- Hindi News
- देश विदेश
- Stock Market Today: US-Iran तनाव और महंगे Crude ने क्यों बढ़ाई बाजार की चिंता? जानें Sensex-Nifty गि...
Stock Market Today: US-Iran तनाव और महंगे Crude ने क्यों बढ़ाई बाजार की चिंता? जानें Sensex-Nifty गिरने की पूरी वजह
Digital Desk
भारतीय शेयर बाजार पर West Asia तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमत और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का दबाव बना हुआ है। Brent crude करीब 95 डॉलर प्रति बैरल पर बना है। हालांकि 3 सितंबर को शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty ने हल्की रिकवरी दिखाई।
Stock Market Today: बाजार में क्यों बढ़ी चिंता?
मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में हाल के सत्रों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और महंगाई को लेकर चिंता ने निवेशकों का रुख सतर्क किया है। 2 सितंबर के कारोबार में Sensex 373.93 अंक गिरकर 76,570.35 पर और Nifty 141.35 अंक टूटकर 23,914.45 पर बंद हुआ।
हालांकि 3 सितंबर को तस्वीर कुछ सुधरी। शुरुआती कारोबार में Sensex करीब 207 अंक चढ़कर 76,777 के आसपास और Nifty करीब 54 अंक बढ़कर 23,968 के स्तर पर पहुंचा। बैंकिंग शेयरों में मजबूती और वैश्विक बाजारों से मिले बेहतर संकेतों ने बाजार को सहारा दिया।
इसके बावजूद निवेशकों की नजर अब भी कच्चे तेल, US-Iran घटनाक्रम और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर है।
Crude Oil $95 के पार क्यों अहम है?
West Asia में तनाव बढ़ने के साथ Brent crude करीब 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। 3 सितंबर की सुबह Brent करीब 95.33 डॉलर और WTI करीब 90.88 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
भारत के लिए महंगा कच्चा तेल खास चिंता का विषय है क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अगर तेल की कीमत लंबे समय तक ऊंची रहती है तो भारत का import bill बढ़ सकता है और रुपये पर दबाव आ सकता है।
महंगे तेल का असर केवल पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहता। परिवहन, विमानन, पेंट, टायर, केमिकल और पैकेजिंग जैसे क्षेत्रों की लागत पर भी इसका असर पड़ सकता है। वहीं, लंबे समय तक महंगा crude महंगाई को प्रभावित कर सकता है।
US-Iran तनाव से बाजार क्यों डर रहा है?
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कहीं लंबे समय तक न खिंच जाए। खासतौर पर Strait of Hormuz के आसपास शिपिंग गतिविधियों को लेकर अनिश्चितता ने तेल बाजार की चिंता बढ़ाई है।
रिपोर्टों के मुताबिक 2 सितंबर को केवल चार commodity vessels ने Hormuz से गुजरने की सूचना दी, जबकि 10 दिन का औसत करीब 13 जहाज प्रतिदिन था। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है।
बाजार की चिंता केवल मौजूदा तेल कीमत नहीं है। निवेशक यह देख रहे हैं कि अगर आपूर्ति बाधित रहती है तो crude कितने समय तक ऊंचे स्तर पर रह सकता है।
अमेरिकी Bond Yield भी बना दबाव
शेयर बाजार की दूसरी बड़ी चिंता अमेरिकी Treasury yields हैं। US 10-year Treasury yield हाल में करीब 4.8% के स्तर तक पहुंचा, जिससे वैश्विक equity valuations पर दबाव बढ़ा।
ऊंची बॉन्ड यील्ड का मतलब है कि निवेशकों को अपेक्षाकृत सुरक्षित अमेरिकी सरकारी बॉन्ड से बेहतर रिटर्न मिल सकता है। ऐसे माहौल में जोखिम वाली परिसंपत्तियों, खासकर महंगी valuations वाले growth और technology stocks पर दबाव बढ़ सकता है।
यही वजह है कि बाजार में सिर्फ oil-sensitive कंपनियां ही नहीं, बल्कि IT और दूसरे sectors में भी बिकवाली देखने को मिली।
किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा असर?
महंगे crude का असर सभी कंपनियों पर एक जैसा नहीं होता। कुछ sectors सीधे तौर पर ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।
Airlines: Aviation fuel की लागत बढ़ने पर operating margins पर दबाव आ सकता है।
Paints: कई raw materials crude derivatives से जुड़े होते हैं, इसलिए input costs बढ़ सकती हैं।
Tyres: Synthetic rubber और petroleum-linked inputs की कीमतें बढ़ने का असर लागत पर पड़ सकता है।
Chemicals और Packaging: कई कंपनियों की production लागत crude और उसके derivatives से प्रभावित होती है।
Logistics: महंगे fuel से transportation cost बढ़ सकती है।
इसके उलट कुछ oil-producing और upstream कंपनियों को ऊंची crude कीमतों से फायदा भी हो सकता है। इसलिए बाजार में sector-wise असर अलग-अलग दिखाई देता है।
क्या भारत की Economy पर भी पड़ेगा असर?
फिलहाल बाजार की कमजोरी को भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था में अचानक आई बड़ी कमजोरी के तौर पर देखना सही नहीं होगा। हाल के मजबूत economic indicators के बावजूद global geopolitical risks निवेशकों के लिए बड़ा external headwind बने हुए हैं।
असल चिंता तब बढ़ेगी जब crude लंबे समय तक 90-100 डॉलर के ऊंचे दायरे में बना रहे। ऐसी स्थिति में import bill, inflation, rupee और corporate margins पर दबाव बढ़ सकता है।
इसके विपरीत अगर अमेरिका-ईरान तनाव कम होता है और Hormuz में shipping सामान्य होती है, तो crude में आया geopolitical premium तेजी से कम हो सकता है।
आज निवेशकों को किन चीजों पर नजर रखनी चाहिए?
1. Brent crude: क्या कीमत 95 डॉलर के आसपास टिकती है या नीचे आती है, यह अहम होगा।
2. US-Iran conflict: तनाव में कमी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हो सकती है।
3. Strait of Hormuz: यहां shipping activity में बदलाव global oil supply के लिए महत्वपूर्ण है।
4. US 10-year yield: 4.8-5% के आसपास ऊंची yield equity valuations के लिए चुनौती बनी रह सकती है।
5. Rupee: महंगे crude और कमजोर रुपये का संयोजन imported inflation का जोखिम बढ़ा सकता है।
आज बाजार का रुख क्या बता रहा है?
3 सितंबर की शुरुआती तेजी यह संकेत देती है कि निवेशक सिर्फ geopolitical risks पर ही प्रतिक्रिया नहीं दे रहे, बल्कि घरेलू liquidity और global market recovery जैसे सकारात्मक संकेतों को भी देख रहे हैं। Reuters के मुताबिक गुरुवार को Sensex और Nifty शुरुआती कारोबार में करीब 0.35% ऊपर थे।
इसलिए मौजूदा बाजार को केवल “crash” के तौर पर देखना उचित नहीं होगा। फिलहाल यह geopolitical uncertainty, crude prices, bond yields और domestic economic strength के बीच खींचतान का दौर है।
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह नहीं है कि Brent एक दिन के लिए 95 या 100 डॉलर तक पहुंचता है या नहीं। असली जोखिम इस बात से तय होगा कि crude कितने समय तक ऊंचा रहता है। अगर कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं तो इसका असर महंगाई, रुपये और कंपनियों की कमाई तक पहुंच सकता है। वहीं तनाव कम होने पर बाजार में राहत की वापसी भी संभव है।
Recommended for You
दैनिक जागरण से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:

