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राम मंदिर चढ़ावा मामले पर संसद में हंगामा, विपक्ष का प्रदर्शन; सरकार ने आरोपों को बताया राजनीति से प्रेरित
Digital Desk
मानसून सत्र के 12वें दिन लोकसभा में नारेबाजी के बीच कार्यवाही स्थगित, राज्यसभा में भी उठा मुद्दा; सरकार ने कहा- जांच एजेंसियां अपना काम नियमों के तहत करती हैं।
संसद के मानसून सत्र के 12वें दिन मंगलवार को कार्यवाही की शुरुआत हंगामे के साथ हुई। राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर विपक्षी दलों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया, जबकि लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में इस मुद्दे पर जोरदार बहस और नारेबाजी देखने को मिली। हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद स्थगित करनी पड़ी। दूसरी ओर, सरकार ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक करार देते हुए कहा कि जांच से जुड़े सभी विषय कानून और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही आगे बढ़ाए जाएंगे।
सुबह 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। लगातार शोर-शराबे के कारण सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। अध्यक्ष ने सदस्यों से शांत रहने और प्रश्नकाल चलने देने की अपील की, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही महज तीन मिनट के भीतर दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
राज्यसभा में भी इसी मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने मामले का उल्लेख करते हुए जांच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी मामले में गंभीर आरोप सामने आते हैं तो संबंधित एजेंसियों को निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए। सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जवाब देते हुए कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से अपने दायित्व निभाती हैं और सरकार कानून के दायरे में रहकर ही सभी मामलों को देखती है।
संसद परिसर के मकर द्वार पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल सहित कई विपक्षी दलों के सांसदों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान विभिन्न दलों के नेताओं ने अपने-अपने तरीके से विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी इस प्रदर्शन में शामिल रहीं। विपक्ष ने सरकार से मामले में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की।
इसी दौरान संसद परिसर में एक अन्य मुद्दे पर भी प्रदर्शन देखने को मिला। तमिलनाडु की डीएमके के सांसदों ने कावेरी जल विवाद को लेकर केंद्र का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से प्रदर्शन किया। उन्होंने जल बंटवारे से जुड़े मुद्दों के शीघ्र समाधान की मांग की और अपने राज्य के हितों को लेकर आवाज उठाई।
संसद के भीतर विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के समानांतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद परिसर स्थित जीएमसी बालयोगी ऑडिटोरियम में आयोजित एनडीए संसदीय दल की साप्ताहिक "मंगल मिलन" बैठक में शामिल हुए। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन सहित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के कई वरिष्ठ नेता और सांसद मौजूद रहे। बैठक में संसद के मौजूदा सत्र, विभिन्न विधायी कार्यों और संगठनात्मक विषयों पर चर्चा की गई।
मानसून सत्र के दौरान लगातार विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष और सरकार के बीच तीखी बहस देखने को मिल रही है। विपक्ष जहां अलग-अलग मामलों को लेकर सरकार से जवाब मांग रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि संसद में रचनात्मक चर्चा होनी चाहिए ताकि जनहित से जुड़े विधेयकों और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर काम आगे बढ़ सके।
लोकतंत्र में विरोध और बहस दोनों आवश्यक हैं, लेकिन सदन की कार्यवाही लगातार बाधित होने से महत्वपूर्ण विधायी काम प्रभावित होते हैं। कई विधेयक और जनहित के मुद्दे चर्चा का इंतजार कर रहे हैं, इसलिए सभी दलों के बीच सहमति बनना आवश्यक माना जा रहा है।
सरकार ने दोहराया कि किसी भी मामले में कानून से ऊपर कोई नहीं है और यदि किसी विषय पर जांच की आवश्यकता होगी तो संबंधित एजेंसियां निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करेंगी। साथ ही सरकार ने विपक्ष से संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने में सहयोग की भी अपील की, ताकि देशहित से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा हो सके।
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राम मंदिर चढ़ावा मामले पर संसद में हंगामा, विपक्ष का प्रदर्शन; सरकार ने आरोपों को बताया राजनीति से प्रेरित
Digital Desk
संसद के मानसून सत्र के 12वें दिन मंगलवार को कार्यवाही की शुरुआत हंगामे के साथ हुई। राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर विपक्षी दलों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया, जबकि लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में इस मुद्दे पर जोरदार बहस और नारेबाजी देखने को मिली। हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद स्थगित करनी पड़ी। दूसरी ओर, सरकार ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक करार देते हुए कहा कि जांच से जुड़े सभी विषय कानून और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही आगे बढ़ाए जाएंगे।
सुबह 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। लगातार शोर-शराबे के कारण सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। अध्यक्ष ने सदस्यों से शांत रहने और प्रश्नकाल चलने देने की अपील की, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही महज तीन मिनट के भीतर दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
राज्यसभा में भी इसी मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने मामले का उल्लेख करते हुए जांच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी मामले में गंभीर आरोप सामने आते हैं तो संबंधित एजेंसियों को निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए। सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जवाब देते हुए कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से अपने दायित्व निभाती हैं और सरकार कानून के दायरे में रहकर ही सभी मामलों को देखती है।
संसद परिसर के मकर द्वार पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल सहित कई विपक्षी दलों के सांसदों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान विभिन्न दलों के नेताओं ने अपने-अपने तरीके से विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी इस प्रदर्शन में शामिल रहीं। विपक्ष ने सरकार से मामले में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की।
इसी दौरान संसद परिसर में एक अन्य मुद्दे पर भी प्रदर्शन देखने को मिला। तमिलनाडु की डीएमके के सांसदों ने कावेरी जल विवाद को लेकर केंद्र का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से प्रदर्शन किया। उन्होंने जल बंटवारे से जुड़े मुद्दों के शीघ्र समाधान की मांग की और अपने राज्य के हितों को लेकर आवाज उठाई।
संसद के भीतर विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के समानांतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद परिसर स्थित जीएमसी बालयोगी ऑडिटोरियम में आयोजित एनडीए संसदीय दल की साप्ताहिक "मंगल मिलन" बैठक में शामिल हुए। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन सहित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के कई वरिष्ठ नेता और सांसद मौजूद रहे। बैठक में संसद के मौजूदा सत्र, विभिन्न विधायी कार्यों और संगठनात्मक विषयों पर चर्चा की गई।
मानसून सत्र के दौरान लगातार विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष और सरकार के बीच तीखी बहस देखने को मिल रही है। विपक्ष जहां अलग-अलग मामलों को लेकर सरकार से जवाब मांग रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि संसद में रचनात्मक चर्चा होनी चाहिए ताकि जनहित से जुड़े विधेयकों और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर काम आगे बढ़ सके।
लोकतंत्र में विरोध और बहस दोनों आवश्यक हैं, लेकिन सदन की कार्यवाही लगातार बाधित होने से महत्वपूर्ण विधायी काम प्रभावित होते हैं। कई विधेयक और जनहित के मुद्दे चर्चा का इंतजार कर रहे हैं, इसलिए सभी दलों के बीच सहमति बनना आवश्यक माना जा रहा है।
सरकार ने दोहराया कि किसी भी मामले में कानून से ऊपर कोई नहीं है और यदि किसी विषय पर जांच की आवश्यकता होगी तो संबंधित एजेंसियां निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करेंगी। साथ ही सरकार ने विपक्ष से संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने में सहयोग की भी अपील की, ताकि देशहित से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा हो सके।
