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13 साल पुराने रेप केस में तरुण तेजपाल दोषी, बॉम्बे हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटा
Digital Desk
2013 में तहलका थिंकफेस्ट के दौरान साथी महिला पत्रकार ने लगाए थे यौन उत्पीड़न के आरोप, 2021 में ट्रायल कोर्ट ने किया था बरी, अब हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला
बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने तहलका मैगजीन के पूर्व एडिटर-इन-चीफ और वरिष्ठ पत्रकार तरुण तेजपाल से जुड़े चर्चित रेप मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए उन्हें दोषी करार दिया है। अदालत ने गोवा की ट्रायल कोर्ट द्वारा वर्ष 2021 में दिए गए बरी करने के फैसले को पलट दिया। यह मामला पिछले करीब 13 वर्षों से न्यायिक प्रक्रिया में था और देश के सबसे चर्चित यौन उत्पीड़न मामलों में शामिल रहा है।
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस डॉ. नीला गोखले और जस्टिस अमित जामदार शामिल थे, ने तीन दिन तक चली अंतिम सुनवाई के बाद 30 जुलाई को फैसला सुरक्षित रख लिया था। गुरुवार को अदालत ने अपना निर्णय सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया और तरुण तेजपाल को दोषी ठहराया। अब इस मामले में सजा पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
2013 में सामने आया था मामला
यह मामला नवंबर 2013 का है, जब गोवा में आयोजित तहलका के वार्षिक कार्यक्रम ‘थिंकफेस्ट’ के दौरान एक महिला पत्रकार ने तरुण तेजपाल पर यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म के गंभीर आरोप लगाए थे। महिला पत्रकार उसी संस्थान में कार्यरत थीं और उन्होंने आरोप लगाया था कि 7 और 8 नवंबर 2013 की रात होटल की लिफ्ट में उनके साथ जबरन यौन शोषण किया गया।
घटना के कुछ समय बाद महिला द्वारा लिखे गए ईमेल सार्वजनिक हो गए, जिसके बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गया। आरोप सामने आने के बाद तरुण तेजपाल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद गोवा पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया और 30 नवंबर 2013 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
जमानत और लंबी न्यायिक प्रक्रिया
गिरफ्तारी के बाद तरुण तेजपाल कई महीनों तक न्यायिक हिरासत में रहे। जुलाई 2014 में उन्हें जमानत मिली। इसके बाद वर्ष 2017 में इस मामले की नियमित सुनवाई शुरू हुई। कई वर्षों तक गवाहों, दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत में सुनवाई चलती रही।
करीब चार साल बाद मई 2021 में गोवा की ट्रायल कोर्ट ने तरुण तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं हुआ। अदालत ने महिला के व्यवहार, मेडिकल साक्ष्यों और अन्य परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए आरोपी को दोषमुक्त कर दिया था।
गोवा सरकार ने हाईकोर्ट में दी चुनौती
ट्रायल कोर्ट के फैसले से असहमत गोवा सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच में अपील दायर की। सरकार की ओर से कहा गया कि ट्रायल कोर्ट ने पीड़िता की गवाही का सही मूल्यांकन नहीं किया और अपने फैसले में कई ऐसे निष्कर्ष निकाले जो न्यायिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थे।
सरकार ने यह भी तर्क दिया कि अदालत ने पीड़िता के आचरण और व्यक्तिगत व्यवहार को अनावश्यक रूप से आधार बनाया, जबकि यौन अपराधों के मामलों में इस प्रकार के दृष्टिकोण से बचने की आवश्यकता होती है।
दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने लगातार यह दलील दी कि महिला के बयानों में विरोधाभास हैं और तकनीकी साक्ष्य आरोपों की पुष्टि नहीं करते। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि सीसीटीवी फुटेज में घटना के अनुरूप दृश्य नहीं मिले और आरोपों के पीछे अन्य कारण हो सकते हैं।
हाईकोर्ट ने पलटा ट्रायल कोर्ट का फैसला
लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के निर्णय को गलत मानते हुए उसे निरस्त कर दिया। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान और मामले की परिस्थितियों का पुनर्मूल्यांकन करते हुए तरुण तेजपाल को दोषी करार दिया।
इस फैसले को भारत की न्यायिक व्यवस्था में यौन अपराधों से जुड़े मामलों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि विस्तृत निर्णय आने के बाद ही अदालत की पूरी कानूनी दलीलें स्पष्ट हो सकेंगी।
तरुण तेजपाल भारतीय पत्रकारिता की चर्चित हस्तियों में रहे हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1980 के दशक में ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ समूह से की थी। इसके बाद उन्होंने ‘इंडिया टुडे’, ‘फाइनेंशियल एक्सप्रेस’ और ‘आउटलुक’ जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं में काम किया।
बाद में उन्होंने अपनी पब्लिशिंग कंपनी ‘इंडिया इंक’ की स्थापना की। इसी कंपनी ने अरुंधति रॉय के प्रसिद्ध उपन्यास ‘द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स’ का प्रकाशन किया, जिसे बुकर पुरस्कार मिला था।
साल 2000 में उन्होंने वरिष्ठ पत्रकार अनिरुद्ध बहल के साथ मिलकर खोजी पत्रकारिता की वेबसाइट ‘तहलका डॉट कॉम’ शुरू की। स्टिंग ऑपरेशनों और खोजी रिपोर्टिंग के कारण तहलका ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। बाद में इसे टैब्लॉयड और फिर मैगजीन के रूप में प्रकाशित किया जाने लगा।
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13 साल पुराने रेप केस में तरुण तेजपाल दोषी, बॉम्बे हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटा
Digital Desk
बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने तहलका मैगजीन के पूर्व एडिटर-इन-चीफ और वरिष्ठ पत्रकार तरुण तेजपाल से जुड़े चर्चित रेप मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए उन्हें दोषी करार दिया है। अदालत ने गोवा की ट्रायल कोर्ट द्वारा वर्ष 2021 में दिए गए बरी करने के फैसले को पलट दिया। यह मामला पिछले करीब 13 वर्षों से न्यायिक प्रक्रिया में था और देश के सबसे चर्चित यौन उत्पीड़न मामलों में शामिल रहा है।
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस डॉ. नीला गोखले और जस्टिस अमित जामदार शामिल थे, ने तीन दिन तक चली अंतिम सुनवाई के बाद 30 जुलाई को फैसला सुरक्षित रख लिया था। गुरुवार को अदालत ने अपना निर्णय सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया और तरुण तेजपाल को दोषी ठहराया। अब इस मामले में सजा पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
2013 में सामने आया था मामला
यह मामला नवंबर 2013 का है, जब गोवा में आयोजित तहलका के वार्षिक कार्यक्रम ‘थिंकफेस्ट’ के दौरान एक महिला पत्रकार ने तरुण तेजपाल पर यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म के गंभीर आरोप लगाए थे। महिला पत्रकार उसी संस्थान में कार्यरत थीं और उन्होंने आरोप लगाया था कि 7 और 8 नवंबर 2013 की रात होटल की लिफ्ट में उनके साथ जबरन यौन शोषण किया गया।
घटना के कुछ समय बाद महिला द्वारा लिखे गए ईमेल सार्वजनिक हो गए, जिसके बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गया। आरोप सामने आने के बाद तरुण तेजपाल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद गोवा पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया और 30 नवंबर 2013 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
जमानत और लंबी न्यायिक प्रक्रिया
गिरफ्तारी के बाद तरुण तेजपाल कई महीनों तक न्यायिक हिरासत में रहे। जुलाई 2014 में उन्हें जमानत मिली। इसके बाद वर्ष 2017 में इस मामले की नियमित सुनवाई शुरू हुई। कई वर्षों तक गवाहों, दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत में सुनवाई चलती रही।
करीब चार साल बाद मई 2021 में गोवा की ट्रायल कोर्ट ने तरुण तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं हुआ। अदालत ने महिला के व्यवहार, मेडिकल साक्ष्यों और अन्य परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए आरोपी को दोषमुक्त कर दिया था।
गोवा सरकार ने हाईकोर्ट में दी चुनौती
ट्रायल कोर्ट के फैसले से असहमत गोवा सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच में अपील दायर की। सरकार की ओर से कहा गया कि ट्रायल कोर्ट ने पीड़िता की गवाही का सही मूल्यांकन नहीं किया और अपने फैसले में कई ऐसे निष्कर्ष निकाले जो न्यायिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थे।
सरकार ने यह भी तर्क दिया कि अदालत ने पीड़िता के आचरण और व्यक्तिगत व्यवहार को अनावश्यक रूप से आधार बनाया, जबकि यौन अपराधों के मामलों में इस प्रकार के दृष्टिकोण से बचने की आवश्यकता होती है।
दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने लगातार यह दलील दी कि महिला के बयानों में विरोधाभास हैं और तकनीकी साक्ष्य आरोपों की पुष्टि नहीं करते। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि सीसीटीवी फुटेज में घटना के अनुरूप दृश्य नहीं मिले और आरोपों के पीछे अन्य कारण हो सकते हैं।
हाईकोर्ट ने पलटा ट्रायल कोर्ट का फैसला
लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के निर्णय को गलत मानते हुए उसे निरस्त कर दिया। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान और मामले की परिस्थितियों का पुनर्मूल्यांकन करते हुए तरुण तेजपाल को दोषी करार दिया।
इस फैसले को भारत की न्यायिक व्यवस्था में यौन अपराधों से जुड़े मामलों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि विस्तृत निर्णय आने के बाद ही अदालत की पूरी कानूनी दलीलें स्पष्ट हो सकेंगी।
तरुण तेजपाल भारतीय पत्रकारिता की चर्चित हस्तियों में रहे हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1980 के दशक में ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ समूह से की थी। इसके बाद उन्होंने ‘इंडिया टुडे’, ‘फाइनेंशियल एक्सप्रेस’ और ‘आउटलुक’ जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं में काम किया।
बाद में उन्होंने अपनी पब्लिशिंग कंपनी ‘इंडिया इंक’ की स्थापना की। इसी कंपनी ने अरुंधति रॉय के प्रसिद्ध उपन्यास ‘द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स’ का प्रकाशन किया, जिसे बुकर पुरस्कार मिला था।
साल 2000 में उन्होंने वरिष्ठ पत्रकार अनिरुद्ध बहल के साथ मिलकर खोजी पत्रकारिता की वेबसाइट ‘तहलका डॉट कॉम’ शुरू की। स्टिंग ऑपरेशनों और खोजी रिपोर्टिंग के कारण तहलका ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। बाद में इसे टैब्लॉयड और फिर मैगजीन के रूप में प्रकाशित किया जाने लगा।
