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तमिलनाडु में TVK सरकार गठन फंसा, विजय को चाहिए 11 और विधायकों का समर्थन, सियासी हलचल बढ़ी
नेशनल डेस्क
तमिलनाडु में सरकार गठन पर संकट, विजय को बहुमत के लिए 118 विधायकों का समर्थन जरूरी। राज्यपाल ने स्थिर सरकार की शर्त रखी।
तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और इसी बीच एक्टर से नेता बने विजय की पार्टी TVK के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। तमिलनाडु सरकार गठन को लेकर राजभवन की ओर से साफ संकेत दिए गए हैं कि मुख्यमंत्री पद की शपथ तभी संभव होगी जब विधानसभा में स्पष्ट बहुमत साबित किया जाएगा। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने स्थिर सरकार की आवश्यकता का हवाला देते हुए 118 विधायकों के समर्थन की शर्त रखी है, जिसके बाद सियासी माहौल और गर्म हो गया है। विजय गुरुवार को लगातार दूसरे दिन राज्यपाल से मिलने लोकभवन पहुंचे थे और करीब एक घंटे की मुलाकात के बाद वहां से बाहर निकले।
सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल ने यह साफ कर दिया है कि केवल दावा पेश करना काफी नहीं होगा, बल्कि संख्या बल के साथ बहुमत साबित करना जरूरी है। इसी वजह से TVK प्रमुख विजय पर दबाव बढ़ गया है। इससे पहले बुधवार को विजय ने 113 विधायकों के समर्थन का पत्र राज्यपाल को सौंपा था, लेकिन इसे पर्याप्त नहीं माना गया। बताया जा रहा है कि राज्यपाल ने उनसे दो टूक कहा कि सरकार गठन से पहले 118 विधायकों का समर्थन अनिवार्य है, क्योंकि मौजूदा राजनीतिक स्थिति में स्थिरता सबसे बड़ा मुद्दा है। विजय ने इस पर कुछ समय की मांग की है ताकि अतिरिक्त समर्थन जुटाया जा सके। फिलहाल सत्ता की दौड़ में TVK खुद को मजबूत स्थिति में दिखाने की कोशिश कर रही है, लेकिन आंकड़ों का गणित उनके लिए चुनौती बन गया है।
विधानसभा के कुल समीकरण की बात करें तो 234 सदस्यीय सदन में TVK के पास 108 सीटें हैं। हालांकि विजय खुद दो सीटों से चुनाव जीते हैं, ऐसे में एक सीट छोड़ने के बाद यह संख्या 107 पर आ जाती है। इस तरह बहुमत का आंकड़ा 118 ही रहता है और पार्टी को कम से कम 11 अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत है। कांग्रेस के 5 विधायकों के समर्थन ने थोड़ी राहत जरूर दी है, लेकिन अभी भी संख्या पूरी नहीं हो पा रही है। इसी बीच राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा तेज हो गई है कि DMK और AIADMK जैसे बड़े प्रतिद्वंदी दलों के बीच भी किसी तरह की बैकचैनल बातचीत चल रही है, जिसमें सरकार गठन के वैकल्पिक फॉर्मूले पर विचार किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि एक प्रस्ताव में AIADMK को सरकार बनाने और DMK को बाहर से समर्थन देने जैसी बात सामने आई है, हालांकि इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। छोटे दलों की भूमिका भी इस पूरे समीकरण में अहम मानी जा रही है।
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तमिलनाडु में TVK सरकार गठन फंसा, विजय को चाहिए 11 और विधायकों का समर्थन, सियासी हलचल बढ़ी
नेशनल डेस्क
तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और इसी बीच एक्टर से नेता बने विजय की पार्टी TVK के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। तमिलनाडु सरकार गठन को लेकर राजभवन की ओर से साफ संकेत दिए गए हैं कि मुख्यमंत्री पद की शपथ तभी संभव होगी जब विधानसभा में स्पष्ट बहुमत साबित किया जाएगा। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने स्थिर सरकार की आवश्यकता का हवाला देते हुए 118 विधायकों के समर्थन की शर्त रखी है, जिसके बाद सियासी माहौल और गर्म हो गया है। विजय गुरुवार को लगातार दूसरे दिन राज्यपाल से मिलने लोकभवन पहुंचे थे और करीब एक घंटे की मुलाकात के बाद वहां से बाहर निकले।
सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल ने यह साफ कर दिया है कि केवल दावा पेश करना काफी नहीं होगा, बल्कि संख्या बल के साथ बहुमत साबित करना जरूरी है। इसी वजह से TVK प्रमुख विजय पर दबाव बढ़ गया है। इससे पहले बुधवार को विजय ने 113 विधायकों के समर्थन का पत्र राज्यपाल को सौंपा था, लेकिन इसे पर्याप्त नहीं माना गया। बताया जा रहा है कि राज्यपाल ने उनसे दो टूक कहा कि सरकार गठन से पहले 118 विधायकों का समर्थन अनिवार्य है, क्योंकि मौजूदा राजनीतिक स्थिति में स्थिरता सबसे बड़ा मुद्दा है। विजय ने इस पर कुछ समय की मांग की है ताकि अतिरिक्त समर्थन जुटाया जा सके। फिलहाल सत्ता की दौड़ में TVK खुद को मजबूत स्थिति में दिखाने की कोशिश कर रही है, लेकिन आंकड़ों का गणित उनके लिए चुनौती बन गया है।
विधानसभा के कुल समीकरण की बात करें तो 234 सदस्यीय सदन में TVK के पास 108 सीटें हैं। हालांकि विजय खुद दो सीटों से चुनाव जीते हैं, ऐसे में एक सीट छोड़ने के बाद यह संख्या 107 पर आ जाती है। इस तरह बहुमत का आंकड़ा 118 ही रहता है और पार्टी को कम से कम 11 अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत है। कांग्रेस के 5 विधायकों के समर्थन ने थोड़ी राहत जरूर दी है, लेकिन अभी भी संख्या पूरी नहीं हो पा रही है। इसी बीच राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा तेज हो गई है कि DMK और AIADMK जैसे बड़े प्रतिद्वंदी दलों के बीच भी किसी तरह की बैकचैनल बातचीत चल रही है, जिसमें सरकार गठन के वैकल्पिक फॉर्मूले पर विचार किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि एक प्रस्ताव में AIADMK को सरकार बनाने और DMK को बाहर से समर्थन देने जैसी बात सामने आई है, हालांकि इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। छोटे दलों की भूमिका भी इस पूरे समीकरण में अहम मानी जा रही है।
