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पश्चिम बंगाल में TMC नेताओं पर बढ़े विरोध के स्वर, सौमित्र बनर्जी पर अंडे फेंके गए
Digital Desk
धनुरहाट की सरपंच मंदिरा गेन का माफी मांगते वीडियो वायरल, कुछ ही दिनों में तृणमूल नेताओं को निशाना बनाने की कई घटनाएं सामने आईं
पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की घटनाएं लगातार बढ़ती दिखाई दे रही हैं। मंगलवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले तृणमूल युवा नेता सौमित्र बनर्जी पर अंडे फेंके जाने और कथित मारपीट की घटना ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पिछले कुछ सप्ताह के दौरान राज्य के कई हिस्सों में टीएमसी नेताओं को सार्वजनिक विरोध का सामना करना पड़ा है। वहीं दूसरी ओर धनुरहाट ग्राम पंचायत की सरपंच मंदिरा गेन का एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह लोगों के बीच हाथ जोड़कर माफी मांगती और भावुक नजर आ रही हैं। सौमित्र बनर्जी को पुलिस सुरक्षा के बीच रानीगंज कोर्ट ले जाया जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में कुछ लोगों ने उनका विरोध शुरू कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक भीड़ ने उन पर अंडे फेंके और धक्का-मुक्की भी की। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप किया और उन्हें सुरक्षित तरीके से अदालत तक पहुंचाया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से प्रसारित हुआ, जिसके बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। सौमित्र बनर्जी की गिरफ्तारी बीजेपी नेता रवि केशरी की शिकायत के आधार पर हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि बनर्जी ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला किया था। इसी मामले में उन्हें अदालत में पेश किया जाना था। हालांकि टीएमसी नेताओं का कहना है कि उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है, जबकि विपक्षी दल इसे कानून की सामान्य प्रक्रिया बता रहे हैं।
इधर, दक्षिण 24 परगना जिले के धनुरहाट ग्राम पंचायत क्षेत्र से भी एक अलग लेकिन चर्चित घटना सामने आई है। पंचायत की सरपंच मंदिरा गेन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें वह अपने घर के बाहर जमा लोगों के सामने हाथ जोड़कर खड़ी दिखाई दे रही हैं। वीडियो में वह कान पकड़कर माफी मांगती और भावुक होकर रोती नजर आती हैं। कुछ दृश्य ऐसे भी हैं जिनमें वह घुटनों के बल बैठी हुई दिखाई देती हैं। बताया जा रहा है कि पंचायत से जुड़े किसी स्थानीय विवाद के बाद बड़ी संख्या में लोग उनके घर के बाहर पहुंच गए थे और विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। हालांकि इस मामले को लेकर आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन वीडियो ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। विपक्षी दलों ने इसे जनता के बढ़ते असंतोष से जोड़कर देखा है, जबकि टीएमसी नेताओं का कहना है कि कई घटनाओं को राजनीतिक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।
इससे पहले सोमवार को टीएमसी विधायक और पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष भी विरोध का सामना कर चुके हैं। कालीघाट स्थित मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान किसी व्यक्ति ने उन पर अंडा फेंक दिया था। घटना के बाद कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि हमलावर भाजपा समर्थक थे। उन्होंने दावा किया कि अंडा उनकी आंख के बेहद करीब से गुजरा और यदि वह समय रहते बचाव नहीं करते तो गंभीर चोट लग सकती थी। उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार भी किया है। राज्य में हाल के दिनों में टीएमसी नेताओं को निशाना बनाने की घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ी है। 28 मई को पार्टी सांसद सौगत रॉय पर उत्तर 24 परगना में विरोध प्रदर्शन के दौरान अंडे फेंके गए थे। इसके दो दिन बाद पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के दौरे के दौरान भी विरोध प्रदर्शन हुआ, जहां उन पर अंडे और पत्थर फेंके जाने की खबर सामने आई थी।
इसके बाद जून के पहले सप्ताह से लेकर अब तक कई टीएमसी नेताओं के खिलाफ इसी तरह की घटनाएं दर्ज की गई हैं। पूर्व विधायक सनत डे, विधायक मदन मित्रा, पार्षद बप्पादित्य दासगुप्ता, नेता मोहम्मद जसीमुद्दीन और सुजय हाजरा जैसे कई नेताओं को सार्वजनिक विरोध का सामना करना पड़ा। कुछ मामलों में अंडों के साथ टमाटर और अन्य वस्तुएं भी फेंकी गईं। लगातार हो रही ऐसी घटनाएं राज्य की राजनीति में बढ़ते ध्रुवीकरण और जनता की नाराजगी को दर्शाती हैं। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि चुनावी माहौल और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण विरोध प्रदर्शनों को अधिक आक्रामक रूप मिल रहा है। दूसरी ओर कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर नेताओं की सुरक्षा के बावजूद ऐसी घटनाएं बार-बार कैसे हो रही हैं। टीएमसी का आरोप है कि विपक्षी दल सुनियोजित तरीके से पार्टी नेताओं को बदनाम करने और माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं भाजपा का कहना है कि जनता अपनी नाराजगी लोकतांत्रिक तरीके से व्यक्त कर रही है और इसके लिए सत्तारूढ़ दल को आत्ममंथन करना चाहिए।
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पश्चिम बंगाल में TMC नेताओं पर बढ़े विरोध के स्वर, सौमित्र बनर्जी पर अंडे फेंके गए
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पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की घटनाएं लगातार बढ़ती दिखाई दे रही हैं। मंगलवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले तृणमूल युवा नेता सौमित्र बनर्जी पर अंडे फेंके जाने और कथित मारपीट की घटना ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पिछले कुछ सप्ताह के दौरान राज्य के कई हिस्सों में टीएमसी नेताओं को सार्वजनिक विरोध का सामना करना पड़ा है। वहीं दूसरी ओर धनुरहाट ग्राम पंचायत की सरपंच मंदिरा गेन का एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह लोगों के बीच हाथ जोड़कर माफी मांगती और भावुक नजर आ रही हैं। सौमित्र बनर्जी को पुलिस सुरक्षा के बीच रानीगंज कोर्ट ले जाया जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में कुछ लोगों ने उनका विरोध शुरू कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक भीड़ ने उन पर अंडे फेंके और धक्का-मुक्की भी की। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप किया और उन्हें सुरक्षित तरीके से अदालत तक पहुंचाया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से प्रसारित हुआ, जिसके बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। सौमित्र बनर्जी की गिरफ्तारी बीजेपी नेता रवि केशरी की शिकायत के आधार पर हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि बनर्जी ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला किया था। इसी मामले में उन्हें अदालत में पेश किया जाना था। हालांकि टीएमसी नेताओं का कहना है कि उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है, जबकि विपक्षी दल इसे कानून की सामान्य प्रक्रिया बता रहे हैं।
इधर, दक्षिण 24 परगना जिले के धनुरहाट ग्राम पंचायत क्षेत्र से भी एक अलग लेकिन चर्चित घटना सामने आई है। पंचायत की सरपंच मंदिरा गेन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें वह अपने घर के बाहर जमा लोगों के सामने हाथ जोड़कर खड़ी दिखाई दे रही हैं। वीडियो में वह कान पकड़कर माफी मांगती और भावुक होकर रोती नजर आती हैं। कुछ दृश्य ऐसे भी हैं जिनमें वह घुटनों के बल बैठी हुई दिखाई देती हैं। बताया जा रहा है कि पंचायत से जुड़े किसी स्थानीय विवाद के बाद बड़ी संख्या में लोग उनके घर के बाहर पहुंच गए थे और विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। हालांकि इस मामले को लेकर आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन वीडियो ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। विपक्षी दलों ने इसे जनता के बढ़ते असंतोष से जोड़कर देखा है, जबकि टीएमसी नेताओं का कहना है कि कई घटनाओं को राजनीतिक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।
इससे पहले सोमवार को टीएमसी विधायक और पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष भी विरोध का सामना कर चुके हैं। कालीघाट स्थित मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान किसी व्यक्ति ने उन पर अंडा फेंक दिया था। घटना के बाद कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि हमलावर भाजपा समर्थक थे। उन्होंने दावा किया कि अंडा उनकी आंख के बेहद करीब से गुजरा और यदि वह समय रहते बचाव नहीं करते तो गंभीर चोट लग सकती थी। उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार भी किया है। राज्य में हाल के दिनों में टीएमसी नेताओं को निशाना बनाने की घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ी है। 28 मई को पार्टी सांसद सौगत रॉय पर उत्तर 24 परगना में विरोध प्रदर्शन के दौरान अंडे फेंके गए थे। इसके दो दिन बाद पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के दौरे के दौरान भी विरोध प्रदर्शन हुआ, जहां उन पर अंडे और पत्थर फेंके जाने की खबर सामने आई थी।
इसके बाद जून के पहले सप्ताह से लेकर अब तक कई टीएमसी नेताओं के खिलाफ इसी तरह की घटनाएं दर्ज की गई हैं। पूर्व विधायक सनत डे, विधायक मदन मित्रा, पार्षद बप्पादित्य दासगुप्ता, नेता मोहम्मद जसीमुद्दीन और सुजय हाजरा जैसे कई नेताओं को सार्वजनिक विरोध का सामना करना पड़ा। कुछ मामलों में अंडों के साथ टमाटर और अन्य वस्तुएं भी फेंकी गईं। लगातार हो रही ऐसी घटनाएं राज्य की राजनीति में बढ़ते ध्रुवीकरण और जनता की नाराजगी को दर्शाती हैं। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि चुनावी माहौल और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण विरोध प्रदर्शनों को अधिक आक्रामक रूप मिल रहा है। दूसरी ओर कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर नेताओं की सुरक्षा के बावजूद ऐसी घटनाएं बार-बार कैसे हो रही हैं। टीएमसी का आरोप है कि विपक्षी दल सुनियोजित तरीके से पार्टी नेताओं को बदनाम करने और माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं भाजपा का कहना है कि जनता अपनी नाराजगी लोकतांत्रिक तरीके से व्यक्त कर रही है और इसके लिए सत्तारूढ़ दल को आत्ममंथन करना चाहिए।
