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त्योहारों से पहले महंगाई का असर: टूथपेस्ट, पेंट, नमक समेत कई जरूरी सामान होंगे महंगे
बिजनेस डेस्क
HUL, एशियन पेंट्स, टाटा कंज्यूमर सहित कई बड़ी कंपनियां बढ़ाएंगी कीमतें, बढ़ती लागत और वैश्विक हालात बने वजह
देशभर में त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले आम लोगों की जेब पर महंगाई का असर और बढ़ने वाला है। रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले कई जरूरी सामान आने वाले दिनों में महंगे हो सकते हैं। देश की प्रमुख एफएमसीजी, पेंट, डेयरी और कंज्यूमर कंपनियों ने संकेत दिए हैं कि बढ़ती उत्पादन लागत और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमतों में तेजी के कारण उत्पादों के दाम बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। इसका असर टूथपेस्ट, डिटर्जेंट, डिशवॉश बार, नमक, पेंट, घरेलू उपकरण और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं पर देखने को मिल सकता है।
कंपनियों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने उत्पादन लागत को काफी बढ़ा दिया है। कच्चे तेल से बनने वाले कई रसायनों का उपयोग डिटर्जेंट, साबुन, पैकेजिंग और पेंट जैसे उत्पादों में किया जाता है। जब इनकी कीमत बढ़ती है तो कंपनियों के लिए लागत संभालना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में वे अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने का फैसला ले रही हैं।
देश की सबसे बड़ी एफएमसीजी कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) ने संकेत दिया है कि आने वाली तिमाही में होम केयर सेगमेंट के कुछ उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की जा सकती है। कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक बाजार में अस्थिरता का सीधा असर उत्पादन लागत पर पड़ा है। इसी कारण डिटर्जेंट और डिशवॉशिंग बार जैसी श्रेणियों में कीमतों में बदलाव किया जाएगा।
केवल एफएमसीजी कंपनियां ही नहीं, बल्कि अन्य क्षेत्रों की कंपनियां भी कीमतें बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। एशियन पेंट्स, डोडला डेयरी, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और हैवेल्स जैसी कंपनियों ने भी लागत बढ़ने की बात कही है। टाटा साल्ट की कीमतों में पहले ही लगभग 7 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो चुकी है, जबकि हैवेल्स अपने कुछ उत्पादों के दाम करीब 8 प्रतिशत तक बढ़ा चुकी है। माना जा रहा है कि आने वाले सप्ताहों में अन्य कंपनियां भी इसी दिशा में कदम उठा सकती हैं।
त्योहारों का मौसम अगस्त से नवंबर तक चलता है और इस दौरान बाजार में खरीदारी सबसे अधिक होती है। रक्षा बंधन, जन्माष्टमी, गणेशोत्सव, नवरात्रि, दशहरा और दीपावली जैसे त्योहारों के चलते उपभोक्ता बड़ी मात्रा में घरेलू सामान, पेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य वस्तुएं खरीदते हैं। कई कंपनियों की सालाना बिक्री का लगभग एक-तिहाई हिस्सा इसी अवधि में होता है। ऐसे में कंपनियां बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालने की स्थिति में रहती हैं।
महंगाई के ताजा आंकड़े भी चिंता बढ़ा रहे हैं। जून महीने में खुदरा महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर पहुंच गई थी। हालांकि यह अभी भी आरबीआई के 2 से 6 प्रतिशत के सहनीय दायरे में है, लेकिन लगातार बढ़ती लागत भविष्य में कीमतों पर और दबाव बना सकती है। यदि खाद्य पदार्थों की कीमतें भी बढ़ती हैं तो महंगाई आम परिवारों के मासिक बजट को और प्रभावित कर सकती है।
केवल कच्चे तेल की कीमतें ही नहीं, बल्कि ट्रांसपोर्टेशन, पैकेजिंग, बिजली, मजदूरी और अन्य खर्चों में भी वृद्धि हुई है। इन सभी कारणों से कंपनियों की कुल उत्पादन लागत बढ़ गई है। यदि कंपनियां कीमतें नहीं बढ़ातीं तो उनके लाभ पर असर पड़ सकता है। इसलिए कई कंपनियां चरणबद्ध तरीके से कीमतों में बदलाव कर रही हैं।
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कमी नहीं आती और पश्चिम एशिया में तनाव बना रहता है, तो आने वाले महीनों में और भी कई उत्पाद महंगे हो सकते हैं। इसका असर सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा। खासकर मध्यम वर्ग और सीमित आय वाले परिवारों को अपने मासिक खर्च का बजट दोबारा बनाना पड़ सकता है।
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक 3 से 5 अगस्त के बीच होने जा रही है। ब्याज दरों में बदलाव की संभावना कम है, लेकिन यदि महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता रहा तो भविष्य में नीतिगत फैसलों पर इसका असर पड़ सकता है। फिलहाल बैंक ब्याज दरों को स्थिर रखकर आर्थिक गतिविधियों और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर सकते हैं।
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त्योहारों से पहले महंगाई का असर: टूथपेस्ट, पेंट, नमक समेत कई जरूरी सामान होंगे महंगे
बिजनेस डेस्क
देशभर में त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले आम लोगों की जेब पर महंगाई का असर और बढ़ने वाला है। रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले कई जरूरी सामान आने वाले दिनों में महंगे हो सकते हैं। देश की प्रमुख एफएमसीजी, पेंट, डेयरी और कंज्यूमर कंपनियों ने संकेत दिए हैं कि बढ़ती उत्पादन लागत और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमतों में तेजी के कारण उत्पादों के दाम बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। इसका असर टूथपेस्ट, डिटर्जेंट, डिशवॉश बार, नमक, पेंट, घरेलू उपकरण और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं पर देखने को मिल सकता है।
कंपनियों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने उत्पादन लागत को काफी बढ़ा दिया है। कच्चे तेल से बनने वाले कई रसायनों का उपयोग डिटर्जेंट, साबुन, पैकेजिंग और पेंट जैसे उत्पादों में किया जाता है। जब इनकी कीमत बढ़ती है तो कंपनियों के लिए लागत संभालना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में वे अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने का फैसला ले रही हैं।
देश की सबसे बड़ी एफएमसीजी कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) ने संकेत दिया है कि आने वाली तिमाही में होम केयर सेगमेंट के कुछ उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की जा सकती है। कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक बाजार में अस्थिरता का सीधा असर उत्पादन लागत पर पड़ा है। इसी कारण डिटर्जेंट और डिशवॉशिंग बार जैसी श्रेणियों में कीमतों में बदलाव किया जाएगा।
केवल एफएमसीजी कंपनियां ही नहीं, बल्कि अन्य क्षेत्रों की कंपनियां भी कीमतें बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। एशियन पेंट्स, डोडला डेयरी, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और हैवेल्स जैसी कंपनियों ने भी लागत बढ़ने की बात कही है। टाटा साल्ट की कीमतों में पहले ही लगभग 7 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो चुकी है, जबकि हैवेल्स अपने कुछ उत्पादों के दाम करीब 8 प्रतिशत तक बढ़ा चुकी है। माना जा रहा है कि आने वाले सप्ताहों में अन्य कंपनियां भी इसी दिशा में कदम उठा सकती हैं।
त्योहारों का मौसम अगस्त से नवंबर तक चलता है और इस दौरान बाजार में खरीदारी सबसे अधिक होती है। रक्षा बंधन, जन्माष्टमी, गणेशोत्सव, नवरात्रि, दशहरा और दीपावली जैसे त्योहारों के चलते उपभोक्ता बड़ी मात्रा में घरेलू सामान, पेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य वस्तुएं खरीदते हैं। कई कंपनियों की सालाना बिक्री का लगभग एक-तिहाई हिस्सा इसी अवधि में होता है। ऐसे में कंपनियां बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालने की स्थिति में रहती हैं।
महंगाई के ताजा आंकड़े भी चिंता बढ़ा रहे हैं। जून महीने में खुदरा महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर पहुंच गई थी। हालांकि यह अभी भी आरबीआई के 2 से 6 प्रतिशत के सहनीय दायरे में है, लेकिन लगातार बढ़ती लागत भविष्य में कीमतों पर और दबाव बना सकती है। यदि खाद्य पदार्थों की कीमतें भी बढ़ती हैं तो महंगाई आम परिवारों के मासिक बजट को और प्रभावित कर सकती है।
केवल कच्चे तेल की कीमतें ही नहीं, बल्कि ट्रांसपोर्टेशन, पैकेजिंग, बिजली, मजदूरी और अन्य खर्चों में भी वृद्धि हुई है। इन सभी कारणों से कंपनियों की कुल उत्पादन लागत बढ़ गई है। यदि कंपनियां कीमतें नहीं बढ़ातीं तो उनके लाभ पर असर पड़ सकता है। इसलिए कई कंपनियां चरणबद्ध तरीके से कीमतों में बदलाव कर रही हैं।
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कमी नहीं आती और पश्चिम एशिया में तनाव बना रहता है, तो आने वाले महीनों में और भी कई उत्पाद महंगे हो सकते हैं। इसका असर सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा। खासकर मध्यम वर्ग और सीमित आय वाले परिवारों को अपने मासिक खर्च का बजट दोबारा बनाना पड़ सकता है।
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक 3 से 5 अगस्त के बीच होने जा रही है। ब्याज दरों में बदलाव की संभावना कम है, लेकिन यदि महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता रहा तो भविष्य में नीतिगत फैसलों पर इसका असर पड़ सकता है। फिलहाल बैंक ब्याज दरों को स्थिर रखकर आर्थिक गतिविधियों और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर सकते हैं।
