- Hindi News
- देश विदेश
- WHO बैठक में जेपी नड्डा ने बताया भारत में हेल्थ वर्कफोर्स का विस्तार
WHO बैठक में जेपी नड्डा ने बताया भारत में हेल्थ वर्कफोर्स का विस्तार
Digital Desk
जेपी नड्डा ने WHO RC79 में भारत के मेडिकल कॉलेज, MBBS, PG और नर्सिंग सीटों के विस्तार के साथ विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर दिया।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने तिमोर-लेस्ते की राजधानी डिली में आयोजित WHO South-East Asia Regional Committee के 79वें सत्र (RC79) में भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए विस्तार को प्रमुखता से सामने रखा। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC) के लक्ष्य को हासिल करने के लिए केवल स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विशेषज्ञ सेवाओं तक सभी वर्गों की समान पहुंच सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
मंत्री ने “Human Resources for Health: Equity in Specialized Care” विषय पर आयोजित मंत्रिस्तरीय राउंडटेबल में भारत के मेडिकल, नर्सिंग और Allied Healthcare Workforce में हुई वृद्धि का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों की शिक्षा, प्रशिक्षण, तैनाती, रिटेंशन और निरंतर पेशेवर विकास को एक साथ मजबूत करना होगा, ताकि ग्रामीण, आदिवासी, दूरदराज और वंचित इलाकों तक विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच सकें।
समान स्वास्थ्य पहुंच पर जोर
जेपी नड्डा ने कहा कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने के साथ उनकी भौगोलिक उपलब्धता भी सुनिश्चित करनी होगी।
दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में विशेषज्ञ स्वास्थ्यकर्मियों का बड़े शहरों और निजी स्वास्थ्य संस्थानों में केंद्रित रहना एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में ग्रामीण और कठिन पहुंच वाले इलाकों में विशेषज्ञ सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाना जरूरी है।
नड्डा ने इस दिशा में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता बढ़ाने के साथ बेहतर Workforce Planning की आवश्यकता पर जोर दिया।
मेडिकल कॉलेजों में बड़ा विस्तार
नड्डा ने 2014 के बाद भारत में मेडिकल शिक्षा के बुनियादी ढांचे में हुए विस्तार का आंकड़ा भी साझा किया।
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 2014 में 387 से बढ़कर 2026 में 858 हो गई है। यह करीब 121.71 प्रतिशत की वृद्धि है।
नए मेडिकल संस्थानों की स्थापना और मौजूदा सरकारी मेडिकल कॉलेजों के विस्तार से देश में डॉक्टरों की ट्रेनिंग क्षमता बढ़ी है। इसका उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों और विशेषज्ञताओं में स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता को मजबूत करना है।
MBBS सीटों में 177% वृद्धि
केंद्रीय मंत्री ने MBBS सीटों में हुई वृद्धि को भी भारत की स्वास्थ्य शिक्षा क्षमता के विस्तार का प्रमुख उदाहरण बताया।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, MBBS सीटों की संख्या 2014 में 51,348 से बढ़कर 2026 में 1,42,464 हो गई है। इस अवधि में करीब 177.45 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।
इसी तरह, पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीटों की संख्या 31,185 से बढ़कर 86,287 हो गई है। इसमें करीब 176.69 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
PG सीटों में विस्तार को विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
10 हजार PG सीटों का लक्ष्य
केंद्र सरकार ने 2028-29 तक 10,000 अतिरिक्त पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीटें बनाने का लक्ष्य भी रखा है।
इस विस्तार में उन क्षेत्रों और विशेषज्ञताओं को प्राथमिकता दी जा रही है, जहां स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत अधिक है। इनमें Emergency Medicine, Geriatrics, Psychiatry और Family Medicine जैसी विशेषज्ञताएं शामिल हैं।
सरकार का उद्देश्य मेडिकल शिक्षा का विस्तार केवल बड़े शहरों तक सीमित रखने के बजाय विशेषज्ञ सेवाओं की पहुंच को अपेक्षाकृत कम सुविधा वाले क्षेत्रों तक बढ़ाना है।
नर्सिंग शिक्षा को भी बढ़ावा
जेपी नड्डा ने नर्सिंग क्षेत्र में क्षमता बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया।
सरकार मौजूदा मेडिकल कॉलेजों के साथ 157 नए नर्सिंग कॉलेज स्थापित कर रही है। इन संस्थानों से हर साल करीब 15,700 नए नर्सिंग स्नातकों के तैयार होने की उम्मीद है।
इन कॉलेजों की स्थापना में ऐसे जिलों और क्षेत्रों पर भी ध्यान दिया जा रहा है जहां गुणवत्तापूर्ण नर्सिंग शिक्षा की उपलब्धता सीमित है।
यह पहल डॉक्टरों के साथ-साथ नर्सिंग और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या बढ़ाकर स्वास्थ्य व्यवस्था को व्यापक बनाने की दिशा में है।
Dili Declaration अपनाया गया
WHO South-East Asia Region के 79वें सत्र में Dili Declaration on Human Resources for Health: Equity in Specialized Care को अपनाया गया।
घोषणा में देशों से स्वास्थ्यकर्मियों की योजना, शिक्षा और वित्तपोषण को आबादी की स्वास्थ्य जरूरतों के अनुरूप बनाने की अपील की गई। इसमें विशेषज्ञों की भर्ती, तैनाती और लंबे समय तक सेवाओं में बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है।
घोषणा में multidisciplinary teams, specialist outreach, family medicine, telemedicine और digital health जैसे उपायों के जरिए ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों तक विशेषज्ञ सेवाएं पहुंचाने की बात कही गई है।
भारत को मिले दो WHO सम्मान
RC79 के दौरान भारत को WHO South-East Asia Region की ओर से दो क्षेत्रीय पुरस्कार भी मिले।
एक सम्मान भारत की ओर से maternal and neonatal tetanus को खत्म करने में लगातार उपलब्धि के लिए दिया गया। दूसरा सम्मान प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था के जरिए non-communicable diseases (NCDs) से निपटने में भारत के नेतृत्व के लिए मिला।
नड्डा ने इन सम्मानों को देश के फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मियों को समर्पित किया और स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में उनके योगदान को रेखांकित किया।
WHO बैठक में नड्डा की टिप्पणी से भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र की व्यापक रणनीति सामने आई, जिसमें मेडिकल शिक्षा, नर्सिंग, विशेषज्ञ सेवाओं, डिजिटल हेल्थ और प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था को एक साथ मजबूत करने पर जोर है। इसका मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता बढ़ाने के साथ देश के ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की समान पहुंच सुनिश्चित करना है।
Recommended for You
दैनिक जागरण से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:

