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BCI के पुनर्गठन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, State Bar Council चुनाव के बाद होगा फैसला: AG- SG की भूमिका तय
Digital Desk
सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के पुनर्गठन की दिशा में अहम कदम उठाते हुए State Bar Councils की चुनावी प्रक्रिया पूरी करने की समयसीमा तय की है। कोर्ट ने कहा कि नई State Bar Councils अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगी, जिसके बाद BCI के पुनर्गठन पर विचार किया जाएगा।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के पुनर्गठन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार, 2 सितंबर 2026 को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि पहले नई State Bar Councils का गठन और जरूरी वैधानिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद उनके प्रतिनिधियों के जरिए BCI के पुनर्गठन पर विचार होगा।
पीठ में CJI सूर्यकांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल हैं। कोर्ट ने यह निर्देश BCI के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के कार्यकाल और संस्था के मौजूदा ढांचे को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया।
State Bar Councils के लिए तय हुई समयसीमा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों द्वारा जरूरी सह-नामांकन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद State Bar Councils को अपनी संरचना अधिसूचित करनी होगी। इसके बाद नई State Bar Councils को अपने चेयरपर्सन, वाइस चेयरपर्सन, अन्य पदाधिकारियों और BCI के प्रतिनिधि का चुनाव दो सप्ताह के भीतर करना होगा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि संबंधित State Bar Councils को अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। इन रिपोर्टों के मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट Advocates Act, 1961 की धारा 4 के तहत BCI के पुनर्गठन के मुद्दे पर विचार करेगा।
BCI के बड़े नीतिगत फैसलों पर AG और SG की नजर
जब तक नया BCI गठित नहीं हो जाता, सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों को लेकर भी व्यवस्था तय की है। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को BCI के हर नीतिगत फैसले में सक्रिय रूप से शामिल किया जाएगा। दोनों BCI के पदेन सदस्य हैं। वहीं BCI का मौजूदा प्रशासन रोजमर्रा के कामकाज को जारी रख सकता है। कोर्ट की व्यवस्था के मुताबिक अंतरिम अवधि में दैनिक प्रशासन चलाया जा सकता है, लेकिन बड़े नीतिगत फैसलों में AG और SG की भागीदारी जरूरी होगी।
मनन कुमार मिश्रा की भूमिका पर कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठे। याचिकाकर्ताओं ने उनके लंबे कार्यकाल और 2030 तक कार्यकाल बढ़ाने से संबंधित अधिसूचनाओं को चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर मिश्रा के खिलाफ कोई प्रतिकूल आदेश पारित नहीं किया, लेकिन यह स्पष्ट किया कि चुनाव होने तक उनकी भूमिका Pro Tem यानी अंतरिम चेयरमैन के तौर पर देखी जा रही है। कोर्ट ने कहा कि उनका काम मुख्य रूप से BCI के रोजमर्रा के कामकाज को संभालना है। CJI सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट किया कि कोर्ट किसी एक व्यक्ति को निशाना बनाने के बजाय BCI के वैधानिक ढांचे और संस्थागत व्यवस्था की जांच कर रहा है।
BCI चुनाव की दिशा में अब क्या होगा?
अब तीन प्रमुख प्रक्रियाएं पूरी होनी हैं—State Bar Councils में जरूरी सह-नामांकन, उनके पदाधिकारियों का चुनाव और प्रत्येक State Bar Council की ओर से BCI के प्रतिनिधि का चुनाव। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट BCI के पुनर्गठन पर आगे निर्णय लेगा। इससे BCI के भविष्य के प्रतिनिधित्व और नेतृत्व को लेकर चल रहा विवाद चुनावी प्रक्रिया की दिशा में आगे बढ़ सकता है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का रुख स्पष्ट है कि पहले State Bar Councils की प्रक्रिया पूरी होगी और उसके बाद BCI के पुनर्गठन पर फैसला होगा।
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