भारतीयों के लिए वैश्विक निवेश क्यों बन रहा है अगला बड़ा कदम 

धीरज रेली MD & CEO HDFC Securities

पिछले दस सालों पर नज़र डालें, तो भारतीयों का पैसा बढ़ाने का सफर ज़्यादातर देश के अंदर ही सीमित रहा है। भारतीय शेयर बाज़ार, स्थानीय म्यूचुअल फंड और अपने देश के कारोबारों ने लोगों की कमाई और संपत्ति को तेज़ी से बढ़ाया है।

इससे लाखों भारतीय खुलकर और भरोसे के साथ निवेश करने लगे हैं। लेकिन अब भारतीय निवेशक ज़्यादा अनुभवी, समझदार और जागरूक हो रहे हैं, इसलिए निवेश का एक नया दौर शुरू हो रहा है, जो देश की सीमाओं से बाहर जा रहा है। भारत में संपत्ति बढ़ाने के इस पूरे सफर में अब दुनिया भर में पैसा लगाना, यानी ग्लोबल इन्वेस्टिंग, अगला और सबसे सही कदम बनता जा रहा है।

भारत का वेल्थ इंजन: एक बड़े कैनवास के लिए बना

अनुमान है कि 2030 तक भारत में लोगों की कुल वित्तीय संपत्ति में 190 लाख करोड़ रुपये से भी ज़्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है। इससे भारत दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते बाज़ारों में से एक बन जाता है। यह रफ्तार अचानक नहीं आई, बल्कि तीन बड़े बदलावों की वजह से आई है। पहला, मध्यम वर्ग की कमाई और उनके पास बचने वाले पैसे में भारी बढ़ोतरी हुई है। दूसरा, डिजिटलीकरण, नियमों में सुधार और पारदर्शिता ने ज़्यादा परिवारों को वित्तीय बाज़ारों में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित किया है। तीसरा, रियल एस्टेट और सोने जैसे पुराने निवेश विकल्पों से हटकर लोग अब वित्तीय साधनों की तरफ साफ तौर पर बढ़ रहे हैं। जैसे-जैसे ज़्यादा भारतीय परिवार "पहली बार के निवेशकों" से "गंभीरता से संपत्ति बढ़ाने वालों" में बदल रहे हैं, उनके निवेश पोर्टफोलियो को भी उसी हिसाब से आगे बढ़ना चाहिए।

सिर्फ देश के अंदर निवेश करने की सीमा

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इतनी बड़ी तरक्की के बावजूद, एक बड़ी दिक्कत अब भी बनी हुई है। भारत का बाज़ार दुनिया के कुल बाज़ार का सिर्फ करीब 4% ही है। इसका मतलब है कि सिर्फ भारतीय एसेट्स में पैसा लगाकर, निवेशक दुनिया की 96% लिस्टेड कंपनियों, सेक्टरों और नई तकनीक के केंद्रों को अपने पोर्टफोलियो से बाहर रख देते हैं।

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आने वाले समय में पैसा बनाने की दिशा तय करने वाले कई क्षेत्र, जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड कंप्यूटिंग, बायोटेक में हो रहे नए आविष्कार और स्वच्छ ऊर्जा, ज़्यादातर विदेशी बाज़ारों में ही मौजूद हैं। सिर्फ भारत की सीमाओं में बंधे रहकर, निवेशक तरक्की के उन बड़े मौकों से चूक सकते हैं, जो उनके लंबी अवधि के रिटर्न को काफी बेहतर बना सकते थे।

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विविधता: अलग-अलग बाज़ारों और समय-चक्रों को साधना

देश की सीमाओं से आगे देखने की सबसे बड़ी वजहों में से एक यह है कि अलग-अलग बाज़ार आर्थिक उतार-चढ़ाव के दौरान अलग-अलग तरह से प्रदर्शन करते हैं। कोई भी एक देश या इलाका हमेशा आगे नहीं रहता, बल्कि यह बढ़त बदलती रहती है। कभी अमेरिका अपनी नई तकनीक और टेक सेक्टर के दम पर आगे रहता है, तो कभी यूरोप, जापान या उभरते हुए बाज़ार सुर्खियों में आ जाते हैं, अक्सर सालों तक पीछे रहने के बाद।

ग्लोबल इन्वेस्टिंग यानी वैश्विक निवेश भारतीय निवेशकों को सिर्फ एक ही आर्थिक हालात पर पूरी तरह टिके रहने के बजाय, इन अलग-अलग बाज़ार चक्रों में हिस्सा लेने का मौका देता है। एक विविध विदेशी पोर्टफोलियो, चाहे बड़े इंडेक्स के ज़रिए हो, ग्लोबल फंड्स के ज़रिए हो या थीम-आधारित निवेश के ज़रिए, उतार-चढ़ाव को कम करने और सिर्फ अपने देश पर ज़्यादा भरोसा करने की आदत घटाने में मदद कर सकता है, जो अक्सर पोर्टफोलियो को देश की मंदी या नीतिगत झटकों के असर में डाल देती है। लंबे समय में, ऐसे संतुलित पोर्टफोलियो ज़्यादा मज़बूत और जोखिम के हिसाब से बेहतर रिटर्न देते हैं।

मुद्रा का असर: रुपये की कमज़ोरी को कैसे फायदे में बदलें

वैश्विक निवेश का एक और अहम पहलू मुद्रा यानी करेंसी है। अब तक देखा गया है कि अमेरिकी डॉलर जैसी बड़ी करेंसी के मुकाबले भारतीय रुपया कमज़ोर होता रहा है। हालांकि इस कमज़ोरी से बाहर से आने वाला सामान महंगा हो सकता है और विदेश में खर्च बढ़ सकता है, लेकिन यह एक बड़ा मौका भी देती है। मज़बूत करेंसी वाले देशों के शेयरों और फंड्स में निवेश करना रुपये की कमज़ोरी से बचाव का काम करता है।

वैश्विक निवेश तक पहुंचने का पूरा ढांचा तैयार

इस वक्त की सबसे रोमांचक बात यह है कि भारत से वैश्विक निवेश करने का पूरा सिस्टम अब पूरी तरह तैयार हो चुका है। लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) जैसी योजनाएं लोगों को तय सालाना सीमा के भीतर विदेश में निवेश करने का नियमों के दायरे में एक रास्ता देती हैं। इसके साथ ही, गिफ्ट सिटी अब एक वैश्विक वित्तीय केंद्र के तौर पर उभर रहा है, जहां ऐसे फंड और ढांचे मौजूद हैं जो सीमा पार निवेश को आसान बनाते हैं और टैक्स व संपत्ति की योजना बनाने से जुड़ी चिंताओं का भी हल देते हैं।

पहुंच के मोर्चे पर, डिजिटल ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म, ईटीएफ, फीडर फंड और खासतौर पर वैश्विक निवेश की सलाह देने वाली सेवाओं ने रास्ते की कई अड़चनें काफी कम कर दी हैं। आज, निवेशक जाने-पहचाने और नियमों के दायरे में चलने वाले रास्तों से विदेशी बाज़ारों तक पहुंच सकते हैं, जिससे वैश्विक निवेश एक दूर का सपना नहीं, बल्कि हकीकत बन गया है।

हाल के बाज़ार रुझान हमें क्या सिखा रहे हैं

नैस्डैक-100 जैसे अमेरिकी टेक इंडेक्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर में हुए नए आविष्कारों के दम पर ज़बरदस्त रिटर्न दिए हैं। एक, तीन और पांच साल की अवधि में, इन इंडेक्स ने कई वैश्विक बेंचमार्क से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है।

लेकिन बाज़ार में आगे कौन रहेगा, यह बदलता रहता है, कोई एक बाज़ार हमेशा आगे नहीं रहता। इटली के एफटीएसई एमआईबी इंडेक्स ने पिछले पांच सालों में यूरोप के दूसरे इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन किया है। अर्जेंटीना और न्यूज़ीलैंड जैसे छोटे बाज़ारों ने भी समय-समय पर शानदार प्रदर्शन दिखाया है, जो अक्सर सस्ते वैल्यूएशन के फिर से बढ़ने, नीतिगत सुधारों या किसी खास सेक्टर के अनुकूल माहौल की वजह से हुआ।

इससे मिलने वाली सबसे बड़ी सीख यह है कि वैश्विक बाज़ारों में आगे रहने वाला देश या सेक्टर लगातार बदलता रहता है। सिर्फ एक बाज़ार या एक थीम पर टिके रहने से दुनिया के बाकी हिस्सों में मिलने वाले बड़े मौके छूट सकते हैं।

सुर्खियों से आगे: कहां हैं असली मौके

वैश्विक निवेश को असल में समझने के लिए, कुछ खास सेक्टरों पर नज़र डालना मददगार होता है। अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियां, जिन्हें आमतौर पर 'मैग्निफिसेंट सेवन' और 'मैंगो' के नाम से जाना जाता है, आज भी दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले प्लेटफॉर्म पर अपना दबदबा साबित कर रही हैं। डेनमार्क की बड़ी दवा कंपनियां इसकी अच्छी मिसाल हैं, जिनकी डायबिटीज़ और मोटापे की दवाओं की मांग पूरी दुनिया में है। नीदरलैंड की मशीन बनाने वाली कंपनियां दुनिया भर के चिप बनाने वालों को ज़रूरी तकनीक देती हैं। कनाडा में परमाणु ऊर्जा, ब्राज़ील में ऊर्जा के नए साधन, और ब्रिटेन में वित्तीय सेवाएं, ये सब वैश्विक निवेश के अहम केंद्र बनकर उभरे हैं।

भारत की अपनी विकास कहानी आज भी बेहद मज़बूत और आकर्षक बनी हुई है, लेकिन पैसा बनाने के हमारे सफर का अगला अध्याय अब एक वैश्विक फलक पर लिखा जाएगा। जो निवेशक समझदारी, अनुशासन और विशेषज्ञों की सलाह के साथ यह राह अपनाएंगे, वे सचमुच देश की सीमाओं से भी आगे निकलेंगे, और अपनी पुरानी सोच की सीमाओं से भी।

 

www.dainikjagranmpcg.com
12 Aug 2026 By दैनिक जागरण

भारतीयों के लिए वैश्विक निवेश क्यों बन रहा है अगला बड़ा कदम 

धीरज रेली MD & CEO HDFC Securities

इससे लाखों भारतीय खुलकर और भरोसे के साथ निवेश करने लगे हैं। लेकिन अब भारतीय निवेशक ज़्यादा अनुभवी, समझदार और जागरूक हो रहे हैं, इसलिए निवेश का एक नया दौर शुरू हो रहा है, जो देश की सीमाओं से बाहर जा रहा है। भारत में संपत्ति बढ़ाने के इस पूरे सफर में अब दुनिया भर में पैसा लगाना, यानी ग्लोबल इन्वेस्टिंग, अगला और सबसे सही कदम बनता जा रहा है।

भारत का वेल्थ इंजन: एक बड़े कैनवास के लिए बना

अनुमान है कि 2030 तक भारत में लोगों की कुल वित्तीय संपत्ति में 190 लाख करोड़ रुपये से भी ज़्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है। इससे भारत दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते बाज़ारों में से एक बन जाता है। यह रफ्तार अचानक नहीं आई, बल्कि तीन बड़े बदलावों की वजह से आई है। पहला, मध्यम वर्ग की कमाई और उनके पास बचने वाले पैसे में भारी बढ़ोतरी हुई है। दूसरा, डिजिटलीकरण, नियमों में सुधार और पारदर्शिता ने ज़्यादा परिवारों को वित्तीय बाज़ारों में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित किया है। तीसरा, रियल एस्टेट और सोने जैसे पुराने निवेश विकल्पों से हटकर लोग अब वित्तीय साधनों की तरफ साफ तौर पर बढ़ रहे हैं। जैसे-जैसे ज़्यादा भारतीय परिवार "पहली बार के निवेशकों" से "गंभीरता से संपत्ति बढ़ाने वालों" में बदल रहे हैं, उनके निवेश पोर्टफोलियो को भी उसी हिसाब से आगे बढ़ना चाहिए।

सिर्फ देश के अंदर निवेश करने की सीमा

इतनी बड़ी तरक्की के बावजूद, एक बड़ी दिक्कत अब भी बनी हुई है। भारत का बाज़ार दुनिया के कुल बाज़ार का सिर्फ करीब 4% ही है। इसका मतलब है कि सिर्फ भारतीय एसेट्स में पैसा लगाकर, निवेशक दुनिया की 96% लिस्टेड कंपनियों, सेक्टरों और नई तकनीक के केंद्रों को अपने पोर्टफोलियो से बाहर रख देते हैं।

आने वाले समय में पैसा बनाने की दिशा तय करने वाले कई क्षेत्र, जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड कंप्यूटिंग, बायोटेक में हो रहे नए आविष्कार और स्वच्छ ऊर्जा, ज़्यादातर विदेशी बाज़ारों में ही मौजूद हैं। सिर्फ भारत की सीमाओं में बंधे रहकर, निवेशक तरक्की के उन बड़े मौकों से चूक सकते हैं, जो उनके लंबी अवधि के रिटर्न को काफी बेहतर बना सकते थे।

विविधता: अलग-अलग बाज़ारों और समय-चक्रों को साधना

देश की सीमाओं से आगे देखने की सबसे बड़ी वजहों में से एक यह है कि अलग-अलग बाज़ार आर्थिक उतार-चढ़ाव के दौरान अलग-अलग तरह से प्रदर्शन करते हैं। कोई भी एक देश या इलाका हमेशा आगे नहीं रहता, बल्कि यह बढ़त बदलती रहती है। कभी अमेरिका अपनी नई तकनीक और टेक सेक्टर के दम पर आगे रहता है, तो कभी यूरोप, जापान या उभरते हुए बाज़ार सुर्खियों में आ जाते हैं, अक्सर सालों तक पीछे रहने के बाद।

ग्लोबल इन्वेस्टिंग यानी वैश्विक निवेश भारतीय निवेशकों को सिर्फ एक ही आर्थिक हालात पर पूरी तरह टिके रहने के बजाय, इन अलग-अलग बाज़ार चक्रों में हिस्सा लेने का मौका देता है। एक विविध विदेशी पोर्टफोलियो, चाहे बड़े इंडेक्स के ज़रिए हो, ग्लोबल फंड्स के ज़रिए हो या थीम-आधारित निवेश के ज़रिए, उतार-चढ़ाव को कम करने और सिर्फ अपने देश पर ज़्यादा भरोसा करने की आदत घटाने में मदद कर सकता है, जो अक्सर पोर्टफोलियो को देश की मंदी या नीतिगत झटकों के असर में डाल देती है। लंबे समय में, ऐसे संतुलित पोर्टफोलियो ज़्यादा मज़बूत और जोखिम के हिसाब से बेहतर रिटर्न देते हैं।

मुद्रा का असर: रुपये की कमज़ोरी को कैसे फायदे में बदलें

वैश्विक निवेश का एक और अहम पहलू मुद्रा यानी करेंसी है। अब तक देखा गया है कि अमेरिकी डॉलर जैसी बड़ी करेंसी के मुकाबले भारतीय रुपया कमज़ोर होता रहा है। हालांकि इस कमज़ोरी से बाहर से आने वाला सामान महंगा हो सकता है और विदेश में खर्च बढ़ सकता है, लेकिन यह एक बड़ा मौका भी देती है। मज़बूत करेंसी वाले देशों के शेयरों और फंड्स में निवेश करना रुपये की कमज़ोरी से बचाव का काम करता है।

वैश्विक निवेश तक पहुंचने का पूरा ढांचा तैयार

इस वक्त की सबसे रोमांचक बात यह है कि भारत से वैश्विक निवेश करने का पूरा सिस्टम अब पूरी तरह तैयार हो चुका है। लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) जैसी योजनाएं लोगों को तय सालाना सीमा के भीतर विदेश में निवेश करने का नियमों के दायरे में एक रास्ता देती हैं। इसके साथ ही, गिफ्ट सिटी अब एक वैश्विक वित्तीय केंद्र के तौर पर उभर रहा है, जहां ऐसे फंड और ढांचे मौजूद हैं जो सीमा पार निवेश को आसान बनाते हैं और टैक्स व संपत्ति की योजना बनाने से जुड़ी चिंताओं का भी हल देते हैं।

पहुंच के मोर्चे पर, डिजिटल ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म, ईटीएफ, फीडर फंड और खासतौर पर वैश्विक निवेश की सलाह देने वाली सेवाओं ने रास्ते की कई अड़चनें काफी कम कर दी हैं। आज, निवेशक जाने-पहचाने और नियमों के दायरे में चलने वाले रास्तों से विदेशी बाज़ारों तक पहुंच सकते हैं, जिससे वैश्विक निवेश एक दूर का सपना नहीं, बल्कि हकीकत बन गया है।

हाल के बाज़ार रुझान हमें क्या सिखा रहे हैं

नैस्डैक-100 जैसे अमेरिकी टेक इंडेक्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर में हुए नए आविष्कारों के दम पर ज़बरदस्त रिटर्न दिए हैं। एक, तीन और पांच साल की अवधि में, इन इंडेक्स ने कई वैश्विक बेंचमार्क से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है।

लेकिन बाज़ार में आगे कौन रहेगा, यह बदलता रहता है, कोई एक बाज़ार हमेशा आगे नहीं रहता। इटली के एफटीएसई एमआईबी इंडेक्स ने पिछले पांच सालों में यूरोप के दूसरे इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन किया है। अर्जेंटीना और न्यूज़ीलैंड जैसे छोटे बाज़ारों ने भी समय-समय पर शानदार प्रदर्शन दिखाया है, जो अक्सर सस्ते वैल्यूएशन के फिर से बढ़ने, नीतिगत सुधारों या किसी खास सेक्टर के अनुकूल माहौल की वजह से हुआ।

इससे मिलने वाली सबसे बड़ी सीख यह है कि वैश्विक बाज़ारों में आगे रहने वाला देश या सेक्टर लगातार बदलता रहता है। सिर्फ एक बाज़ार या एक थीम पर टिके रहने से दुनिया के बाकी हिस्सों में मिलने वाले बड़े मौके छूट सकते हैं।

सुर्खियों से आगे: कहां हैं असली मौके

वैश्विक निवेश को असल में समझने के लिए, कुछ खास सेक्टरों पर नज़र डालना मददगार होता है। अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियां, जिन्हें आमतौर पर 'मैग्निफिसेंट सेवन' और 'मैंगो' के नाम से जाना जाता है, आज भी दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले प्लेटफॉर्म पर अपना दबदबा साबित कर रही हैं। डेनमार्क की बड़ी दवा कंपनियां इसकी अच्छी मिसाल हैं, जिनकी डायबिटीज़ और मोटापे की दवाओं की मांग पूरी दुनिया में है। नीदरलैंड की मशीन बनाने वाली कंपनियां दुनिया भर के चिप बनाने वालों को ज़रूरी तकनीक देती हैं। कनाडा में परमाणु ऊर्जा, ब्राज़ील में ऊर्जा के नए साधन, और ब्रिटेन में वित्तीय सेवाएं, ये सब वैश्विक निवेश के अहम केंद्र बनकर उभरे हैं।

भारत की अपनी विकास कहानी आज भी बेहद मज़बूत और आकर्षक बनी हुई है, लेकिन पैसा बनाने के हमारे सफर का अगला अध्याय अब एक वैश्विक फलक पर लिखा जाएगा। जो निवेशक समझदारी, अनुशासन और विशेषज्ञों की सलाह के साथ यह राह अपनाएंगे, वे सचमुच देश की सीमाओं से भी आगे निकलेंगे, और अपनी पुरानी सोच की सीमाओं से भी।

 

https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/why-global-investment-is-becoming-the-next-big-step-for/article-61271

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