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ताइपे ओपन के फाइनल में पहुंचीं तन्वी शर्मा, शानदार जीत से खिताब से एक कदम दूर
स्पोर्ट्स डेस्क
17 वर्षीय भारतीय शटलर ने सेमीफाइनल में चीनी ताइपे की हुआंग यू-हसुन को सीधे गेम में हराया, अब रविवार को खेलेंगी सुपर 300 खिताबी मुकाबला
भारतीय बैडमिंटन के लिए एक और बड़ी खुशखबरी सामने आई है। देश की युवा शटलर तन्वी शर्मा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ताइपे ओपन सुपर 300 बैडमिंटन टूर्नामेंट के महिला एकल वर्ग के फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। महज 17 वर्ष की उम्र में तन्वी ने अपने आत्मविश्वास, तेज रफ्तार खेल और शानदार तकनीक का प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल में चीनी ताइपे की खिलाड़ी हुआंग यू-हसुन को सीधे गेम में हराकर खिताबी मुकाबले का टिकट हासिल किया।
शनिवार को खेले गए इस सेमीफाइनल मुकाबले में तन्वी शर्मा ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया और अपने प्रतिद्वंद्वी को पूरे मैच के दौरान दबाव में रखा। उन्होंने मुकाबला 21-17 और 21-11 से अपने नाम किया। यह मैच केवल 33 मिनट तक चला और भारतीय खिलाड़ी ने दोनों गेम में बेहतरीन नियंत्रण बनाए रखा। इस जीत के साथ तन्वी अब अपने करियर के सबसे महत्वपूर्ण मुकाबलों में से एक खेलने के लिए तैयार हैं।
पंजाब की रहने वाली तन्वी शर्मा पिछले कुछ समय से लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। जूनियर स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने के बाद अब वह सीनियर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी भारत के लिए नई उम्मीद बनकर उभरी हैं। पिछले वर्ष यूएस ओपन सुपर 300 प्रतियोगिता में उपविजेता रहने वाली तन्वी ने इस बार ताइपे ओपन में अपने प्रदर्शन से साबित कर दिया कि वह बड़े मंच पर भी लगातार अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता रखती हैं।
सेमीफाइनल मुकाबले की शुरुआत दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़े संघर्ष के साथ हुई। पहले गेम में हुआंग यू-हसुन ने कुछ अच्छे शॉट लगाकर मुकाबले को बराबरी पर बनाए रखने की कोशिश की। हालांकि तन्वी ने धैर्य बनाए रखा और सही समय पर आक्रामक खेल दिखाते हुए बढ़त हासिल कर ली। उन्होंने पहले गेम को 21-17 से अपने नाम कर मैच में मजबूत स्थिति बना ली।
पहले गेम की जीत के बाद तन्वी का आत्मविश्वास और बढ़ गया। दूसरे गेम में उन्होंने विपक्षी खिलाड़ी को संभलने का कोई मौका नहीं दिया। शानदार स्मैश, सटीक ड्रॉप शॉट और तेज कोर्ट कवरेज के दम पर उन्होंने लगातार अंक जुटाए। उनकी आक्रामक रणनीति के सामने हुआंग यू-हसुन पूरी तरह दबाव में नजर आईं। आखिरकार तन्वी ने दूसरा गेम 21-11 से जीतकर सीधे गेम में मुकाबला समाप्त कर दिया।
इस जीत के साथ तन्वी शर्मा ने न केवल फाइनल में जगह बनाई बल्कि भारतीय बैडमिंटन के भविष्य को लेकर भी नई उम्मीदें जगा दी हैं। कम उम्र में जिस तरह का आत्मविश्वास और निरंतरता उन्होंने दिखाई है, वह उन्हें देश की उभरती हुई स्टार खिलाड़ियों में शामिल करता है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वह इसी तरह अपना प्रदर्शन जारी रखती हैं तो आने वाले वर्षों में भारत के लिए बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में पदक जीतने की मजबूत दावेदार बन सकती हैं।
अब रविवार को होने वाले फाइनल मुकाबले में तन्वी शर्मा खिताब जीतने के इरादे से कोर्ट पर उतरेंगी। फाइनल में उनका सामना भारत की उन्नति हुड्डा या वियतनाम की छठी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी गुयेन थुय लिन्ह में से किसी एक से होगा। दोनों ही खिलाड़ी अनुभवी हैं, इसलिए फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है।
भारतीय बैडमिंटन ने पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार सफलता हासिल की है। पी.वी. सिंधु, साइना नेहवाल, लक्ष्य सेन, एच.एस. प्रणय, सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी जैसे खिलाड़ियों ने विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। अब नई पीढ़ी के खिलाड़ियों में तन्वी शर्मा का नाम तेजी से उभर रहा है। उनकी सफलता यह संकेत देती है कि भारतीय बैडमिंटन का भविष्य मजबूत हाथों में है।
तन्वी की उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि सुपर 300 स्तर के टूर्नामेंट विश्व बैडमिंटन रैंकिंग के लिहाज से काफी अहम होते हैं। ऐसे टूर्नामेंटों में अच्छा प्रदर्शन खिलाड़ियों को रैंकिंग अंक दिलाने के साथ-साथ बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के लिए आत्मविश्वास भी प्रदान करता है।
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ताइपे ओपन के फाइनल में पहुंचीं तन्वी शर्मा, शानदार जीत से खिताब से एक कदम दूर
स्पोर्ट्स डेस्क
भारतीय बैडमिंटन के लिए एक और बड़ी खुशखबरी सामने आई है। देश की युवा शटलर तन्वी शर्मा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ताइपे ओपन सुपर 300 बैडमिंटन टूर्नामेंट के महिला एकल वर्ग के फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। महज 17 वर्ष की उम्र में तन्वी ने अपने आत्मविश्वास, तेज रफ्तार खेल और शानदार तकनीक का प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल में चीनी ताइपे की खिलाड़ी हुआंग यू-हसुन को सीधे गेम में हराकर खिताबी मुकाबले का टिकट हासिल किया।
शनिवार को खेले गए इस सेमीफाइनल मुकाबले में तन्वी शर्मा ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया और अपने प्रतिद्वंद्वी को पूरे मैच के दौरान दबाव में रखा। उन्होंने मुकाबला 21-17 और 21-11 से अपने नाम किया। यह मैच केवल 33 मिनट तक चला और भारतीय खिलाड़ी ने दोनों गेम में बेहतरीन नियंत्रण बनाए रखा। इस जीत के साथ तन्वी अब अपने करियर के सबसे महत्वपूर्ण मुकाबलों में से एक खेलने के लिए तैयार हैं।
पंजाब की रहने वाली तन्वी शर्मा पिछले कुछ समय से लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। जूनियर स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने के बाद अब वह सीनियर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी भारत के लिए नई उम्मीद बनकर उभरी हैं। पिछले वर्ष यूएस ओपन सुपर 300 प्रतियोगिता में उपविजेता रहने वाली तन्वी ने इस बार ताइपे ओपन में अपने प्रदर्शन से साबित कर दिया कि वह बड़े मंच पर भी लगातार अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता रखती हैं।
सेमीफाइनल मुकाबले की शुरुआत दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़े संघर्ष के साथ हुई। पहले गेम में हुआंग यू-हसुन ने कुछ अच्छे शॉट लगाकर मुकाबले को बराबरी पर बनाए रखने की कोशिश की। हालांकि तन्वी ने धैर्य बनाए रखा और सही समय पर आक्रामक खेल दिखाते हुए बढ़त हासिल कर ली। उन्होंने पहले गेम को 21-17 से अपने नाम कर मैच में मजबूत स्थिति बना ली।
पहले गेम की जीत के बाद तन्वी का आत्मविश्वास और बढ़ गया। दूसरे गेम में उन्होंने विपक्षी खिलाड़ी को संभलने का कोई मौका नहीं दिया। शानदार स्मैश, सटीक ड्रॉप शॉट और तेज कोर्ट कवरेज के दम पर उन्होंने लगातार अंक जुटाए। उनकी आक्रामक रणनीति के सामने हुआंग यू-हसुन पूरी तरह दबाव में नजर आईं। आखिरकार तन्वी ने दूसरा गेम 21-11 से जीतकर सीधे गेम में मुकाबला समाप्त कर दिया।
इस जीत के साथ तन्वी शर्मा ने न केवल फाइनल में जगह बनाई बल्कि भारतीय बैडमिंटन के भविष्य को लेकर भी नई उम्मीदें जगा दी हैं। कम उम्र में जिस तरह का आत्मविश्वास और निरंतरता उन्होंने दिखाई है, वह उन्हें देश की उभरती हुई स्टार खिलाड़ियों में शामिल करता है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वह इसी तरह अपना प्रदर्शन जारी रखती हैं तो आने वाले वर्षों में भारत के लिए बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में पदक जीतने की मजबूत दावेदार बन सकती हैं।
अब रविवार को होने वाले फाइनल मुकाबले में तन्वी शर्मा खिताब जीतने के इरादे से कोर्ट पर उतरेंगी। फाइनल में उनका सामना भारत की उन्नति हुड्डा या वियतनाम की छठी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी गुयेन थुय लिन्ह में से किसी एक से होगा। दोनों ही खिलाड़ी अनुभवी हैं, इसलिए फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है।
भारतीय बैडमिंटन ने पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार सफलता हासिल की है। पी.वी. सिंधु, साइना नेहवाल, लक्ष्य सेन, एच.एस. प्रणय, सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी जैसे खिलाड़ियों ने विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। अब नई पीढ़ी के खिलाड़ियों में तन्वी शर्मा का नाम तेजी से उभर रहा है। उनकी सफलता यह संकेत देती है कि भारतीय बैडमिंटन का भविष्य मजबूत हाथों में है।
तन्वी की उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि सुपर 300 स्तर के टूर्नामेंट विश्व बैडमिंटन रैंकिंग के लिहाज से काफी अहम होते हैं। ऐसे टूर्नामेंटों में अच्छा प्रदर्शन खिलाड़ियों को रैंकिंग अंक दिलाने के साथ-साथ बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के लिए आत्मविश्वास भी प्रदान करता है।
