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01 अगस्त महाकाल भस्म आरती: राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, भांग-चंदन से हुआ दिव्य श्रृंगार
धर्म डेस्क
सावन कृष्ण पक्ष तृतीया पर तड़के 4 बजे खुले मंदिर के पट, पंचामृत अभिषेक और भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार, 01 अगस्त को सावन माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर बाबा महाकाल की भस्म आरती पूरे वैदिक विधि-विधान और धार्मिक परंपराओं के साथ संपन्न हुई। तड़के सुबह करीब 4 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही गर्भगृह में विशेष पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हुआ। सावन के पावन महीने में महाकाल के दर्शन के लिए देशभर से आए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ सुबह से ही मंदिर परिसर में मौजूद रही। मंदिर परिसर "जय श्री महाकाल" के जयघोष से गूंजता रहा और भक्तों ने दिव्य भस्म आरती के दर्शन कर स्वयं को धन्य माना।
मंदिर के पट खुलने के बाद सबसे पहले गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक संपन्न हुआ। पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दूध, दही, घी, शहद, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक किया। अभिषेक के बाद भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया। इस दौरान भांग, चंदन, केसर, ड्राईफ्रूट, सुगंधित इत्र, रत्नजड़ित आभूषण और रंग-बिरंगे पुष्पों से बाबा महाकाल को राजा स्वरूप में सजाया गया। श्रृंगार के बाद भगवान का दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा।
भस्म आरती की शुरुआत पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार प्रथम घंटाल बजाकर की गई। इसके बाद हरिओम का पवित्र जल अर्पित किया गया और वैदिक मंत्रों के साथ भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के उपरांत ज्योतिर्लिंग को निर्धारित परंपरा के अनुसार वस्त्र से आच्छादित कर भस्म अर्पित की गई। महाकाल मंदिर की भस्म आरती देश की उन चुनिंदा धार्मिक परंपराओं में शामिल है, जिसकी अपनी विशिष्ट पहचान है और जिसे देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।

भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल का अलौकिक श्रृंगार पूरा किया गया। उन्हें रजत का शेषनाग मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की मालाएं, सुगंधित पुष्पहार और आकर्षक आभूषण पहनाए गए। पुजारियों ने भगवान को राजा के स्वरूप में सजाया, जिससे गर्भगृह का वातावरण और भी दिव्य दिखाई दिया। श्रृंगार के बाद जब भगवान के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए खुले तो मंदिर में मौजूद भक्त भाव-विभोर हो उठे।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाकाल की भस्म आरती का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि सावन, महाशिवरात्रि और अन्य विशेष अवसरों पर भस्म आरती के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। कई भक्त महीनों पहले से ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से भस्म आरती के लिए अनुमति प्राप्त करते हैं।
शनिवार सुबह भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की अच्छी संख्या देखने को मिली। दर्शन के लिए कतारों में खड़े भक्तों ने पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ अपनी बारी का इंतजार किया। दर्शन के बाद श्रद्धालु नंदी महाराज के पास पहुंचे और उनके कान में अपनी मनोकामनाएं व्यक्त कर आशीर्वाद मांगा। यह परंपरा भी महाकाल मंदिर की प्रमुख धार्मिक मान्यताओं में शामिल है, जिसे बड़ी संख्या में श्रद्धालु निभाते हैं।
मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। सुबह से ही सुरक्षा कर्मियों की तैनाती रही और दर्शन व्यवस्था को व्यवस्थित रखने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई। सावन माह होने के कारण मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। ऐसे में प्रशासन भीड़ प्रबंधन और दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने पर विशेष ध्यान दे रहा है।
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस दौरान देशभर के शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना होती है, लेकिन उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की भस्म आरती का महत्व सबसे अलग माना जाता है। बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर मंदिर में होने वाली यह आरती सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है और इसकी धार्मिक पहचान पूरे विश्व में है। हर दिन हजारों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं।
श्रद्धालुओं का कहना है कि महाकाल की भस्म आरती का अनुभव आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है। वैदिक मंत्रों की गूंज, ढोल-नगाड़ों की ध्वनि, शंखनाद और भक्तों के जयघोष के बीच होने वाली यह आरती हर किसी को भक्ति भाव से जोड़ देती है। सावन के इस पावन अवसर पर बाबा महाकाल के दिव्य राजा स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने सुख, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की।
महाकाल मंदिर में आने वाले दिनों में भी सावन के विशेष अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से निर्धारित नियमों का पालन करते हुए दर्शन करने और व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। धार्मिक आस्था, परंपरा और दिव्यता का अद्भुत संगम महाकाल की भस्म आरती में एक बार फिर देखने को मिला, जिसने श्रद्धालुओं को भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
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01 अगस्त महाकाल भस्म आरती: राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, भांग-चंदन से हुआ दिव्य श्रृंगार
धर्म डेस्क
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार, 01 अगस्त को सावन माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर बाबा महाकाल की भस्म आरती पूरे वैदिक विधि-विधान और धार्मिक परंपराओं के साथ संपन्न हुई। तड़के सुबह करीब 4 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही गर्भगृह में विशेष पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हुआ। सावन के पावन महीने में महाकाल के दर्शन के लिए देशभर से आए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ सुबह से ही मंदिर परिसर में मौजूद रही। मंदिर परिसर "जय श्री महाकाल" के जयघोष से गूंजता रहा और भक्तों ने दिव्य भस्म आरती के दर्शन कर स्वयं को धन्य माना।
मंदिर के पट खुलने के बाद सबसे पहले गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक संपन्न हुआ। पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दूध, दही, घी, शहद, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक किया। अभिषेक के बाद भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया। इस दौरान भांग, चंदन, केसर, ड्राईफ्रूट, सुगंधित इत्र, रत्नजड़ित आभूषण और रंग-बिरंगे पुष्पों से बाबा महाकाल को राजा स्वरूप में सजाया गया। श्रृंगार के बाद भगवान का दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा।
भस्म आरती की शुरुआत पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार प्रथम घंटाल बजाकर की गई। इसके बाद हरिओम का पवित्र जल अर्पित किया गया और वैदिक मंत्रों के साथ भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के उपरांत ज्योतिर्लिंग को निर्धारित परंपरा के अनुसार वस्त्र से आच्छादित कर भस्म अर्पित की गई। महाकाल मंदिर की भस्म आरती देश की उन चुनिंदा धार्मिक परंपराओं में शामिल है, जिसकी अपनी विशिष्ट पहचान है और जिसे देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।

भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल का अलौकिक श्रृंगार पूरा किया गया। उन्हें रजत का शेषनाग मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की मालाएं, सुगंधित पुष्पहार और आकर्षक आभूषण पहनाए गए। पुजारियों ने भगवान को राजा के स्वरूप में सजाया, जिससे गर्भगृह का वातावरण और भी दिव्य दिखाई दिया। श्रृंगार के बाद जब भगवान के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए खुले तो मंदिर में मौजूद भक्त भाव-विभोर हो उठे।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाकाल की भस्म आरती का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि सावन, महाशिवरात्रि और अन्य विशेष अवसरों पर भस्म आरती के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। कई भक्त महीनों पहले से ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से भस्म आरती के लिए अनुमति प्राप्त करते हैं।
शनिवार सुबह भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की अच्छी संख्या देखने को मिली। दर्शन के लिए कतारों में खड़े भक्तों ने पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ अपनी बारी का इंतजार किया। दर्शन के बाद श्रद्धालु नंदी महाराज के पास पहुंचे और उनके कान में अपनी मनोकामनाएं व्यक्त कर आशीर्वाद मांगा। यह परंपरा भी महाकाल मंदिर की प्रमुख धार्मिक मान्यताओं में शामिल है, जिसे बड़ी संख्या में श्रद्धालु निभाते हैं।
मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। सुबह से ही सुरक्षा कर्मियों की तैनाती रही और दर्शन व्यवस्था को व्यवस्थित रखने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई। सावन माह होने के कारण मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। ऐसे में प्रशासन भीड़ प्रबंधन और दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने पर विशेष ध्यान दे रहा है।
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस दौरान देशभर के शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना होती है, लेकिन उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की भस्म आरती का महत्व सबसे अलग माना जाता है। बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर मंदिर में होने वाली यह आरती सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है और इसकी धार्मिक पहचान पूरे विश्व में है। हर दिन हजारों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं।
श्रद्धालुओं का कहना है कि महाकाल की भस्म आरती का अनुभव आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है। वैदिक मंत्रों की गूंज, ढोल-नगाड़ों की ध्वनि, शंखनाद और भक्तों के जयघोष के बीच होने वाली यह आरती हर किसी को भक्ति भाव से जोड़ देती है। सावन के इस पावन अवसर पर बाबा महाकाल के दिव्य राजा स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने सुख, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की।
महाकाल मंदिर में आने वाले दिनों में भी सावन के विशेष अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से निर्धारित नियमों का पालन करते हुए दर्शन करने और व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। धार्मिक आस्था, परंपरा और दिव्यता का अद्भुत संगम महाकाल की भस्म आरती में एक बार फिर देखने को मिला, जिसने श्रद्धालुओं को भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
