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कुंभ से आगे: भविष्य के नाशिक की बुनियाद रख रही हैं ये सड़कें
Digital Desk
सिंहस्थ कुंभ 2027 की तैयारियों को अक्सर नई सड़कें, घाटों का सौंदर्यीकरण और यातायात व्यवस्था तक सीमित नजरिए से देखा जाता है। लेकिन नाशिक में जो परिवर्तन आज दिखाई दे रहा है, वह केवल एक धार्मिक आयोजन की तैयारी नहीं है। यह शहर के अगले कई दशकों की आधारभूत संरचना तैयार करने की एक दूरदर्शी पहल है।
भारत के अधिकांश शहरों में सड़क बनने के कुछ ही महीनों बाद वह किसी नई पाइपलाइन, गैस लाइन, केबल या फाइबर नेटवर्क के लिए दोबारा खोद दी जाती है। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई सड़कें बार-बार टूटती हैं, नागरिकों को असुविधा होती है, यातायात बाधित होता है और सार्वजनिक धन का भी नुकसान होता है। वर्षों से यह व्यवस्था लगभग सामान्य मान ली गई थी।
नाशिक महानगरपालिका ने अब इसी सोच को बदलने का निर्णय लिया है।
सिंहस्थ कुंभ 2027 को अवसर मानते हुए शहर के 28 प्रमुख मार्गों पर एक ऐसी कार्यपद्धति अपनाई जा रही है, जिसमें सड़क बनने से पहले उसके नीचे भविष्य की सभी आवश्यक नागरिक सुविधाओं का संपूर्ण नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। यह केवल सड़क निर्माण नहीं, बल्कि भूमिगत शहरी अवसंरचना (Underground Urban Infrastructure) का एक समन्वित मॉडल है।
इन मार्गों के नीचे एक साथ पेयजल पाइपलाइन, सीवरेज नेटवर्क, वर्षा जल निकासी प्रणाली, एमएनजीएल (MNGL) गैस पाइपलाइन, विद्युत सुविधाएं, दूरसंचार नेटवर्क तथा आठ ऑप्टिकल फाइबर डक्ट बिछाए जा रहे हैं। अमृत योजना के अंतर्गत कई स्थानों पर पुरानी जलापूर्ति लाइनों को बदलकर नई पाइपलाइन भी स्थापित की जा रही है। उद्देश्य स्पष्ट है—एक बार सड़क बने, तो आने वाले वर्षों तक उसे दोबारा खोदने की आवश्यकता न पड़े।

यह मॉडल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत के तेजी से विकसित होते शहरों में हर वर्ष नई-नई सेवाएं जुड़ती रहती हैं। यदि प्रत्येक एजेंसी अपनी सुविधा के अनुसार सड़क खोदती रहे, तो शहर कभी स्थायी और व्यवस्थित नहीं बन सकता। नाशिक ने पहली बार सभी प्रमुख एजेंसियों को एक साझा योजना के अंतर्गत एक मंच पर लाकर काम शुरू किया है।
इस समय नगर निगम के साथ सात अलग-अलग विभाग और एजेंसियां समन्वय के साथ कार्य कर रही हैं। जलापूर्ति, सीवरेज, गैस वितरण, बिजली, दूरसंचार, ऑप्टिकल फाइबर और अन्य तकनीकी संस्थाएं एक ही परियोजना के अंतर्गत अपनी-अपनी भूमिगत सुविधाएं स्थापित कर रही हैं। यही समन्वय इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता है।

इस पूरी प्रक्रिया में आधुनिक जीआईएस (Geographic Information System) तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। भूमिगत पाइपलाइन, केबल और अन्य सुविधाओं का डिजिटल मानचित्र तैयार किया जा रहा है, जिससे भविष्य में किसी भी मरम्मत या नई योजना के लिए बिना अनावश्यक खुदाई के सटीक जानकारी उपलब्ध रहेगी। यही तकनीक विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और वैज्ञानिक योजना बनाने में भी मदद कर रही है।
नाशिक में वर्तमान में 28 प्रमुख सड़कों पर लगभग 117 किलोमीटर लंबाई में 120 से अधिक भूमिगत उपयोगिता कार्य एक साथ चल रहे हैं। शहर के इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में सड़कों पर इस स्तर का समन्वित आधारभूत विकास हो रहा है। स्वाभाविक रूप से इतने बड़े कार्यों के कारण कुछ स्थानों पर नागरिकों को अस्थायी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन इसका उद्देश्य केवल आज की जरूरतें पूरी करना नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की परेशानियों को समाप्त करना है।
नगर निगम का लक्ष्य स्पष्ट है कि सभी उपयोगिता कार्य पूर्ण होने और सड़क निर्माण समाप्त होने के बाद अगले छह से आठ वर्षों तक इन मार्गों पर नई खुदाई की आवश्यकता न पड़े। यदि यह लक्ष्य सफल होता है, तो न केवल सार्वजनिक धन की बचत होगी, बल्कि सड़कों की गुणवत्ता बेहतर बनी रहेगी, यातायात व्यवस्थित रहेगा और नागरिकों को बार-बार होने वाली असुविधा से भी राहत मिलेगी।
यह परिवर्तन केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं है। गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कार्यों की नियमित निगरानी की जा रही है। निर्धारित मानकों का पालन न करने वाले ठेकेदारों पर दंडात्मक कार्रवाई भी की गई है। इससे स्पष्ट संदेश दिया गया है कि विकास की गति के साथ गुणवत्ता और जवाबदेही से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
नाशिक महानगरपालिका आयुक्त मनीषा खत्री के नेतृत्व में यह पहल केवल सिंहस्थ की तैयारियों का हिस्सा नहीं, बल्कि भविष्य की शहरी योजना का एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। कुंभ समाप्त होने के बाद भी यही सड़कें शहर की अर्थव्यवस्था, परिवहन, उद्योग, पर्यटन और नागरिक जीवन की रीढ़ बनेंगी।
आज जब देश के अधिकांश शहर तेजी से विस्तार कर रहे हैं, तब नाशिक का यह मॉडल एक महत्वपूर्ण संदेश देता है सड़क केवल ऊपर दिखाई देने वाला डामर नहीं होती, बल्कि उसके नीचे छिपी हुई वह संपूर्ण व्यवस्था होती है जो किसी शहर को दशकों तक सुचारु रूप से चलाती है।
यदि शहरों का विकास वास्तव में भविष्य को ध्यान में रखकर करना है, तो केवल सड़कें बनाना पर्याप्त नहीं है। सड़क के नीचे भविष्य बसाना भी उतना ही आवश्यक है। नाशिक आज इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहा है।
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