष्टि होने तक ऐसी मछलियों को पकड़ने, खाने और खरीदने-बेचने से बचने को कहा है।
नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ का असर अब बिहार के नदी क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है। बाढ़ के पानी के साथ बिहार के कुछ इलाकों में ऐसी मछलियां पहुंची हैं, जिन्हें स्थानीय लोग सामान्य तौर पर नहीं देखते। इसके बाद बिहार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने लोगों को अज्ञात या असामान्य मछलियों के सेवन से बचने की सलाह दी है।
विभाग की सलाह सिर्फ खाने तक सीमित नहीं है। लोगों से कहा गया है कि बाढ़ के पानी से आई किसी अपरिचित मछली को न पकड़ें, न खरीदें और न ही बाजार में बेचें। जब तक संबंधित विभाग उसकी पहचान और खाने के लिए सुरक्षित होने की पुष्टि न कर दे, उसे खाद्य मछली नहीं माना जाए।
किन इलाकों में दिखाई दे रही हैं असामान्य मछलियां?
रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल से आने वाले पानी और गंडक नदी के बढ़े जलस्तर के बाद पश्चिम चंपारण और गोपालगंज सहित बिहार के कुछ हिस्सों में असामान्य मछलियां दिखाई दी हैं। कुछ रिपोर्टों में सिवान, पूर्वी चंपारण, बगहा और सारण से भी ऐसी मछलियां मिलने की बात सामने आई है।
पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर क्षेत्र में गंडक नदी के बाढ़ प्रभावित इलाकों में बड़ी मछलियां पकड़े जाने की तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए हैं। हालांकि, किसी भी ऐसी मछली की प्रजाति के बारे में आधिकारिक पुष्टि किए बिना उसे किसी खास खतरनाक प्रजाति का नाम देना सही नहीं होगा।
मछली खाने पर क्यों है स्वास्थ्य का खतरा?
बिहार सरकार की चिंता मुख्य रूप से बाढ़ के पानी से होने वाले संभावित संदूषण को लेकर है। बाढ़ के दौरान तालाबों, नदियों, झीलों और जलाशयों की मछलियां अपने सामान्य क्षेत्र से दूर बह सकती हैं। इस दौरान उनका संपर्क गंदे नालों, मृत जीवों, सड़ने वाले जैविक पदार्थ और दूसरे प्रदूषित पदार्थों से हो सकता है। ऐसे पानी में रहने या लंबे समय तक उसके संपर्क में रहने से मछलियों के माध्यम से बैक्टीरिया, वायरस और फंगस जैसे रोगजनकों के संपर्क का जोखिम बढ़ सकता है। यही वजह है कि विभाग ने बाढ़ का पानी सामान्य होने और जलस्रोतों की स्थिति स्थिर होने तक वहां से पकड़ी गई अपरिचित मछलियों के सेवन से बचने की सलाह दी है।
खाने के बाद तबीयत बिगड़े तो क्या करें?
सरकारी सलाह के मुताबिक यदि किसी व्यक्ति ने ऐसी मछली खा ली है और उसके बाद उल्टी, दस्त, पेट दर्द, चक्कर, सांस लेने में परेशानी या कोई अन्य असामान्य लक्षण दिखाई देते हैं, तो उसे तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
साथ ही, यदि किसी व्यक्ति को कोई अपरिचित या असामान्य मछली मिलती है तो उसे अपने जिला मत्स्य पदाधिकारी या स्थानीय प्रशासन को सूचना देने की सलाह दी गई है।
क्या हर नेपाल से आई मछली जहरीली है?
नहीं। यह अंतर समझना बेहद जरूरी है। बिहार सरकार की एडवाइजरी का अर्थ यह नहीं है कि नेपाल से बाढ़ के पानी के साथ आई हर मछली जहरीली है। चेतावनी का मुख्य कारण यह है कि इन मछलियों की पहचान और उनके बाढ़ के पानी के संपर्क में आने की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
कुछ मीडिया रिपोर्टों में इन मछलियों को संभावित रूप से गूंछ कैटफिश जैसी प्रजातियों से जोड़ा गया है, लेकिन इसे सभी असामान्य मछलियों की आधिकारिक पहचान नहीं माना जा सकता। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे दावों के आधार पर किसी मछली को “आदमखोर”, “जहरीली” या “घातक” बताना उचित नहीं होगा।
बाढ़ के बाद क्यों बढ़ जाती है ऐसी घटनाओं की संभावना?
तेज बाढ़ नदी और आसपास के जलस्रोतों की प्राकृतिक सीमाओं को बदल देती है। पानी का तेज बहाव तालाबों, छोटी नदियों और जलाशयों में रहने वाली मछलियों को दूर तक बहा सकता है। नेपाल से आने वाला अतिरिक्त पानी जब बिहार की नदी प्रणालियों में पहुंचता है तो मछलियों के सामान्य आवास भी प्रभावित होते हैं।
ऐसे समय में विभाग की सलाह का उद्देश्य किसी एक प्रजाति को निशाना बनाना नहीं, बल्कि बाढ़ के बाद संभावित खाद्य-संदूषण से लोगों को बचाना है। जब तक जलस्रोत सामान्य नहीं हो जाते और अज्ञात मछलियों की पहचान व सुरक्षा की पुष्टि नहीं होती, सावधानी बरतना ही प्रशासन का मुख्य संदेश है।
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