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क्या गिग वर्कर्स को मिलना चाहिए नौकरी जैसा हक? डिलीवरी पार्टनर्स की कमाई से लेकर पेंशन और बीमा तक समझिए पूरी बहस
Priyanka Mathur
भारत में गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को पहली बार सामाजिक सुरक्षा के कानूनी ढांचे में जगह मिली है; अब सवाल यह है कि क्या उन्हें पारंपरिक कर्मचारियों जैसी व्यापक सुरक्षा भी मिलनी चाहिए
भारत में ऑनलाइन डिलीवरी, कैब बुकिंग, घरेलू सेवाओं और फ्रीलांस काम के बढ़ने के साथ गिग इकोनॉमी तेजी से फैल रही है। लेकिन इन कामगारों की नौकरी पारंपरिक कर्मचारियों से अलग होती है। तय कार्यालय और नियमित ड्यूटी के बजाय वे अक्सर ऐप या प्लेटफॉर्म के जरिए काम करते हैं। ऐसे में उन्हें सामाजिक और श्रम सुरक्षा देने को लेकर बहस लगातार बढ़ रही है। भारत में इस दिशा में कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020 के लागू होने के बाद गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को कानूनी पहचान मिली है। इसमें जीवन और दिव्यांगता कवर, दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य, मातृत्व और वृद्धावस्था सुरक्षा जैसी योजनाओं का प्रावधान किया गया है।
गिग वर्कर और प्लेटफॉर्म वर्कर में अंतर
गिग वर्कर वह व्यक्ति है जो पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंध से बाहर काम करके कमाई करता है। प्लेटफॉर्म वर्कर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए ग्राहकों को सेवा देता है। डिलीवरी पार्टनर, कैब ड्राइवर और कई ऑनलाइन सेवा प्रदाता इसके उदाहरण हैं।
सामाजिक सुरक्षा और पेंशन की स्थिति
नए कानून में गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और सोशल सिक्योरिटी फंड का प्रावधान है। एग्रीगेटर्स को भी इस व्यवस्था में योगदान करना होगा। हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि हर गिग वर्कर को पारंपरिक सरकारी या निजी कर्मचारी की तरह निश्चित पेंशन अपने आप मिलने लगी है। लाभ संबंधित योजनाओं और उनकी पात्रता पर निर्भर करेंगे।
ई-श्रम से जोड़े जा रहे गिग वर्कर्स
सरकार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को ई-श्रम पोर्टल से जोड़ रही है। इसके जरिए कामगारों की पहचान और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक पहुंच आसान बनाने की कोशिश की जा रही है। जनवरी 2026 तक कई प्रमुख एग्रीगेटर्स को ई-श्रम के एग्रीगेटर मॉड्यूल से जोड़ा जा चुका था।
आय और नौकरी की सुरक्षा बड़ी चुनौती
गिग मॉडल में काम करने की आजादी और समय का लचीलापन एक फायदा है, लेकिन आय की अनिश्चितता भी बनी रहती है। डिलीवरी पार्टनर और कैब ड्राइवर को ईंधन, वाहन रखरखाव और काम के दौरान दुर्घटना जैसे खर्च और जोखिम भी उठाने पड़ सकते हैं। बहस केवल बीमा या पेंशन तक सीमित नहीं है। भुगतान, प्रोत्साहन, रेटिंग, अकाउंट निलंबन, दुर्घटना के समय सहायता और शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था भी गिग वर्कर्स के अधिकारों से जुड़े अहम मुद्दे हैं।
राजस्थान ने भी बनाई थी व्यवस्था
राजस्थान ने 2023 में गिग वर्कर्स के लिए कल्याण कानून और फंड की घोषणा की थी। इसके बाद राज्यों और केंद्र की पहलों ने प्लेटफॉर्म आधारित रोजगार को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की बहस को और तेज किया है। पारंपरिक कर्मचारी और गिग वर्कर का काम करने का तरीका अलग है, इसलिए दोनों के लिए बिल्कुल समान रोजगार मॉडल लागू करना आसान नहीं होगा। हालांकि दुर्घटना, बीमारी, वृद्धावस्था और आय संकट जैसी परिस्थितियों में न्यूनतम सामाजिक सुरक्षा की जरूरत दोनों वर्गों के कामगारों के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है।
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